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2 दिन पहले संवाद ही सच्चा समाधान
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3 दिन पहले तुबे का बहना
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3 दिन पहले पाप कर्म को समझें
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5 दिन पहले भीतर के बदलाव से आता है परिर्वतन
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5 दिन पहले बच्चों को दीजिए संस्कार : ललितप्रभजी म.सा.
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6 दिन पहले घर की ताकत प्रेम और मोहब्बत : ललितप्रभजी
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1 सप्ताह पहले कर्मयोग का अर्थ है भक्तिभाव से क्रिया करना : रमेशजी
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1 सप्ताह पहले ज्ञान का नेत्र आत्मचेतना का द्वार
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1 सप्ताह पहले नरसी मेहता की मूंछ की बाल
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1 सप्ताह पहले सफलता के लिए भरें उड़ान
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2 सप्ताह पहले फीलखाना महावीर भवन में दिया गया धर्म का संदेश
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2 सप्ताह पहले संकट में सूझबूझ
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2 सप्ताह पहले अच्छा स्वभाव सबसे बड़ी दौलत : ललितप्रभजी
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2 सप्ताह पहले मीठी जुबान से होती है जीवन की शोभा : ललितप्रभजी
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2 सप्ताह पहले आध्यात्मिकता से बदलती है आंतरिक स्थिति : रमेशजी
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2 सप्ताह पहले आप क्या ग्रहण करते हैं
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2 सप्ताह पहले विडंबनाओं से ऊपर उठने का मार्ग है कर्मयोग
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2 सप्ताह पहले मित्र का निर्णय
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2 सप्ताह पहले अपनी शक्ति को पहचाने
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3 सप्ताह पहले बाजी जीतने के लिए जुड़ना और जोड़ना सीखें : चन्द्रप्रभजी
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4 सप्ताह पहले कदम हमेशा संभलकर रखिए और सोच हमेशा ऊँची : ललितप्रभजी
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4 सप्ताह पहले प्रलोभनों से बचें
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4 सप्ताह पहले प्रगति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग ध्यान : चन्द्रप्रभजी
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4 सप्ताह पहले कैसे करें पार अहंकार की दीवार
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4 सप्ताह पहले ज्ञान के दीपक से मिटाएँ भीतर का अंधकार : रमेशजी
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4 सप्ताह पहले सुमंगलप्रभाजी ने बतायी श्रीसंघ की महिमा और गौरव गाथा
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4 सप्ताह पहले शाप बना वरदान
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1 महीना पहले गुरु के उपदेश को लायें आचरण में : कनकप्रभाजी
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1 महीना पहले किसी को न समझे कमजोर
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1 महीना पहले आहार का विवेक रखना आवश्यक : डॉ. सुमंगलप्रभाजी
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1 महीना पहले पश्चाताप से पापों का नाश : सुयशाजी
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1 महीना पहले पूर्णानंद स्वामी पूर्ण व्यक्तित्व में पूर्ण अस्तित्व
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1 महीना पहले धर्म की शरण ही है श्रेष्ठ : भक्तिदर्शनविजयजी
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1 महीना पहले जीवन को सफल बनाता है धर्मका आचरण : जयश्रीजी
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1 महीना पहले सिकंदराबाद में झंकार कंवरजी का स्मृति दिवस मनाया गया
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1 महीना पहले संयम अंगीकार करना कोई खेल नहीं : डॉ. सुमंगलप्रभाजी
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1 महीना पहले जब वरदान बन जाए अभिशाप
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1 महीना पहले संयम पथ का प्रथम सोपान है वैराग्य जीवन : जयश्रीजी
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1 महीना पहले मन के साधे सब सधे
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1 महीना पहले व्यक्ति की जैसी सोच, वैसा आभामंडल : भक्तिदर्शनजी
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1 महीना पहले नाम जाप से संवर जाते हैं बिगड़े काम : सुमंगलप्रभाजी
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1 महीना पहले ईश्वर रूपी कस्तूरी
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1 महीना पहले होनी अटल है
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1 महीना पहले धर्म की प्रथम सीढ़ी है ज्ञान : साध्वी जयश्रीजी म.सा.
