जब गांधी घर में महकेगी देशी व्यंजनों की खुशबू

अतिथियों को समृद्ध ग्रामीण परंपरा, हस्तशिल्प, कला तथा साहित्य की जानकारी दी जाएगी। इससे ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, ग्राम स्वराज, आत्मनिर्भर आर्थिकी, कला-कौशल और आत्म-सम्मान के पाए मजबूत होंगे। गांधी भवन में आयोजित प्रथम राष्ट्रीय जैविक उत्सव के समापन-दिवस पर विचार-सत्र के दरम्यान डॉक्टर सुधीर सक्सेना, राजेश बादल, जे पी दीवान और परीक्षित सिंह के बीच गहन विचार-मंथन के फलस्वरूप उक्त फ़लश्रुति सामने आई। गांधी भवन के मुक्ताकाशी सभागार में इस शानदार कामयाबी के बाद हर महीने जैविक उत्सव करने का फ़ैसला किया गया है।

भोपाल में पिछले पखवाड़े आयोजित त्रिदिवसीय राष्ट्रीय गांधी जैविक उत्सव में विचार-मंथन के फलस्वरूप समूचे देश के गाँवों में महात्मा गांधी की अवधारणा के अनुरूप गांधी घर की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ। पत्थर, मिट्टी और काठ सहित स्थानीय सामग्री से देशज वास्तु के अनुरूप निर्मित इन घरों में किफायती दरों पर ठहरने के साथ आंचलिक व्यंजन परोसे जाएँगे।

अतिथियों को समृद्ध ग्रामीण परंपरा, हस्तशिल्प, कला तथा साहित्य की जानकारी दी जाएगी। इससे ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, ग्राम स्वराज, आत्मनिर्भर आर्थिकी, कला-कौशल और आत्म-सम्मान के पाए मजबूत होंगे। गांधी भवन में आयोजित प्रथम राष्ट्रीय जैविक उत्सव के समापन-दिवस पर विचार-सत्र के दरम्यान डॉक्टर सुधीर सक्सेना, राजेश बादल, जे पी दीवान और परीक्षित सिंह के बीच गहन विचार-मंथन के फलस्वरूप उक्त फ़लश्रुति सामने आई।

गांधी भवन के मुक्ताकाशी सभागार में इस शानदार कामयाबी के बाद हर महीने जैविक उत्सव करने का फ़ैसला किया गया है। मध्य भारत के सबसे बड़े गांधी भवन में तीन दिवसीय राष्ट्रीय गांधी जैविक उत्सव का भव्य समापन हुआ। इसमें क़रीब आधा दर्ज़न प्रदेशों के स्वयंसेवी संगठनों, किसानों, जैविक विशेषज्ञों, पत्रकारों, लेखकों और समाज सेवियों ने हिस्सा लिया।

भारत में पहला जैविक उत्सव: किसानों को लाभ और नए गांधी घर की योजना

भारत का यह पहला जैविक उत्सव था, जिसमें लगभग 30 जैविक स्टॉल के प्रतिनिधियों के लिए निशुल्क आवास और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई गई। स्टॉल का कोई शुल्क नहीं लिया गया। इसके अलावा यह पहली बार हुआ, जब उत्सव में किसानों की बची हुई सामग्री को भी गांधी भवन ने ख़रीद लिया। इससे उन्हें कोई घाटा नहीं हुआ। आयोजन में छ विमर्श सत्र हुए। इनमें निर्णय लिया गया कि हर महीने एक दिन का जैविक उत्सव गांधी भवन में होगा।

गांधी भवन परिसर में एक गांधी घर भी बनाया जाएगा। इसमें अन्य अतिथियों के अलावा किसान बिना कोई शुल्क दिए ठहर सकेंगे। इस गांधी घर का निर्माण मिट्टी, गोबर, भूसा और चूने से किया जाएगा। भवन में शीघ्र ही सौर ऊर्जा संचालित बिजली बनने लगेगी। उत्सव में प्रतिदिन दो वैचारिक सत्र हुए। इनमें जैविक खेती से लाभ, उर्वरकों के प्रयोग से ऩुकसान, किचन गार्डन, रूफ गार्डन, पर्यावरण संतुलन, स्वच्छ पानी की उपलब्धता, पर्यावरणीय पर्यटन, प्राकृतिक एवं परंपरागत जैविक खेती की व्याख्या तथा महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज पर गहन मंथन हुआ।

