सब्जी फसलों पर अखिल भारतीय समन्वय योजना की 44वीं वार्षिक बैठक आरंभ

हैदराबाद, राजेंद्र नगर स्थित श्री कोंडा लक्ष्मण तेलंगाना बागवानी विश्वविद्यालय में आज सब्जी फसलों पर अखिल भारतीय समन्वय योजना की 44वीं वार्षिक बैठक आरंभ हुई। अवसर पर तीन दिवसीय बैठक में भाग लेने वाले विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने कहा कि देश भर में किए जा रहे गहन अनुसंधान और नवाचारों से सब्जी फसलों में उच्च पैदावार संभव है।

जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, तेलंगाना कृषि सचिव के. सुरेंद्र मोहन ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य में सब्जियों की कमी की समस्या को हल करने के लिए 900 से अधिक प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के तत्वावधान में 800 से अधिक किसानों को सर्वश्रेष्ठ सब्जी खेती स्वयंसेवकों के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके पश्चात वह अन्य किसानों को प्रशिक्षित करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य में किसानों की आय दोगुनी करने के लिए तैयार है।

किसानों के लिए विपणन प्रणाली से बढ़ेगी सब्जी उत्पादकता

इसके लिए किसानों को एक विपणन प्रणाली उपलब्ध कराते हुए सब्जी उत्पादकता बढ़ाने के लिए देश भर की सर्वोत्तम पद्धतियों को किसानों से परिचित कराया जाएगा। सुरेंद्र मोहन ने कहा कि 2047 तक विकासशील भारत के उद्देश्य के तहत राज्य में बागवानी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए योजनाएँ लागू की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की जीडीपी को तीन ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचाने में किसानों की भी भूमिका महत्वपूर्ण है।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के सहायक महानिदेशक डॉ. सुधाकर पांडे ने अपने संबोधन में कहा कि देश में बागवानी क्षेत्र का बढ़ता महत्व शुभ संकेत है। बागवानी फसलों का वार्षिक मूल्य 7.6 लाख करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में बागवानी फसलों के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र दोगुना हो गया है। वर्ष 2047 तक इस क्षेत्र का मूल्य लगभग 747 अरब डॉलर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि देश के 13 प्रतिशत कृषि क्षेत्र में 369 करोड़ टन बागवानी उत्पादन संभव है। 2047 तक 599 करोड़ टन उत्पादन की आवश्यकता है।

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अनाज घटा, बागवानी उत्पादों की खपत में तेज बढ़ोतरी

अनाज उत्पादन की खपत 11 किलो से घटकर 9 किलो प्रति माह हो गई है, जबकि बागवानी उत्पादों की खपत 5 किलो से बढ़कर 9.7 किलो हो गई है। उन्होंने कहा कि सब्जियों के विकास के लिए स्पीड ब्रीडिंग, स्पीड जीनोमिक्स और जीनोम एडिटिंग जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के प्रति प्रतिरोधी, निर्यात उन्मुख, कई कीटों और रोगों के प्रति प्रतिरोधी, अच्छी जल उपयोग दक्षता वाली और पोषक तत्वों से भरपूर सब्जियों की किस्मों को विकसित करने के लिए गहन शोध करने का आह्वान किया।

श्री कोंडा लक्ष्मण तेलंगाना बागवानी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी. राजीरेड्डी ने कहा कि सब्जी की खेती के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र जो पहले तीन लाख एकड़ था, अब घटकर एक लाख एकड़ रह गया है। इसे तुरंत दोगुना करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमें देश भर में उपलब्ध सर्वोत्तम तकनीक का उपयोग करना चाहिए। राज्य में लगभग चार सौ किसान उत्पादक कंपनियों के सदस्यों को अगले दो माह में सब्जी उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जाए, तो यह लाभकारी होगा। उन्होंने आईसीएआर से विश्वविद्यालय को मिर्च और औषधीय पौधों के लिए एआईसीआरपी केंद्र स्वीकृत करने का अनुरोध किया।

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि देश के 60 अनुसंधान संस्थान सब्जियों पर गहन शोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले पाँच दशकों में 640 नई सब्जी किस्में विकसित की जा चुकी हैं। साथ ही विषाणु-प्रतिरोधी किस्मों और उच्च उपज वाली संकर किस्मों के शोध पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। अवसर पर लगभग 300 वैज्ञानिकों ने विभिन्न अनुसंधान नवाचारों को साझा किया।

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