मूसी को 1,500 और मेट्रो को 1,100 करोड़
हैदराबाद, सरकार ने राजधानी हैदराबाद को बजट की दृष्टि से परंपरागत तरीकों से पूरी तरह से अलग योजनाओं-परियोजनाओं को आवंटन का रास्ता अपनाया है। हैदराबाद को विकास और उद्योग की दृष्टि से अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर बजट आवंटित किया गया। हैदराबाद सहित शहरी विकास के लिए लगभग 18 हज़ार करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं। बजट आवंटन से साफ है कि मूसी विकास परियोजना और मेट्रो के दूसरे चरण में कुछ गति आ सकती है।
वित्त विभाग संभाल रहे उप मुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्का मल्लू ने बजट भाषण में कहा कि हैदराबाद ने पहले ही भारत के सबसे रहने योग्य शहरों में से एक के रूप में पहचान हासिल कर ली है। इसके बावजूद सरकार इसे अंतरराष्ट्रीय शहरों के समकक्ष बनाने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। लोग, संस्थान, एनजीओ, सीएसआर भागीदारों और अन्य के सहयोग से अनेक नई पहल शुरू की जा रही हैं। हैदराबाद सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में से एक है। सरकार तेलंगाना के हर कस्बे और हर शहर को हैदराबाद की तरह विकसित करने का प्रयास कर रही है।
जल बोर्ड द्वारा पेयजल और सीवरेज सेवाओं का विस्तार
वित्त मंत्री ने कहा कि हैदराबाद महानगर जल बोर्ड, हैदराबाद महानगरीय क्षेत्र में आउटर रिंग रोड तक पेयजल और सीवरेज सेवाएँ प्रदान करता है। गोदावरी पेयजल परियोजना, नए जलाशयों और 39 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स को स्वीकृति दी है। उनका निर्माण विभिन्न चरणों में प्रगति पर है। पूर्ववर्ती जीएचएमसी के उच्च ब्याज वाले ऋणों के संबंध में संबंधित बैंकों के साथ चर्चा कर ब्याज दर को 9.15 प्रतिशत से घटाकर 7.95 प्रतिशत किया गया है, जिससे निगम को महत्वपूर्ण राहत मिली है। हैदराबाद में अवसंरचना विकास के लिए एच-सिटी योजना के अंतर्गत 2,654 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
भट्टी ने कहा कि सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए हैद्रा की स्थापना की गई। अब तक इसने 1,045 एकड़ सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 60,000 करोड़ रुपये है। हाल ही में बतुकम्मा कुंटा, नल्ला चेरुवु और बाम-रुकनुद्दौला तालाब को पुनर्स्थापित किया है। यह झीलें भविष्य में विकास की केंद्र बनेंगी और झील अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देंगी। मानसून के दौरान बाढ़ रोकने के लिए नहर और नाला सफाई कार्य किए गए हैं।
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शहर में एलिवेटेड कॉरिडोर और फ्लाईओवर निर्माण जारी
झीलों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी सिस्टम भी लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम्डा शहरी परिवहन अवसंरचना के विकास के लिए कई परियोजनाएँ लागू कर रहा है। इसके तहत पैराडाइज से शामीरपेट, पैराडाइज से डेयरी फार्म रोड और आईसीसीसी से शिल्पा लेआउट फ्लाईओवर तक एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा ईको-टूरिज्म परियोजना, ओआरआर को आरआरआर से जोड़ने वाली रेडियल सड़कों का निर्माण, सड़क विस्तारीकरण और स्काईवॉक जैसे विकास कार्य किए जा रहे हैं। ओआरआर और आरआरआर को जोड़ने वाली रेडियल सड़कें निर्माणाधीन हैं।
उन्होंने कहा कि हैदराबाद के पुराने शहर में विरासत संरचनाओं के संरक्षण, चारमीनार और लाड़ बाजार क्षेत्रों के विकास तथा पदचालन सुविधाओं में सुधार के लिए कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। हैदराबाद मेट्रो रेल वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 5 लाख यात्रियों को सेवा प्रदान कर रही है। सरकार ने इस सुविधा को पुराने शहर तक विस्तारित करने और मेट्रो के दूसरे चरण के तहत नए कॉरिडोर के साथ नेटवर्क विस्तार की योजना बनाई है।