इन सत्रों में हुए विमर्श का निचोड़ एक दस्तावेज़ की शक्ल में शीघ्र ही लोकार्पित किया जाएगा। जिन उत्पादों को सबसे अधिक खरीदा व सराहा गया, उनमें आम, आँवला, मिर्च, करौंदा और कैंथे (कबीट) और अंडिया (सहजन की जड़ का अचार), ताज़ी सब्ज़ियां, कठिया गेंहूँ का दलिया, जैविक मूँग, चना, उड़द, अरहर और मसूर की दाल, हल्दी, धनिया, महुआ, गुड़, गरम मसाला और अंगिठा, सूरन, शकरकंद और खादी के वस्त्र तथा भोपाल की पहचान ज़री-दोज़ी के उत्पादों की पी ज़बरदस्त हुई।

गांधी भवन में उत्सव और पुस्तक लोकार्पण का पारिवारिक माहौल

प्रतिभागियों को छतरपुर के कार्यकर्ताओं की ओर से बनाए गए ताज़े ठडूले बेहद पसंद आए। रात में सांस्कृतिक कार्पामों के तहत लोक-संगीत से मनोरंजन हुआ। इस राष्ट्रीय समागम के अंतिम दिन गांधी भवन न्यास के सचिव दयाराम नामदेव की संस्मरणात्मक पुस्तक बीते दिनों की बीती यादें का लोकार्पण किया गया। श्रीनामदेव संत विनोबा भावे की भूदान-यात्रा में सहयोगी रहे हैं।

लोकार्पण समारोह में पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर, पूर्व मुख्य आयकर आयुक्त और जैविक तथा पर्यावरण आंदोलन के आर के पालीवाल, प्रख्यात चिंतक और समाजवादी विचारक रघु ठाकुर, जाने-माने शायर आलोक त्यागी (दुष्यंत कुमार के पुत्र), राष्ट्रीय नीति आयोग के साथ साझा कार्पाम चला रहीं सुश्री उपमा दीवान, छतरपुर गांधी स्मारक निधि की प्रभारी और किसान सुश्री दमयंती पाणी, गांधीवादी विचारक प्रेमनारायण मिश्रा, कवि और लेखक डॉक्टर सुधीर सक्सेना, बाल-साहित्य के लिए आंदोलन चला रहे महेश सक्सेना, नर्मदा बचाओ आंदोलन के सर्वोदय प्रेस सर्विस के संपादक राकेश दीवान, गांधीवादी पत्रकार और बायोपिक निर्माता निर्देशक राजेश बादल, स्वयंसेवी संस्था विकास संवाद के कर्ताधर्ता सचिन जैन, समाजवादी चिंतक बाल मुकुंद भारती, सप्रे संग्रहालय समिति के अध्यक्ष डॉक्टर शिवकुमार अवस्थी और फिल्म-टीवी पत्रकार तथा जैविक खेती कर रहे जय प्रकाश दीवान, युवा विचारक तथा गांधीवादी कार्यकर्त्ता अंकित मिश्रा तथा पुस्तक के प्रकाशक और वरिष्ठ पत्रकार कैलाश आदमी भी मौजूद थे।

डॉ. सुधीर सक्सेना
डॉ. सुधीर सक्सेना

कार्पाम में उपस्थित लोग उस समय भावुक हो गए, जब श्री नामदेव ने पुस्तक प्रसंग बताया। तीन दिन के इस आयोजन में कृषि जानकार पद्मश्री बाबूलाल दहिया के खेती-किसानी से जुड़े व्यावहारिक अनुभवों का सभी ने लाभ उठाया। इसके अलावा गांधी भवन न्यास के अध्यक्ष संजॉय सिंह ने गांधी भवन में ऐसी ही गतिविधियों को तेज़ करने पर ज़ोर दिया। कई मायनों में यह पारिवारिक उत्सव बन गया।

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