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1 महीना पहले मुक्ति की राह में बाधक हैं राग द्वेष : भक्तिदर्शनजी
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1 महीना पहले सामायिक है आत्मा का स्नान : सुमंगलप्रभाजी
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1 महीना पहले धर्म कथा जीवन के अंधकार को दूर करती है : जयश्रीजी
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1 महीना पहले सच्ची जीत के लिए करें क्रोध को पराजित : भक्तिदर्शनजी
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1 महीना पहले विकृतियों का त्याग है विनिवर्तना : डॉ. सुमंगलप्रभाजी
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1 महीना पहले मन के पार है मुक्ति का द्वार
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1 महीना पहले विवेकपूर्ण होनी चाहिए भक्ति : कनकप्रभाजी
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1 महीना पहले साध्वी कनकप्रभाजी म.सा. ने बताया भाई दूज का महत्व
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1 महीना पहले व्यवहार होता है हमारे जीवन की बुनियाद : रमेशजी
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1 महीना पहले व्यर्थ को सार्थक करें
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1 महीना पहले सिकंदराबाद संघ में नववर्ष पर दी गयी महामांगलिक
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1 महीना पहले नूतन वर्ष पर गोशामहल मंदिर का द्वार उद्घाटन संपन्न
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1 महीना पहले कोरा संघ में उत्तराध्ययन सूत्र का वाचन सम्पन्न
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1 महीना पहले सुदर्शना ने किया नंदिवर्धन के शोक का निवारण
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1 महीना पहले परिवर्तन से मत डरिए, उसे अपनाइए
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1 महीना पहले प्रज्ञा और प्रकाश का पर्व है दीपावली : जयश्रीजी
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1 महीना पहले रामकोट में सुयशाजी ने किया समोसरण का वर्णन
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1 महीना पहले समस्याओं का बोझ न ढोए़ँ
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2 महीना पहले कंजूस सेठ की निष्ठा
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2 महीना पहले मन-विजय से मिलेगी मुक्ति
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2 महीना पहले कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है : साध्वी जयश्रीजी
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2 महीना पहले आत्म विजेता का मार्ग है धर्म : साध्वी जयश्रीजी
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2 महीना पहले कौन-से धन का रस हमें देता है शाश्वत प्रकाश
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2 महीना पहले साध्वी विनयश्रीजी ने दिया आत्मनिर्भरता का संदेश
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2 महीना पहले आत्म उत्थान में सहायक हैं शास्त्र वचन : जयश्रीजी
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2 महीना पहले अपने मन को प्रसन्न रखना आवश्यक : सद्गुरु रमेशजी
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2 महीना पहले आत्मा के लिए आसक्ति बंधन : सुयशाजी
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2 महीना पहले मन की सफाई है सच्ची दीपावली
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2 महीना पहले जीवन ओस की बूंद के समान : भाग्यचंद्रजी
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2 महीना पहले दृष्टि परिवर्तन है सबसे दुर्लभ : रजतप्रभाजी
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2 महीना पहले सबसे पहले मन की शुद्धि आवश्यक : राजमतीजी म.सा.
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2 महीना पहले मातृदेवो भव : पितृदेवो भव :
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2 महीना पहले दान देने से नष्ट नहीं होता धन : सौभाग्यमतीजी
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2 महीना पहले साधना का मेरूदंड है ब्रह्मचर्य : सुमंगलप्रभाजी
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2 महीना पहले पहनावे से नहीं जुबान से होती है पहचान : ललितप्रभजी
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2 महीना पहले अपने नाम से पहचाने जाना सर्वश्रेष्ठ : विनयश्रीजी
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2 महीना पहले स्व परिवर्तन : समाज सुधार की नींव
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2 महीना पहले अपनेपन के एहसास का नाम परिवार : चन्द्रप्रभजी म.सा.
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2 महीना पहले सदाचरण ही उन्नति का मार्ग : सौभाग्यमती माताजी
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2 महीना पहले भेदभाव के खिलाफ खड़े हुए वर्धमान : सुयशाजी
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2 महीना पहले महावीर की वाणी जैन धर्म का आधार : भाग्यचंद्र विजयजी
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2 महीना पहले चरित्र ही ज्ञान और हीरा है : डॉ. सुमंगलप्रभाजी
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2 महीना पहले जीवित रहते जीवन-मुक्ति की युक्ति
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2 महीना पहले सबको पसंद आता है मुस्कुराता चेहरा : ललितप्रभजी
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2 महीना पहले जीवन का लक्ष्य हो आत्मकल्याण : रमेशजी
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2 महीना पहले दुर्गति से बचाता है धर्म : जयश्रीजी
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2 महीना पहले टीपीएफ हैदराबाद ने किया फ्यूजन एडिशन-10 का आयोजन
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2 महीना पहले श्रमणोपासक संघ में महावीर साधना यात्रा जारी
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2 महीना पहले मानवता के कल्याण के लिए है नवकार मंत्र : ललितप्रभजी
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2 महीना पहले मन, वचन, काया का योग मोक्ष में सहायक : सुमंगलप्रभाजी
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2 महीना पहले कोरा संघ में नवपद ओली कार्यक्रम भव्यता से संपन्न
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2 महीना पहले संतति को वसीयत में धन-संपदा नहीं संस्कार दें
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2 महीना पहले जीवन की वास्तविकता को समझें : जयश्रीजी म.सा
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2 महीना पहले सर्व धर्म सम्मेलन का किया गया आयोजन
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2 महीना पहले जीवन को स्वर्ग बनाएगी सकारात्मक सोच : ललितप्रभजी
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2 महीना पहले 1008 शालीभद्र लक्ष्मी सहजोड़े जाप सम्पन्न
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2 महीना पहले सत्य ज्ञान के बिना सफल नहीं होता जीवन : भक्तिदर्शनजी
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2 महीना पहले कॉन्शस लिविंगपर दाजी ने ली मास्टर क्लास
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2 महीना पहले कर्म का साबुन है जिनवाणी : राजमतीजी
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2 महीना पहले धर्म ही जीवात्मा की रक्षा करता है : जयश्रीजी
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2 महीना पहले अनित्य एवं क्षणिक है जीवन : जयश्रीजी म.सा
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2 महीना पहले श्रद्धा पूर्वक करें नवपद ओली की आराधना : कनकप्रभाजी
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2 महीना पहले जैन साधु जीते हैं पवित्र जीवन : भक्तिदर्शनजी
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2 महीना पहले गुणग्राही बनना हो जीवन का लक्ष्य : रमेशजी
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2 महीना पहले अशुभ को छोड़ना है विवेक : डॉ. सुमंगलप्रभाजी म.सा.
