लेखा जोखा-2025 : ऑपरेशन सिंदूर व एसआईआर के इर्द-गिर्द घूमती रही सियासत
बिहार विधानसभा के लिए मतदान 6 व 11 नवंबर 2025 को हुआ, जिसमें नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए ने इंडिया गठबंधन पर प्रभावी जीत दर्ज की और उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में दसवीं बार शपथ ली। लेकिन बिहार का चुनाव चुनाव आयोग द्वारा बहुत कम समय में करायी गई एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के कारण अधिक चर्चा में रहा और यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। बाद में चुनाव आयोग ने छह अन्य राज्यों में भी एसआईआर करायी, जिसमें यह आरोप लगे कि कम समय में अधिक काम के तनाव व दबाव के कारण 40 से अधिक बीएलओ (ब्लॉक लेवल ऑफिसर) की मौत आत्महत्या करने या दिल का दौरा पड़ने से हुई।
इस साल राष्ट्रीय राजनीति में असल भूचाल उस समय आया जब संसद के मानसून सत्र के पहले दिन यानी 21 जुलाई 2025 को राज्यसभा की कार्यवाही का दिनभर संचालन करने के बाद शाम को उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारण बताते हुए अचानक तुरंत प्रभाव से अपने पद से इस्त़ीफा दे दिया। किसी को भी य़कीन नहीं था कि त्यागपत्र की वजह वही थी जो धनखड़ ने बतायी थी।
सियासी अटकलों का बाज़ार अवश्य गर्म हुआ, जो अभी तक जारी है, विशेषकर धनखड़ की पहले ख़ामोशी और फिर राजनीतिक संकेतों से, लेकिन वास्तविक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है, जबकि 9 सितंबर 2025 को सीपी राधाकृष्णन को देश का 15वां उप-राष्ट्रपति चुन लिया गया। वैसे इस वर्ष सबसे अधिक राजनीतिक बहस ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अचानक की गई सीज़फायर, बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर और विपक्ष द्वारा वोट चोरी के आरोपों पर हुई।
गौरतलब है कि सीमा पार से आये आतंकियों ने 22 अप्रैल 2025 को नाम पूछकर 26 व्यक्तियों की हत्या कर दी थी जब वह पहलगाम में पर्यटन के लिए आये थे। इसके जवाब में बुधवार (7 मई 2025) की सुबह 1:30 बजे से कुछ पहले भारतीय सेना ने एक्स पर पोस्ट किया- स्ट्राइक के लिए तैयार, जीत के लिए प्रशिक्षित। इसके बाद पाकिस्तान व पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकियों के 9 ठिकाने धुआं-धुआं हो गये, जिनमें वह 2 ठिकाने भी थे जो बालाकोट एरियल स्ट्राइक (फरवरी 2019) के दौरान छूट गये थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस सफल ऑपरेशन सिंदूर में लगभग 90 आतंकी ढेर हुए।
दोनों पक्षों ने युद्ध की घोषणा नहीं की, बमबारी कई दिन जारी
इस स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने भी चीनी हथियारों से भारत के कुछ सीमावर्ती इलाकों पर हमला किया, जिसका भारत की एयऱफोर्स ने मुंहतोड़ जवाब दिया। हालांकि दोनों पक्षों में से किसी ने भी युद्ध की घोषणा नहीं की, लेकिन बमबारी का सिलसिला कई दिन तक जारी रहा और अचानक 10 मई 2025 की शाम को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर घोषणा की कि उन्होंने ट्रेड करने का ऑफर देकर दो परमाणु बम वाले देशों भारत व पाकिस्तान में सीज़फायर करा दिया है।
ट्रंप ने लगभग चार दर्जन बार अपने इस दावे को दोहराया, लेकिन नई दिल्ली की वजह से कभी इसका सीधा खंडन नहीं किया गया। इस अचानक सीज़फायर पर सवाल उठने लाज़मी थे; क्योंकि भारत ने निर्णायक बढ़त बनायी हुई थी और यह भी प्रश्न था कि सीज़फायर की सूचना पहले ट्रंप की तरफ से क्यों आयी? जब लड़ाई होती है तो कम या ज्यादा दोनों पक्षों का नुकसान होता है, लेकिन इस पर भी सरकार की तरफ से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया, जबकि भारत के 5-6 विमान गिरने की अटकलों पर बहस होती रही।
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पहलगाम सुरक्षा चूक और कार विस्फोट पर बहस जारी
बहस इस बात पर भी हुई कि पहलगाम में सुरक्षा चूक कैसे हुई और असल हत्यारे कौन थे? सरकार ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जारी है और कोई भी सीमा पार से आतंकी घटना हुई, तो जवाब दिया जायेगा, लेकिन पुरानी दिल्ली में जब 10 नवंबर 2025 की शाम को कार विस्फोट हुआ, जिसमें 13 लोगों की जानें गईं तो सरकार ने पाकिस्तान का नाम तक नहीं लिया, जैसा कि पुलवामा व पहलगाम की घटनाओं के बाद लिया गया था।
