अमेरिका में वीजा धोखाधड़ी मामले में 11 भारतीय नागरिकों पर आरोप
नई दिल्ली: अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे 11 भारतीय नागरिकों पर कन्वीनियंस स्टोर में फर्जी डकैती की साजिश रचने के आरोप वीजा धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। अमेरिकी संघीय अभियोजकों के अनुसार, इन लोगों ने कन्वीनियंस स्टोर में फर्जी सशस्त्र लूटपाट की घटनाएं आयोजित कर खुद को अपराध का पीड़ित दिखाने की योजना बनाई, ताकि ग्रीन कार्ड प्राप्त करने के लिए इमिग्रेशन आवेदन में इसका फायदा उठा सके।
शुक्रवार को आरोपित किए गए 11 आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने या तो आयोजक के साथ मिलकर डकैती की योजना बनाई थी, या स्वयं या परिवार के किसी सदस्य को पीड़ित के रूप में शामिल होने के लिए भुगतान किया था।
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, 39 वर्षीय जीतेंद्र कुमार पटेल, 36 वर्षीय महेश कुमार पटेल, 45 वर्षीय संजय कुमार पटेल, 40 वर्षीय दीपिका बेन पटेल, 52 वर्षीय रमेश भाई पटेल, 43 वर्षीय अमिताभ हेन पटेल, 28 वर्षीय रौनक कुमार पटेल, 36 वर्षीय संगीता बेन पटेल, 42 वर्षीय मिंकेश पटेल, 42 वर्षीय सोनल पटेल और 40 वर्षीय मितुल पटेल पर वीजा धोखाधड़ी की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है।
दीपीकाबेन को वापस भेज गया भारत
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ये सभी आरोपी अमेरिका के विभिन्न राज्यों जैसे मैसाचुसेट्स, केंटकी और ओहियो में अवैध रूप से रह रहे थे। जिसमें दीपीकाबेन पटेल को मैसाचुसेट्स के वेमाउथ में अवैध रूप से रहने के कारण भारत वापस भेज दिया गया है।
कई आरोपियों को किया गया गिरफ्तार
जितेंद्रकुमार, महेश कुमार, संजयकुमार, अमिताबाहेन, संगीता बेन और मितुल को मैसाचुसेट्स में गिरफ्तार किया गया और शुक्रवार को बोस्टन की संघीय अदालत में पेशी के बाद रिहा कर दिया गया। वहीं रमेशभाई, रोनककुमार, सोनल और मिंकिश को केंटकी, मिसौरी और ओहायो में गिरफ्तार किया गया है। इन्हें बाद में बोस्टन की संघीय अदालत में पेश किया जाएगा।
क्या है मामला?
- अमेरिकी कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, मार्च 2023 में रामभाई और उसके साथियों ने मैसाचुसेट्स समेत अन्य जगहों पर कम से कम छह कन्वीनियंस स्टोर, शराब की दुकानों और फास्ट फूड रेस्तरां में फर्जी सशस्त्र लूटपाट की घटनाएं आयोजित कीं।
- बाद में पुलिस जांच में सामने आया कि यह डकैती की सभी घटनाएं फर्जी थी, जिसके जरिए यह दिखाने की कोशिश थी कि दुकान में काम करने वाले लोग अपराध के शिकार हुए हैं। ताकि वे यू-वीजा के लिए आवेदन कर सकें। यह वीजा उन लोगों को दिया जाता है, जो अमेरिका में किसी प्रकार के अपराध के शिकार हुए हों और कानूनी एजेंसियों की मदद करते हों। इसके साथ ही उनके लिए जल्द ही ग्रीन कार्ड का रास्ता भी खुल सकता है।
- अधिकारियों के अनुसार इन नकली घटनाओं में एक व्यक्ति बंदूक जैसी दिखने वाली चीज से दुकान के कर्मचारियों को धमकाता, कैश रजिस्टर से पैसे लेकर भाग जाता और यह पूरी घटना दुकान के सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड होती। इसके बाद कर्मचारी या मालिक कुछ मिनट बाद पुलिस को सूचना देते थे।
- जांच में यह भी आरोप है कि कथित पीड़ितों ने इस योजना में शामिल होने के लिए आयोजक रामभाई को पैसे दिए थे, जबकि रामभाई दुकान मालिकों को स्टोर इस्तेमाल करने के लिए भुगतान करता था।
- रामभाई, नकली लुटेरे और फरार होने में मदद करने वाले ड्राइवर पर पहले ही मुकदमा चल चुका है और उन्हें दोषी ठहराया जा चुका है। यदि दोष साबित होता है तो इन आरोपियों को अधिकतम 5 साल की जेल, 3 साल की निगरानी अवधि और 2.5 लाख डॉलर तक का जुर्माना हो सकता है।
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