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2 महीना पहले मनुष्य का शरीर पिंजरे के समान : जयश्रीजी
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2 महीना पहले हर परिस्थिति को प्रभु का प्रसाद मानें : ललितप्रभजी
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2 महीना पहले समाज में राम राज्य की आवश्यकता : कमलेशजी
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2 महीना पहले अचल होते हैं सिद्ध परमात्मा : सुमंगलप्रभाजी
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2 महीना पहले निर्वाण की अवस्था है सिद्ध पद : भाग्यचंद्र विजयजी
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2 महीना पहले माता पार्वती के प्रश्न से शिव जी सोच में पड़ गए
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2 महीना पहले जो पाप से बच गया, वही संसार से तिर गया : जयश्रीजी
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2 महीना पहले किसी न किसी की रोज करें मदद : कमलेशजी
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2 महीना पहले महापुरुषों की वाणी जीवन कल्याणी : जयश्रीजी म.सा.
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2 महीना पहले आयंबिल से कष्ट निवारण : कनकप्रभाजी
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2 महीना पहले कथा सुनने वालों के पास रहते हैं प्रभु : ललितजी
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2 महीना पहले जैन धार्मिक शिक्षण शिविर एवं पुरस्कार वितरण सम्पन्न
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2 महीना पहले कथा श्रवण से जीव का कल्याण : ललितजी
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2 महीना पहले तप करते समय मन में रखें क्षमा का भाव : सुमंगलप्रभाजी
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2 महीना पहले जैन भवन में शासन स्पर्श शिविर संपन्न
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2 महीना पहले विवेक पूर्ण होना चाहिए हमारा जीवन : कमलेशजी
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2 महीना पहले जीवन में फूल खिलाती है धर्म कथा : जयश्रीजी
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2 महीना पहले शरण में जाना है सबसे बड़ी उपासना : रमेशजी
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2 महीना पहले व्यवधान से विशुद्ध होती है आत्मा : डॉ. सुमंगलप्रभाजी
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2 महीना पहले सुपात्र दान से तीर्थंकर गोत्र का बंध : सुयशाजी
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2 महीना पहले कोरा संघ में हुई मंगल ग्रह जाप की आराधना
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2 महीना पहले जीव को होना चाहिए अहंकार शून्य : कमलेशजी महाराज
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2 महीना पहले गुरु वाणी में भरा होता है अमृत : राजश्रीजी
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2 महीना पहले वासना पर साधना की विजय ही तप : सुमंगलप्रभाजी
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2 महीना पहले नवरात्रि हैं आत्म-परिवर्तन के नौ सोपान
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2 महीना पहले भव्य कलश यात्रा से संगीतमय नवाह्न पारायण का शुभारंभ
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2 महीना पहले सदा खुश रहता है सकारात्मक विचारों वाला : ललितप्रभजी
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2 महीना पहले लक्ष्य को पाने की पगडंडी है आत्मविश्वास
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2 महीना पहले कोरा संघ में नवग्रह जाप आरंभ
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2 महीना पहले जीवन की सरलता में ही ठहरता है धर्म : साध्वी जयश्रीजी
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2 महीना पहले चाणक्य का सुझाव करें गधे के गुणों को आत्मसात
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2 महीना पहले गुरु का अनुशासन सफलता की सीढ़ी : जयश्रीजी म.सा.
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2 महीना पहले शुद्ध भाव से ही होते हैं भव कम : राजमतीजी म.सा.
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3 महीना पहले करनी का फल है स्वर्ग और नरक : भक्तिदर्शनजी
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3 महीना पहले द्वेष से दूषित होता है माहौल : सुयशाजी
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3 महीना पहले उत्तिष्ठ भाव से दिया दान होता है फलित : विनयश्रीजी
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3 महीना पहले गुरु और भगवान के प्रति हो सच्ची श्रद्धा : राजमतीजी
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3 महीना पहले दास भाव से भक्ति करने पर मिलती है कृपा : स्वीकृतिजी
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3 महीना पहले निष्काम भाव से करें सेवा : साध्वी सुयशाजी
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3 महीना पहले सृजन और विसर्जन
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3 महीना पहले परिवर्तनशील है संसार : राजश्री म.सा.
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3 महीना पहले भगवान के प्रति रहें समर्पित : स्वीकृतिजी
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3 महीना पहले शिवमुनिजी म.सा. की मनाई गई जन्म जयंती
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3 महीना पहले जीवन की हर स्थिति में रखें धैर्य : रमेशजी
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3 महीना पहले मृत्यु को बनाएँ महोत्सव : आस्था भारतीजी
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3 महीना पहले रिश्तों में रखें सत्यपरायणता
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3 महीना पहले भक्त के बस में हैं भगवान : आचार्य सत्यप्रकाशजी
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3 महीना पहले कनकप्रभाजी म.सा. ने बतायाअष्ट प्रकारी पूजा का रहस्य
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3 महीना पहले प्रत्यक्ष अनुभव ही है धर्म : आस्था भारतीजी
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3 महीना पहले साधना के पथ में धैर्य जरूरी : भाग्यचंद्र विजयजी
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3 महीना पहले जहाँ चाह, वहाँ राह
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3 महीना पहले पारिवारिक सामंजस्य पर कार्यशाला आयोजित
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3 महीना पहले अनंत पुण्य वाणी से मिलता है सच्चा मित्र : विनयश्रीजी
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3 महीना पहले भगवन नाम स्मरण मन की शुद्धि का साधन है
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3 महीना पहले अति का जरूर होता है अंत : सत्यप्रकाशजी
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3 महीना पहले विजय शांतिसूरीश्वरजी ने दिखाई समाज को नई राह
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3 महीना पहले प्रेम के अभाव में बढ़ता है भय : रमेशजी
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3 महीना पहले जिज्ञासा ज्ञान का मूल बीज : सुमंगलप्रभाजी
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3 महीना पहले आत्मा और परमात्मा में कर्म का है भेद : जयश्री म.सा.