हैदराबाद शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली मेट्रो रेल परियोजना को एल एंड टी से अपने अधीन लेने का तेलंगाना सरकार का निर्णय राज्य के परिवहन इतिहास में साहसिक और जनहितकारी निर्णय है। तेजी से विस्तार कर रहे हैदराबाद शहर में मेट्रो के पुराने शहर, शमशाबाद हवाई अड्डे और हाईटेक सिटी से आगे के क्षेत्रों तक विस्तार के अंतर्गत एक तात्कालिक आवश्यकता बन गया है। सरकार ने मेट्रो के लिए 500 करोड रुपये बजट तथा 600 करोड़ रुपये ऋण का प्रावधान बजट में रखा है।
उस्मान सागर और हिमायत सागर से गांधी सरोवर तक होगा मूसी का विकास
सरकार 55 किमी के विस्तार के साथ मूसी नदी के पुनरुद्धार हेतु प्रमुख विकास योजना लागू कर रही है। प्रथम चरण में यह परियोजना उस्मान सागर और हिमायत सागर से गांधी सरोवर तक विस्तारित होगी। मूसी पुनरुद्धार के तहत गोदावरी परियोजना से 2.5 टीएमसी पानी मूसी में प्रवाहित किया जाएगा।
वर्तमान में 45 एसटीपी कार्यरत हैं, जबकि अतिरिक्त 39 एसटीपी स्वीकृत किए गए हैं, जो विभिन्न चरणों में निर्माणाधीन हैं। ईसा और मूसी नदियों के संगम पर सरकार प्रतिष्ठित गांधी सरोवर परियोजना विकसित कर रही है। इसमें नदी की सफाई, बाढ़ नियंत्रण, नदी तट विकास और आम जनता के लिए मनोरंजन सुविधाओं का सृजन शामिल है।
मूसी नदी के बफर जोन में रहने वाले लोगों को मानवीय दृष्टिकोण से बिना किसी कठिनाई के पुनर्वास प्रदान किया जाएगा। सरकार ने मूसी के विकास के लिए प्राथमिक रूप से बजट में 1500 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने हैदराबाद और आसपास के क्षेत्रों के विकास के लिए विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से लगभग 43,592.88 करोड़ के कार्य किए हैं। इनमें से 24,752 करोड़ के कार्य पहले ही शुरू हो चुके हैं। शेष कार्य शीघ्र प्रारंभ किए जाएँगे।
हैदराबाद को तीन नगर निगमों में विभाजित करने का निर्णय
बजट में नगर प्रशासन और शहरी विकास विभाग के लिए 17,907 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि सरकार हैदराबाद के विकास के लिए कई उपाय कर रही है। आउटर रिंग रोड के भीतर और बाहर स्थित 20 नगरपालिकाओं और 7 निगमों को मिलाकर प्रशासनिक सुविधा के लिए जीएचएमसी क्षेत्र का पुनर्गठन किया गया। शहर में समावेशी और समान विकास सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार ने जीएचएमसी को तीन नगर निगमों ग्रेटर हैदराबाद, साइबराबाद और मल्काजगिरी में नए डिवीजनों और ब्लॉकों के साथ विभाजित किया है।
नियोजित विकास के लिए कई प्रशासनिक सुधारों के साथ कुशल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इस पुनर्गठन के माध्यम से प्रशासन का विकेंद्रीकरण, स्थानीय जवाबदेही में वृद्धि, अवसंरचना विकास और नागरिकों को तेज सेवाएँ प्रदान करना संभव होगा। इन तीन नगर निगमों के साथ एक उपयुक्त कानूनी संशोधन लाने का निर्णय लिया गया है, ताकि हैदराबाद महानगर जल संगठन और हैद्रा जैसी सभी एजेंसियों का समन्वय करने वाली एक संस्था स्थापित की जा सके।
अब तक विश्व के तेजी से विकसित हो रहे वैश्विक शहरों की सूची में देश से केवल दिल्ली और मुंबई जैसे शहर शीर्ष दस में रहे हैं। अब हैदराबाद भी उस सूची में शामिल होने जा रहा है। उन्होंने बताया कि हैदराबाद महानगरीय क्षेत्र में पुलिस प्रणाली की दक्षता को मजबूत करने के लिए पुलिस अधिकार क्षेत्र को चार आयुक्तालयों हैदराबाद, साइबराबाद, मल्काजगिरी और फ्यूचर सिटी में पुनर्गठित किया गया है।
सतत विकास का एक आदर्श होगी भारत फ्यूचर सिटी
उन्होंने कहा कि हैदराबाद एक महान ऐतिहासिक शहर के रूप में विश्वव्यापी पहचान रखता है। कुतुबशाही काल से लेकर निजाम शासकों तक और आधुनिक समय में हाईटेक सिटी, आउटर रिंग रोड और शमशाबाद हवाई अड्डे जैसी उपलब्धियों के साथ यह शहर निरंतर विकसित होता रहा है। तेलंगाना सरकार द्वारा ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 30,000 एकड़ पर भारत फ्यूचर सिटी की स्थापना की जा रही है। रेडियल सड़कों का निर्माण, आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम बंदरगाह से सीधे जुड़ने वाला ग्रीनफील्ड राष्ट्रीय राजमार्ग, भूमिगत विद्युत प्रणाली और पर्यावरण-अनुकूल स्मार्ट ग्रिड के साथ यह नया शहर सतत विकास का एक आदर्श बनेगा।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करने के लिए यहाँ एक स्किल यूनिवर्सिटी स्थापित की गई है। इस फ्यूचर सिटी का निर्माण पूर्ण होने पर यह शहर अंतरराष्ट्रीय शहरों के समकक्ष खड़ा होगा और एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में उभरेगा।
