गुजरात में गत दो साल में 322 शेरों की मौत, इसमें से 64 की अप्राकृतिक मौत : मंत्री
गांधीनगर, गुजरात के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने शुक्रवार को विधानसभा को सूचित किया कि गत दो वर्षों के दौरान राज्य में कुल 322 शेरों की मौत हुई है, जिनमें से 64 की मौत अप्राकृतिक कारणों से हुई है। मोढवाडिया ने प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक शैलेश परमार द्वारा पूछे गए सवाल के उत्तर में यह जानकारी दी।
मोढवाडिया ने कहा, ‘‘ वर्ष 2024 में कुल 165 शेरों की मौत हुई, 2025 में 148 और इस साल जनवरी में नौ शेरों की मौत हुई है। इन 322 शेरों में से 64 की मौत कुओं में गिरने या वाहनों से टकराने जैसे अप्राकृतिक कारणों से हुई।’’ मोढवाडिया ने अपने लिखित उत्तर में कहा कि अप्राकृतिक से मारे गए इन 64 शेरों में से 41 वयस्क शेर और शेरनियां थे और 22 शावक थे जबकि एक के उम्र के बारे में जानकारी नहीं है।
एशियाई शेरों की सुरक्षा के लिए सरकार के सख्त कदम
मोढवाडिया ने कहा कि राज्य सरकार ने शेरों की अप्राकृतिक मौतों को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे कि विभिन्न स्थानों पर जंगली जानवरों के उपचार के लिए केंद्र स्थापित करना, पशु चिकित्सकों की नियुक्ति करना और शेरों के समय पर उपचार के लिए एम्बुलेंस सेवा शुरू करना।
मंत्री ने सदन को बताया कि अन्य उपायों में अभयारण्य क्षेत्रों से गुजरने वाली सड़कों पर ‘स्पीड ब्रेकर’ बनाना और साइनबोर्ड लगाना, जंगलों में नियमित रूप से पैदल गश्त करना, जंगलों के पास खुले कुओं के किनारे सुरक्षा दीवार बनाना और गिर वन्यजीव अभयारण्य के नजदीक से गुजरने वाली रेल पटरियों के दोनों ओर बाड़ लगाना शामिल है।
मोढवाडिया ने कहा कि एशियाई शेरों को रेडियो कॉलर पहनाया जा चुका है, सासन में एक उच्च तकनीक वाली निगरानी इकाई स्थापित की गई है और जूनागढ़ के सक्करबाग चिड़ियाघर और बरदा क्षेत्र के सात विरदा में ‘पृथवास’ क्षेत्र बनाए गए हैं।मोढवाडिया ने बताया कि 2025 की गणना के अनुसार, गुजरात में स्थित गिर वन्यजीव अभ्यारण्य और उसके आसपास के क्षेत्रों में 891 एशियाई शेर रहते हैं, जिनमें 255 नर शेर, 405 शेरनियां और 231 शावक शामिल हैं। (भाषा)
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