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3 महीना पहले हर परिस्थिति का आनंद लेने की सीखें कला : ललितप्रभजी
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3 महीना पहले जैसा करेंगे कर्म, वैसा मिलेगा फल : सुधाकंवरजी
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3 महीना पहले अच्छे विचार ही बदलते हैं स्थिति : विनयश्रीजी
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3 महीना पहले नास्तिक की आस्तिकता
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3 महीना पहले आराधक बनकर संसार सागर से तिरें : जयश्रीजी म.सा.
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3 महीना पहले सुखी रहने के लिए करनी और आचरण को देखें : राजमतीजी
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3 महीना पहले स्वयं भोगना पड़ता है कर्मों का फल : सुधाकंवरजी
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3 महीना पहले श्रद्धा से श्राद्ध और समर्पण से तर्पण होता है सिद्ध
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3 महीना पहले निष्काम दान
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3 महीना पहले केवल श्रद्धा के माध्यम से ही कल्याण संभव : रमेशजी
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3 महीना पहले सहनशीलता में है बड़ी ताकत : जयश्री म.सा.
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3 महीना पहले पात्र और सुपात्र की करें परख : डॉ. सुमंगलप्रभाजी
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3 महीना पहले सुधाकंवरजी ने रिश्तों में स्वार्थ पर जताई चिंता
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3 महीना पहले बचपन से पारदर्शिता
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3 महीना पहले सेवा करने वाले का सफल होता है जीवन : राजमतीजी
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3 महीना पहले आह नहीं, वाह कहकर जीवन में बढ़ाएँ आनंद : ललितप्रभजी
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3 महीना पहले माया-कपट, छल-लालच का अंत बुरा : भक्तिदर्शनजी
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3 महीना पहले श्राद्ध परंपरा धार्मिक और विज्ञान सम्मत है
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3 महीना पहले स्वाध्याय से होता है कर्मों का क्षय : सुमंगलप्रभाजी
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3 महीना पहले क्षमावाणी के साथ दिगंबर समाज का पर्युषण पर्व संपन्न
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3 महीना पहले अच्छी सेहत के लिए सुधारें जीवनशैली : चंद्रप्रभजी
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3 महीना पहले मान कषाय खतरनाक : जयश्री म.सा.
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3 महीना पहले परमात्मा के स्मरण में निहित है सफलता : कनकप्रभाजी
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3 महीना पहले ऐसे थे सत्यदृष्टा आचार्य भिक्षु
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3 महीना पहले प्रेम और रिश्तों में रखें मिठास : चंद्रप्रभजी म.सा.
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3 महीना पहले तप-त्याग के साथ मनायी गयी जयमलजी की जयंती
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3 महीना पहले जैनाचार्य धर्मसूरीश्वरजी की मनायी गयी पुण्यतिथि
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3 महीना पहले जीवन अनित्य व क्षणिक : जयश्री म.सा
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3 महीना पहले कषाय का भी करें सदुपयोग
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3 महीना पहले माँ की सीख
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3 महीना पहले तप त्याग के साथ मनायी गयी आचार्य जयमलजी की जयंती
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3 महीना पहले लेने से नहीं, देने से मिलती है संतुष्टि
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3 महीना पहले धर्म की रक्षा करना सभी का कर्तव्य : राजेशमुनिजी
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3 महीना पहले भगवान महावीर की वाणी अमृतबूंद के समान : राजमतीश्रीजी
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3 महीना पहले संस्कार ही सबसे अधिक महत्वपूर्ण : विनयश्रीजी
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3 महीना पहले मानवता का सुंदर गहना है मर्यादा
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3 महीना पहले सज़ा की तार्किकता
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3 महीना पहले सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं : सौभाग्यमतीजी
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3 महीना पहले सिकंदराबाद स्थानक में पैंसठिया छंद जाप जारी
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3 महीना पहले सत्संग से जीवन में आती हैं खुशियाँ : भक्तिदर्शनजी
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3 महीना पहले मिट्टी की खुशबू
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3 महीना पहले मन के गुलाम न बनें
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3 महीना पहले श्री जैन सेवा संघ का सामूहिक क्षमापना सम्मेलन संपन्न
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3 महीना पहले मन को शांत बनाता है संबोधि ध्यान : चन्द्रप्रभजी
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3 महीना पहले विनयवान ही होता है सभी को प्रिय : राजमतीश्रीजी
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3 महीना पहले कर्म क्षय के लिए तपस्या का होना आवश्यक : जयश्रीजी
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3 महीना पहले भगवान से करें स्वभाविक प्रीति : श्याम सुंदरजी
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3 महीना पहले सच्चा सुख पाने के लिए स्वयं की खोज करें : जयश्रीजी
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3 महीना पहले निर्धनता का नाश करता है दान : सौभाग्यमती माताजी
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3 महीना पहले गजानन रूपी भगवान का विधान
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3 महीना पहले श्रीगणेश का आकार अपने आपमें संदेश : रमेशजी
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3 महीना पहले क्षमा देना-लेना श्रावक का कर्तव्य : भक्तिदर्शनविजयजी
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3 महीना पहले विशालता का प्रतीक क्षमा : जयश्री म.सा.
