प्यार में शादी की कसम तोड़ना अपराध नहीं : हाईकोर्ट
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि कोई प्यार के नाम पर शादी की कसम तोड़ता है, तो इसे धोखा कहकर अपराध नहीं माना जा सकता। यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रेम की शुरुआत से ही छल करने का इरादा साबित नहीं किया जा सकता, तो इसे अपराध नहीं माना जाना चाहिए। अदालत ने फैसला सुनाया कि विवाह के दौरान प्रेम के नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रेमी अथवा प्रेमिका के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करना वैध नहीं है।
अदालत ने कहा कि आपराधिक मामला तभी दर्ज किया जा सकता है, जब यह साबित हो जाए कि प्रेम की शुरुआत से ही दोनों में से किसी एक का विवाह न करने का इरादा था। उच्च न्यायलाय के न्यायाधीश जस्टिस एन. तुकारामजी ने हाल ही में इस मामले के संबंध में अपना फैसला सुनाया। उन्होंने यह आदेश रामागुंडम ज़िले के अंतारगाँव मंडल के पोट्याला ग्राम निवासी कल्लेडा संतोष के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई के बाद जारी किया।
न्यायाधीश ने गोदावरीखनी स्थित प्रधान कनिष्ठ सिविल न्यायाधीश की अदालत में लम्बित आपराधिक मामले (आईपीसी की धारा 417 व 420) की जाँच की और निष्कर्ष निकाला कि छल के आरोपों का समर्थन करने वाला कोई सबूत नहीं है। हृदयरंजन प्रसाद वर्मा बनाम बिहार और सूर्यभान पंवार बनाम महाराष्ट्र मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले में यह स्पष्ट किया गया कि जब प्रेम विवाह हो जाता है और विवाह संपन्न नहीं होता, तो यह धोखाधड़ी की श्रेणी में नहीं आता है।
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प्रेम संबंध 5 वर्ष तक चला, बाद में शादी के लिए दबाव आया
याचिकाकर्ता ने वर्ष 2018 में इंटर की पढ़ाई के दौरान प्रेम का झाँसा देकर युवती से शादी का प्रस्ताव रखा और उसे शादी के लिए राजी कर लिया। दोनों का प्रेम संबंध लगभग 5 वर्ष तक चला। इसके बाद युवती ने याचिकाकर्ता पर शादी के लिए दबाव डाला, लेकिन निचली अदालत में आरोपी याचिकाकर्ता द्वारा विवाह से इनकार करने का युवती ने आरोप लगाया। युवती ने यह भी आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता ने गाँव के बुजुर्गों की चर्चा के दौरान शादी के लिए सहमति दी थी, लेकिन बाद में वह अपने वादे से मुकर गया।
पुलिस में शिकायत करने पर पुलिस को दिए गए बयान में याचिकाकर्ता ने इसे स्वीकार लिया। इस पर न्यायाधीश ने कहा कि युवती ने यह नहीं कहा कि याचिकाकर्ता क्या प्रारंभ से ही उसे धोखा देने का इरादा रखता था। उन्होंने कहा कि शादी का वादा न निभाना धोखाधड़ी नहीं है और अगर कोई दीर्घकालिक आपसी सहमति से बना रिश्ता टूटता है, तो वह भी धोखाधड़ी नहीं है। न्यायाधीश ने अपना फैसला सुनाया कि इस मामले में आपराधिक मामला तभी दर्ज किया जा सकता है, जब याचिकाकर्ता प्रेम संबंध की शुरुआत से ही धोखा देने का इरादा रखता हो।
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