पतंजलि विश्वविद्यालय में स्वागत समारोह का आयोजन
हैदराबाद, पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार परिसर में आचार्य प्रसन्नसागरजी म.सा. के पदार्पण पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। अवसर पर स्वामी रामदेव एवं आचार्य बालकृष्ण ने म.सा. का भावपूर्ण अभिनंदन किया। जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रसन्नसागरजी म.सा. ने कहा कि स्वामी रामदेव तथा आचार्य बालकृष्ण मानवता के स्वास्थ्य, समाज की सम्पन्नता तथा विश्व सद्भावना के लिए निस्वार्थ भाव से पारमार्थिक कार्य कर रहे हैं। उन्होंने योग व आयुर्वेद की महति साधना की है।
म.सा. ने प्रकृति, संस्कृति व विकृति की विस्तफत व्याख्या की। उन्होंने कहा कि प्रकृति व संस्कृति के अनुरूप जीवन जीएँ, विकृति में जीवन जीना दरिद्रता का प्रतीक है। पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं योगत्रषि स्वामी रामदेव ने कहा कि प्रसन्नसागरजी म.सा. का आगमन न केवल जैन संत का आगमन है, बल्कि समग्र भारतीय दर्शन के उस शुद्धतम चिंतन का उद्घोष है, जो सनातन परंपरा की आत्मा है।
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जैन धर्म और पतंजलि विश्वविद्यालय का आध्यात्मिक संगम
जैन धर्म सनातन धर्म का शुद्धतम रूप है, जो तप, संयम, अहिंसा और आत्मा की चेतना का मार्गदर्शन करता है। उन्होंने कहा कि गुणातीत-भावातीत अवस्था में जीना ही सच्चा जीवन है। उन्होंने कहा कि दिगम्बर होने का अर्थ देह के समस्त अध्यासों, आभासों व दैहिक अनुभूतियों से पार हो जाना है। प्रसन्नसागरजी ने सम्पूर्ण जीवन पूर्ण शुचिता व पूर्ण संयम से जिया है, जो इनके व्यक्तित्व में परिलक्षित होता है।
पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति एवं प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य आचार्य बालकृष्ण ने आचार्यश्री के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए संस्कृत में रचित आठ श्लोकों से युक्त प्रशस्ति-पत्र का पाठ किया। उन्होंने कहा कि प्रसन्नसागरजी के शुचिता पूर्ण जीवन, तप व पुरुषार्थ को शब्दों में नहीं बांधा जा सकता। समारोह में जैन समाज की ओर से स्वामी रामदेव को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसी क्रम में पतंजलि विश्वविद्यालय की ओर से आचार्य प्रसन्नसागरजी म.सा. को विशेष प्रशस्ति-पत्र भेंट किया गया।
इससे पूर्व म.सा. ने पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट का भ्रमण कर पतंजलि के अनुसंधानपरक कार्यों की प्रसंशा की। उन्होंने पतंजलि हर्बल गार्डन में वृक्षारोपण भी किया। अवसर पर जैन मुनि पीयूषसागरजी, अप्रमत्तसागरजी, परिमलसागरजी, आचार्य नैगमसागरजी, माता ज्ञानप्रभाजी, चरित्रप्रभाजी व पुण्यप्रभाजी की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में पतंजलि विश्वविद्यालय की कुलानुशासिका प्रो. साध्वी देवप्रिया, प्रतिकुलपति प्रो. मयंक कुमार अग्रवाल, संकाय अध्यक्षों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की भागीदारी रही।
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