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3 महीना पहले अमीरपेट संघ में मनाया गया क्षमापना दिवस
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3 महीना पहले फीलखाना महावीर भवन में मनाया गया संवत्सरी पर्व
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3 महीना पहले सफलता का द्वार है इच्छा शक्ति
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3 महीना पहले नारी का जीवन गंगा की धारा : साध्वी सुमंगलप्रभाजी
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3 महीना पहले घर और मन को बनाएं मंदिर
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3 महीना पहले सभी के साथ रहो शुभ भाव से : कनकप्रभाजी
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3 महीना पहले ध्यान दिवस के रूप में मनाया गया पर्यूषण का छठा दिवस
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3 महीना पहले अनंत पुण्य के संचय से मिलता है धर्म : राजमतीश्रीजी
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3 महीना पहले मनुष्य में देवत्व की प्रतिष्ठा करती है क्षमा भावना
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3 महीना पहले नासमझी से नहीं, गलतफहमी से टूटते हैं रिश्ते
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3 महीना पहले गोशामहल संघ में किया गया महावीर जन्म वाचन
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3 महीना पहले पापी से नहीं, पाप से करो घृणा : राजमतीश्रीजी
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3 महीना पहले परमात्मा पर आस्था और श्रद्धा आवश्यक : साध्वी सुयशाजी
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3 महीना पहले चारकमान संघ में भगवान महावीर जन्म वाचन आज
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3 महीना पहले अहंकार से गिरता है हमारा स्तर : कनकप्रभाजी
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3 महीना पहले धर्म में रत जीव का ही होता है उद्धार : राजमतीश्रीजी
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3 महीना पहले कल्पसूत्र का श्रवण है महामंगलकारी : चन्द्रप्रभजी
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3 महीना पहले निर्मल मन से सुनें कल्प सूत्र : कनकप्रभाजी
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3 महीना पहले साधु बनने का विशेष व्रत है पौषध : भक्तिदर्शनजी
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3 महीना पहले सावधान ! परिस्थितियाँ प्रभावित करती हैं
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4 महीना पहले साध्वी सौम्याश्रीजी म.सा. ने बताया सहनशीलता का महत्व
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4 महीना पहले सकारात्मकता बढ़ाएँ, समस्याएँ मिटाएँ : जयश्री म.सा.
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4 महीना पहले पुण्य वाणी से मिलता है यश : राजमतीश्रीजी
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4 महीना पहले दिल की दूरियाँ मिटाता है पर्युषण पर्व : ललितप्रभजी
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4 महीना पहले श्रावक जीवन के 11 कर्तव्य अनमोल : भक्तिदर्शनजी
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4 महीना पहले संसाधनों को व्यर्थ न करें
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4 महीना पहले सामायिक स्वर्ग का सिंहासन : डॉ. सुमंगलप्रभाजी म.सा
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4 महीना पहले समय का सदुपयोग ही पर्व की आराधना : जयश्री
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4 महीना पहले चरित्र का सर्वाधिक महत्व : सुधाकंवरजी
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4 महीना पहले मनुष्य का शरीर पिंजरे के समान : साध्वी जयश्रीजी
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4 महीना पहले तप त्याग का संदेश लाया है पर्युषण : सुमंगलप्रभाजी
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4 महीना पहले शांत भाव से करें धर्म क्रिया : कनकप्रभाजी
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4 महीना पहले पर्युषण आत्मोन्नति का पर्व : श्री भक्तिदर्शनजी
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4 महीना पहले सुखी रहने का रहस्य
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4 महीना पहले पर्वों की गरिमा बनाए रखें
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4 महीना पहले स्वयं का शांतिमय होना सबसे बड़ी सेवा : चन्द्रप्रभजी
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4 महीना पहले अप्रमादी जीव का होता है कल्याण : सुमंगलप्रभाजी
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4 महीना पहले उठाने वाला महान
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4 महीना पहले पाप-पुण्य समझाते हैं साधु-संत : जयश्रीजी
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4 महीना पहले प्रतिक्रमण है निरोगी होने की औषधि : सुमंगलप्रभाजी
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4 महीना पहले बच्चों को बाद में दें कार, पहले संस्कार : ललितप्रभजी
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4 महीना पहले श्रीकृष्ण से सीखें व्यवहार कुशलताल
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4 महीना पहले संगति का असर
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4 महीना पहले मनुष्य जन्म सत्कर्म करने के लिए मिला : राघवाचार्यजी
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4 महीना पहले मानव जीवन में संस्कार की है महत्ता : भक्तिदर्शनजी
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4 महीना पहले मनोबल को मजबूत करते हैं गीता के संदेश : चन्द्रप्रभजी
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4 महीना पहले मन की आजादी भी आवश्यक : रमेशजी
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4 महीना पहले प्रखर विचारक आचार्य आनंद ऋषि म. सा.
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4 महीना पहले आत्मा जागृत तो मिलेगी मोक्ष की मंजिल : राजमतीश्रीजी
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4 महीना पहले विराग बिना मोक्ष संभव नहीं : राजमतीजी
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4 महीना पहले विकारों को दूर कर जीवन को तराशें : कनकप्रभाजी
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4 महीना पहले दिलों को जोड़ना है धर्म की नींव : ललितप्रभजी
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4 महीना पहले अपार है भक्ति की शक्ति : भक्तिदर्शनजी
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4 महीना पहले कषायों को छोड़ प्रभु की शरण लो : कनकप्रभाजी
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4 महीना पहले ज्ञान-ध्यान में समय बिताते हैं बुद्धिमान : जयश्रीजी
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4 महीना पहले पहले स्वयं को बदलो
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4 महीना पहले आदतों से आज़ादी
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4 महीना पहले प्रतिक्रमण है आत्मा की दवा : डॉ. सुमंगलप्रभाजी
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4 महीना पहले पुण्य प्रबल होने पर ही साथ देता है वैभव : सुधाकँवरजी
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4 महीना पहले पूरे के लालच में आधा भी न मिला – प्रेरक कथा
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4 महीना पहले शरीर के पंच तत्वों का करें शुद्धिकरण
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4 महीना पहले जिनवाणी सुनने से पवित्र होती है आत्मा : राजमतीजी
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4 महीना पहले आत्म उत्थान के लिए करें पुरुषार्थ : भक्तिदर्शनजी
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4 महीना पहले स्वयं के भीतर है परमानंद का सरोवर
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4 महीना पहले मौन में मुखर भक्ति – प्रेरक प्रसंग
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4 महीना पहले अहंकार के साथ प्राप्त नहीं हो सकता ज्ञान : सुयशाजी
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4 महीना पहले नमन से भस्म होती है निराशा : सुमंगलप्रभाजी म.सा.