बहरहाल, इस साल दो राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए। दिल्ली में 5 फरवरी 2025 को मतदान हुआ, जिसमें आम आदमी पार्टी को पराजित करके बीजेपी ने शानदार जीत दर्ज की और आतिशी मर्लेना की जगह रेखा गुप्ता मुख्यमंत्री बनीं। लेकिन दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या निरंतर बद से बदतर होती जा रही है, जबकि बीजेपी की जीत में यही मुख्य मुद्दा था। वायु प्रदूषण के सवाल पर भी इस साल राजनीतिक घमासान जारी रहा।
बिहार विधानसभा के लिए मतदान 6 व 11 नवंबर 2025 को हुआ, जिसमें नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए ने इंडिया गठबंधन पर प्रभावी जीत दर्ज की और उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में दसवीं बार शपथ ली। लेकिन बिहार का चुनाव चुनाव आयोग द्वारा बहुत कम समय में करायी गई एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के कारण अधिक चर्चा में रहा और यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
छह राज्यों में एसआईआर पर बीएलओ की मौतों का आरोप उठे
बाद में चुनाव आयोग ने छह अन्य राज्यों में भी एसआईआर करायी, जिसमें यह आरोप लगे कि कम समय में अधिक काम के तनाव व दबाव के कारण 40 से अधिक बीएलओ (ब्लॉक लेवल ऑफिसर) की मौत आत्महत्या करने या दिल का दौरा पड़ने से हुई और अन्य सैंकड़ों हृदय रोगी हो गये हैं। अब एसआईआर की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दिया गया है ताकि बीएलओ को अपना काम पूरा करने के लिए अधिक समय मिल जाये।
मतदाता सूची एकदम सही होनी चाहिए, इसलिए एसआईआर स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन विपक्ष ने जो चुनाव आयोग को वोट चोरी का आरोप लगाते हुए कटघरे में खड़ा किया है उसका भी स्पष्ट जवाब सामने आना चाहिए ताकि अवाम का विश्वास लोकतंत्र व चुनावी प्रक्रिया में बना रहे। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस साल वोट चोरी पर दो महत्वपूर्ण प्रेस कांफ्रेंस कीं, जिनमें उन्होंने डाटा के ज़रिये बताया कि एक ही व्यक्ति अनेक जगहों पर मतदाता है, एक कमरे के घर में दर्जनों मतदाता पंजीकृत हैं, शून्य नंबर के घर पर भी सैकड़ों मतदाताओं के नाम हैं, आदि।
इस विषय पर संसद के शीतकालीन सत्र में भी चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस बात निकलकर सामने नहीं आयी। इस साल शासन व नियुक्तियों (जैसे सूचना आयुक्तों) पर भी बहस जारी रही, युवा फोकस (विकसित भारत डायलॉग) पर फोकस रहा और नीति आयोग ने शहरी विकास व जल प्रबंधन पर नीतिगत चर्चाएं कीं। राजनीतिक लैंडस्कैप में जॉब्स, अर्थव्यवस्था व इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दे भी छाये रहे।
जॉब सृजन, जीएसटी और विदेश नीति पर विपक्ष ने की चर्चा
परम्परागत यूथ फेस्टिवल्स को एक किनारे करते हुए जनवरी 2025 में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग का आयोजन किया गया, जिसमें राष्ट्रीय विकास के लिए विचारों को प्रस्तुत किया गया। विपक्ष ने सरकार की सूचना आयुक्तों जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति को लेकर कड़ी आलोचना की, जिसका सरकार ने खंडन किया। नीति आयोग ने जल बजट पर अपनी रिपोर्ट जारी की, इस्तेमाल किये जा चुके पानी को फिर से प्रयोग करने के संदर्भ में वर्कशॉप्स का आयोजन किया और शहरी डाटा इकोसिस्टम्स पर फोरम आयोजित किये, जिनमें स्थानीय विकास पर बल दिया गया।
जॉब सृजन, आर्थिक योजनाओं (जीएसटी आदि) और विदेश नीति जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चाएं हुईं, जिसमें विपक्ष ने आर्थिक चुनौतियों पर बल दिया। दरअसल, साल 2025 के शुरू होते ही देश की राजनीति में काफी हंगामे के संकेत मिलने लगे थे। एक तरफ प्रियंका गांधी ने वायनाड से जीत दर्ज करके सियासत में सीधे प्रवेश किया, वहीं आरएसएस व बीजेपी के संबंधों में उथल-पुथल देखने को मिलने लगी, जिसकी वजह से अभी तक जेपी नड्डा की जगह बीजेपी का नया अध्यक्ष नियुक्त नहीं किया गया है और बीजेपी के संसदीय दल की भी बैठक नहीं हुई है, हां, एनडीए के संसदीय दल की बैठकें अवश्य हुईं।

लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी व जसवंत सिंह को 75 वर्ष का होने पर मार्गदर्शक मंडल में डाल दिया गया था, जिसकी आज तक कोई बैठक नहीं हुई, लेकिन 75-वर्ष का नियम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लागू नहीं किया गया। मुरली मनोहर जोशी ने देश की आर्थिक स्थिति पर अपनी रिपोर्ट आरएसएस थिंकटैंक के समक्ष पेश की। बहरहाल, आशानुरूप चुनावों में महिला मतदाताओं पर अधिक फोकस रहा, लेकिन यह किसी को उम्मीद नहीं थी कि जगदीप धनखड़ अपना कार्यकाल पूरा किये बिना इस्त़ीफा दे देंगे।
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