ओआरआर से बाहर होंगे प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग
योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित करने और लोगों को उस विकास का भागीदार बनाने के लिए सरकार ने राज्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभूतपूर्व तरीके से तीन प्रमुख क्षेत्रों क्योर, प्योर और रेर में विभाजित किया है। हैदराबाद आउटर रिंग रोड के भीतर स्थित क्षेत्र में सरकार ने प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, अनुसंधान, विकास स्टार्टअप, वित्तीय सेवा संस्थानों और अन्य सेवा क्षेत्रों को उच्च-मूल्य सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।
तेलंगाना में शहरी जनसंख्या 2031 तक 53.8 प्रतिशत तक पहुँचने की संभावना है। इस संदर्भ में क्योर क्षेत्र को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हिल्ट नीति (हैदराबाद इंडस्ट्रियल लैंड्स ट्रांसफॉर्मेशन पॉलिसी) के तहत प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को ओआरआर के बाहर स्थानांतरित करने और सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
क्योर से प्योर तक औद्योगिक क्षेत्र का विकास : भट्टी
बजट पेश करने के दौरान भट्टी ने कहा कि सरकार ने आउटर रिंग रोड और रीजनल रिंग रोड के बीच के क्षेत्र को एक विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस क्षेत्र में विनिर्माण उद्योग, एमएसएमई क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब और औद्योगिक पार्क स्थापित करने के लिए कदम उठाए जाएँगे। इससे विशेष रूप से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा। यह क्षेत्र तेलंगाना की अर्थव्यवस्था का विनिर्माण इंजन बनने जा रहा है।
सरकार रीजनल रिंग रोड के पार के क्षेत्रों को कृषि मूल्य संवर्धित अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित कर रहे हैं। इसमें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, मूल्य आधारित कृषि और ईको-टूरिज्म पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके माध्यम से ग्रामीण आय में वृद्धि व संतुलित क्षेत्रीय विकास संभव होगा। भट्टी ने कहा कि देश के भविष्य की आर्थिक शक्ति के रूप में तेलंगाना को विकसित करने के उद्देश्य से भारत फ्यूचर सिटी में तेलंगाना राइजिंग ग्लोबल समिट का आयोजन किया गया। यह समिट प्रमुख क्षेत्रों में विश्वस्तरीय निवेश आकर्षित करने में एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा।
समिट में दुनिया भर से लगभग 2,000 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों, निवेशकों, नीति निर्माताओं, अर्थशास्त्रियों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। समिट के दौरान लगभग 5,75,000 करोड़ रुपये के निवेश में रुचि व्यक्त की। दूसरी ओर मुख्यमंत्री रेवंत ने दावोस में नेक्स्ट-जन लाइफ साइंसेज पॉलिसी 2026-2030 का अनावरण किया। इस नीति का उद्देश्य 2030 तक एआई अनुसंधान एवं विकास तथा उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में तेलंगाना को विश्व के शीर्ष पाँच लाइफ साइंसेज क्लस्टरों में स्थान दिलाना है। अब तक इस क्षेत्र में 73,360 करोड़ का निवेश आकर्षित किया गया। इससे एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और दो लाख पचास हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। संभावना है कि सिंगापुर स्थित एजीआईडीसी, वियतनाम स्थित विन ग्रुप और जेसीके इंफ्रा प्रॉजेक्ट्स लिमिटेड से कुल 1,03,500 करोड़ का निवेश आएगा।
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