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4 महीना पहले राखी संकल्प है
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4 महीना पहले ‘मैं बेजुबान हूँ, बेजान नहीं’ नाटिका मंचित
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4 महीना पहले गौसेवा से प्रसन्न होती हैं करणी माता : करणी प्रतापजी
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4 महीना पहले मंद बुद्धि वालों का रखें विशेष ध्यान : कनकप्रभाजी
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4 महीना पहले शुद्ध विचारों में होती है सुंदरता : सुधाकँवरजी म.सा.
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4 महीना पहले विरक्ति का बाधक तत्व है आसक्ति : जयश्री म.सा.
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4 महीना पहले सरल हृदय में होता है धर्म का निवास : भक्तिरत्नसूरीजी
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4 महीना पहले परमात्मा के साथ जोड़ें श्वास का तालमेल : कनकप्रभाजी
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4 महीना पहले पुण्यवान नहीं, विनयवान बनो : स्नेहांजनाश्रीजी
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4 महीना पहले कामारेड्डी में मासक्षमण तपस्वियों का अभिनंदन
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4 महीना पहले शाश्वत है रक्षा बंधन का पर्व (प्रवचन)
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4 महीना पहले नरक की ओर ले जाती है बाह्य दृष्टि : सुधाकँवरजी
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4 महीना पहले माँ को पुकारने का करें सतत अभ्यास : करणी प्रतापजी
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4 महीना पहले प्रभु का वास भीतर है, उसे पहचानें : कनकप्रभाजी
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4 महीना पहले सोच का फर्क – प्रेरक प्रसंग
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4 महीना पहले जिन शासन की सेवा में रत हैं साध्वी सुलोचना म.सा
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4 महीना पहले नींद को आध्यात्मिक यात्रा में परिवर्तित करें
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4 महीना पहले साध्वी सुधाकंवरजी ने बताए अनुकंपा के प्रकार
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4 महीना पहले कर्म करने से पहले परिणाम की सोचें : जयश्रीजी
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4 महीना पहले प्रारब्ध को बदलता है कर्म
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4 महीना पहले अर्जन के साथ विसर्जन जरूरी : सौभाग्यमतीजी
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4 महीना पहले धर्म के नाम पर मानव जाति को तोड़ना पाप : ललितप्रभजी
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4 महीना पहले धर्म दलाली से होता है कर्मों का क्षय : राजमतीश्रीजी
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4 महीना पहले शब्दों का चरित्र – प्रेरक प्रसंग
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4 महीना पहले सच्चा और शाश्वत मित्र है गुरु : रमेशजी
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4 महीना पहले ‘थोड़ी सी जमीन थोड़ा सा आसमान’ शिविर आयोजित
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4 महीना पहले सफलता हेतु सच्चे भाव से करें कार्य : कनकप्रभाजी
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4 महीना पहले पहनावे में झलकनी चाहिए शालीनता : ललितप्रभजी
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4 महीना पहले बुढ़ापे को आह भरा नहीं, वाह भरा बनाएँ : चन्द्रप्रभजी
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4 महीना पहले भय और मोह का लाभ कैसे लें
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4 महीना पहले मानवता की पर्याय प.पू.श्री सुधाकंवर म.सा.
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4 महीना पहले जो भाव से आए उसे प्रेम दें : जयश्रीजी म.सा.
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4 महीना पहले हर दिन का अंत संत की स्थिति में होना चाहिए : रमेशजी
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4 महीना पहले बच्चों को दीजिए संस्कार : चन्द्रप्रभजी म.सा.
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4 महीना पहले भगवान बना देती है भक्ति : जयश्रीजी म.सा.
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4 महीना पहले सुधाकंवरजी ने बताई आर्य की महिमा
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4 महीना पहले उदारता की मिसाल- प्रेरक प्रसंग
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4 महीना पहले सम्यकत्व से होती है पुण्य में वृद्धि : सुधाकँवरजी
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4 महीना पहले दुख में साथ निभाने वाला सच्चा मित्र : ललितप्रभजी
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4 महीना पहले स्वयं से करें प्रेम
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4 महीना पहले प्रेम और समर्पण से बनता है परिवार : चन्द्रप्रभजी
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4 महीना पहले आत्मदर्शी होना ही है जीवन का सार : सुमंगलप्रभाजी
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4 महीना पहले सुधाकंवरजी ने किया आनंदऋषिजी म.सा. का गुणगान
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4 महीना पहले एक बुरी आदत जीवन को कर देती है बर्बाद : ललितप्रभजी
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4 महीना पहले अमीरपेट स्थानक में मातृ पितृ दिवस का आयोजन
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4 महीना पहले झनकार कुंवरजी म.सा. का 116वाँ जन्मोत्सव मनाया गया
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4 महीना पहले वीतराग पथ कार्यशाला आयोजित
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4 महीना पहले मन, वचन, काया में स्थिर होना ही सामायिक : कनकप्रभाजी
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4 महीना पहले सुबह जल्दी उठने से जागृत रहेगा भाग्य : चन्द्रप्रभजी
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4 महीना पहले धर्म के आचरण से मन में सरलता : सुधाकँवरजी
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4 महीना पहले पुण्य उदय से सुधरेगा भव : भक्तिदर्शनजी म.सा.
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4 महीना पहले जीवन को बनाएँ सहज और सरल : कनकप्रभाजी
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4 महीना पहले कौन-सा रिश्ता है सर्वश्रेष्ठ
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4 महीना पहले जीवन का उद्धार करता है राम नाम : लक्ष्मीजी
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4 महीना पहले धर्म से ही उत्कृष्ट मंगल संभव : जयश्री म.सा.
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4 महीना पहले इंसान का सबसे बड़ा कर्तव्य है अच्छा व्यवहार : रमेशजी
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4 महीना पहले सत्य अपनाने से मिलती है भक्ति : लक्ष्मीजी
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4 महीना पहले जीवन में कभी न करें किसी का बुरा : राजमतीजी म.सा.
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4 महीना पहले विचार होते हैं अज्ञातकृत
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5 महीना पहले व्यक्ति के हाथ में धर्म और कर्म : राजमतीजी म.सा.
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5 महीना पहले मोह के जाले साफ करना आसान नहीं : जयश्री
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5 महीना पहले आहार सुधारिए, स्वास्थ्य स्वयं सुधरेगा : चन्द्रप्रभजी
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5 महीना पहले जिसका मन मस्त, उसके पास समस्त : कनकप्रभाजी
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5 महीना पहले अतीत के नकारात्मक कुहाँसे को मिटाएँ
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5 महीना पहले भटकाता और संभालता है मोहनीय कर्म : जयश्रीजी म.सा.
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5 महीना पहले कटु वचन से न दुखाएँ दिल : सुधाकँवरजी म.सा.
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5 महीना पहले पहले इच्छाओं को करें शांत : जयश्रीजी
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5 महीना पहले बिना दान के मोक्ष नहीं मिलता : राजमतीजी मसा
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5 महीना पहले केवलमुनिजी का जन्मोत्सव तप त्याग के साथ मनाया गया
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5 महीना पहले धर्म और मोक्ष के लिए करें पुरुषार्थ : कनकप्रभाजी
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5 महीना पहले परोपकार बिना जीवन बेकार : चन्द्रप्रभजी
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5 महीना पहले शिव कृपा से मिलता है श्रीराम का प्रेम : लक्ष्मीजी
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5 महीना पहले अमंगल हरने वाले हैं भोलेनाथ : अमरबिहारीजी
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5 महीना पहले भव भ्रमण कराता है मोह : जयश्रीजी
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5 महीना पहले उनका वह प्रसन्नचित्त चेहरा
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5 महीना पहले मन को बनाएँ अपना गुलाम : जयश्रीजी म.सा.
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5 महीना पहले स्व इच्छा से किया गया त्याग सच्चा : सुमंगलप्रभाजी
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5 महीना पहले प्रेरक प्रसंग-नियति का सत्य
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5 महीना पहले जीवन में मन खुश तो सब खुश : सुयशाजी म.सा.
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5 महीना पहले अवधेशानंद गिरिजी ने कराया नश्वरता का बोध
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5 महीना पहले शाश्वत आनंद ही शाश्वत मुक्ति है
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5 महीना पहले बुरे वचनों का फल भी मिलता है बुरा : राजमतीजी
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5 महीना पहले समाज का ऋण भी लौटाएँ (मनन)
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5 महीना पहले अहंकार को तोड़ना आसान नहीं : जयश्रीजी म.सा.
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5 महीना पहले मीठी जुबान से होती है जीवन की शोभा : चन्द्रप्रभजी
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5 महीना पहले प्रभु नाम की महिमा से जीवन धन्य : सुश्री लक्ष्मीजी
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5 महीना पहले आंतरिक भावों के शुद्धिकरण को कहते हैं धर्म : सुयशाजी
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5 महीना पहले जीवन के हर पड़ाव पर है प्रेम (प्रेरक प्रसंग)
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5 महीना पहले समय नहीं रुकता, तो हम क्यों ठहरें?
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5 महीना पहले जीवन में कभी न छोड़ें धर्म : राजमतीजी म.सा.
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5 महीना पहले तप से होती है आत्मा की शुद्धि : श्री भक्तिदर्शनजी
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5 महीना पहले आवश्यक है धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन
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5 महीना पहले मन को साधने का अभ्यास (मनन)
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5 महीना पहले महावीर भवन में हुआ राष्ट्र संतों का आगमन
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5 महीना पहले कर्म निर्जरा के लिए तप जरूरी : सुमंगलप्रभाजी
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5 महीना पहले धर्म में नहीं करनी चाहिए सौदेबाजी : जयश्रीजी म.सा.
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5 महीना पहले पुण्य के उदय से मिलता है जिनशासन : स्नेहांजनाश्रीजी
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5 महीना पहले क्रोध व अहंकार से जीवन नरक : ललितप्रभजी
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5 महीना पहले परमात्मा के पुरुषार्थ को समझें : कनकप्रभाजी
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5 महीना पहले कभी न करें अन्न-जल का अपव्यय : मंगलज्योतिजी
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5 महीना पहले मुक्ति का मार्ग बताते हैं गुरु : मंगलज्योतिजी
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5 महीना पहले गुरु की कृपा से मिलता है मोक्ष : राजमतीजी
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5 महीना पहले सच्चा गुरु होता है आशाओं का सवेरा : सुमंगलप्रभाजी
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5 महीना पहले मूर्ति पूजक संघ ने जैन भवन में मनायी गुरु पूर्णिमा
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5 महीना पहले उनका वह प्रसन्नचित्त चेहरा (प्रवचन)
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5 महीना पहले सहज जीवन का आधार है संतुष्टता
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5 महीना पहले प्रतिदिन कीजिए धर्म आराधना : स्नेहांजनाश्रीजी
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5 महीना पहले आत्म तत्व की पहचान करना ही चातुर्मास : सुमंगलप्रभाजी
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5 महीना पहले धर्म, ध्यान और तपस्या के लिए भाव जरूरी : राजमतीजी
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5 महीना पहले वैभव से हजार गुना महान तप और त्याग : ललितप्रभजी
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5 महीना पहले फीलखाना महावीर भवन में चातुर्मास का शुभारंभ
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5 महीना पहले वेदकालीन नारी: शक्ति, ज्ञान और संस्कार की प्रतीक
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5 महीना पहले रोज करें प्रणाम, प्रार्थना और परोपकार : चन्द्रप्रभजी
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5 महीना पहले पर पीड़ा समझने वाला प्रभु को अतिप्रिय : राधाकृष्णजी
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5 महीना पहले सच्चा भक्त सदैव करेगा गौसेवा : राधाकृष्णजी
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5 महीना पहले शिष्य का कल्याण कैसे करते हैं गुरु ?
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5 महीना पहले गुरु की अपेक्षा शिष्य बनना कठिन : रमेशजी
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5 महीना पहले प्रभु की करुणा से प्रकट होती है कृपा : राधाकृष्णजी
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5 महीना पहले बाहर नहीं, भीतर से अच्छे बनो
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5 महीना पहले सद्गुरु रमेशजी ने समझाए कर्म योग के सिद्धांत
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5 महीना पहले सरल और सफल जीवन के भाव (प्रवचन)
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5 महीना पहले प्रेम तथा मैत्री के द्वार रखें खुले (प्रवचन)
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5 महीना पहले खुश रहना कोई कला नहीं आदत है (प्रवचन)
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5 महीना पहले नारी की रजस्वला स्थिति का करें सम्मान (प्रवचन)
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6 महीना पहले गुरु-शिष्य का योग है मोक्ष
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6 महीना पहले लेश्या से बदलें स्वभाव
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6 महीना पहले करुणा और प्रेम से जीतें जग : सद्गुरु रमेशजी
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6 महीना पहले प्रवचन: कहे नंद सचेत रहो
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6 महीना पहले गुरु माँ अवतरण दिवस पर विशेष सत्संग
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7 महीना पहले करुणा और ज्ञान का समावेश है मुक्ति का संदेश- रमेशजी
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8 महीना पहले सोच को विशाल रखने पर ही उन्नति : सद्गुरु रमेशजी
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8 महीना पहले नकारात्मक विचारों से बढ़ती है निराशा : रमेशजी
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8 महीना पहले गुरु में होता है नौ देवियों का वास
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9 महीना पहले गाय बचेगी तो देश बचेगा : गोपाल सरस्वती दीदीजी
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9 महीना पहले दूसरों की खुशी में ढूँढें अपने लिए खुशी : रमेशजी
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9 महीना पहले महावीर हॉस्पिटल एवं रीसर्च सेंटर की बैठक संपन्न
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9 महीना पहले संसार में सबसे पवित्र हैं गौ माता : सरस्वती दीदीजी
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9 महीना पहले अखंड चेतन की अनुभूति करने का पर्व है होली : रमेशजी
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9 महीना पहले भगवान का मंदिर
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9 महीना पहले मन की बात
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9 महीना पहले मन की निर्बलता
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9 महीना पहले आत्मबोध से खुलता है मुक्ति का मार्ग : रमेशजी
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9 महीना पहले प्रभु और भक्त का अटूट संबंध : श्यामसुन्दरजी
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9 महीना पहले दुनिया के गुलाम नहीं, राजा बनें : डॉ. समकितमुनिजी
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10 महीना पहले संयम के बिना मनुष्य भव शून्य के समान : भावरत्नाश्रीजी
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10 महीना पहले आत्मा से संबंधित पाप से बचें : समकितमुनिजी
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10 महीना पहले जो बदलता है, वह धर्म नहीं : विजयलताजी
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11 महीना पहले प्रमादी नहीं बन सकता धार्मिक : भावरत्नाश्रीजी म.सा.
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1 वर्ष पहले संसार के सभी रिश्ते हैं स्वार्थ : भावरत्नाश्रीजी
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1 वर्ष पहले भावों से बनती है जीव की गति : धर्मज्योतिजी
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1 वर्ष पहले परस्पर सहयोग से चलता है जीवन : डॉ. समकितमुनिजी
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1 वर्ष पहले जैन धर्म में दान का बड़ा महत्व : भावरत्नाश्रीजी
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1 वर्ष पहले अहिंसा व्रत जैन धर्म की पहचान : डॉ. पद्मचंद्रजी
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1 वर्ष पहले संसार के सभी रिश्ते स्वार्थ हैं: भावरत्नाश्रीजी







































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































