एआई समिट घोषणापत्र पर 70 देशों के हस्ताक्षर – वैष्णव
नयी दिल्ली, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सभी प्रमुख देशों ने ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के दिल्ली घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। वैष्णव ने कहा कि 70 से अधिक देशों ने पहले ही घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और शनिवार को यह संख्या 80 के पार हो जाने की संभावना है।
वैष्णव ने कहा, ‘मैं आपके साथ यह भी साझा करना चाहूंगा कि पिछले शिखर सम्मेलन में अंतिम घोषणापत्र पर लगभग 60 देशों ने हस्ताक्षर किए थे। हम पहले ही 70 का आंकड़ा पार कर चुके हैं। हमें विश्वास है कि यह 80 का आंकड़ा पार कर जाएगा। सभी प्रमुख देशों ने पहले ही इस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।’ उन्होंने कहा कि कई देशों के विदेश मंत्री भारत सरकार के साथ इस पर चर्चा कर रहे हैं और अंतिम संख्या शनिवार को साझा की जाएगी।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में 5 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया, वैश्विक विशेषज्ञों से संवाद किया और अत्याधुनिक तकनीकों के बारे में जानकारी हासिल की। समिट में दुनिया भर के प्रमुख एआई खिलाड़ी शामिल हुए और अनेक स्टार्टअप्स को अपने नवाचार प्रदर्शित करने का अवसर मिला।
एआई मिशन के अगले चरण पर फोकस
मंत्री ने कहा कि भारत ने एआई स्टैक की बुनियाद तैयार करने के बाद अब उसके उन्नत मॉडल, कंप्यूट क्षमता और सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने बताया कि समिट ने वैश्विक स्तर पर सहयोग और विचार-विमर्श के लिए प्रभावी मंच प्रदान किया।
मानव-केंद्रित एआई को वैश्विक समर्थन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मानव एआई’ विजन को व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला। जिम्मेदार और नैतिक एआई पर विशेष जोर दिया गया और इस पहल में बड़ी संख्या में छात्रों की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई।
बड़े निवेश वादों से बढ़ा भरोसा
मंत्री के अनुसार एआई क्षेत्र में बड़े निवेश के संकेत मिले हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े निवेश में 250 अरब डॉलर से अधिक और डीप-टेक वेंचर कैपिटल में लगभग 20 अरब डॉलर की प्रतिबद्धताएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि यह भारत की तकनीकी क्षमता पर बढ़ते वैश्विक विश्वास को दर्शाता है।
एआई सुरक्षा और सेमीकंडक्टर पर पहल
भारत ने एआई सुरक्षा के लिए 12 संस्थानों का नेटवर्क तैयार किया है, जो शोध और मानकों के विकास पर कार्य कर रहा है। साथ ही सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करने और चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण समझौते किए गए हैं।
वैश्विक सहयोग में भारत की बढ़ती भूमिका
मंत्री ने कहा कि भारत की प्रतिभा क्षमता और संतुलित विदेश नीति के कारण दुनिया एआई के नए दौर में भारत की भूमिका को गंभीरता से स्वीकार कर रही है। समिट की घोषणा पर 70 से अधिक देशों ने हस्ताक्षर किए हैं और यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। वैष्णव ने ‘इंडिया एआई समिट’ को एक बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि प्रदर्शनी में पांच लाख से अधिक आगंतुकों की उपस्थिति रही और इस आयोजन में बुनियादी ढांचे से संबंधित 250 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता देखी गई।
कांग्रेस के विरोध पर सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि विपक्षी दल द्वारा शिखर सम्मेलन को बाधित करने के लिए किए गए प्रयास को भारत के युवाओं ने पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, ‘घोषणा पर व्यापक सहमति है, हम शिखर सम्मेलन के आकार को देखते हुए, इसमें शामिल होने वालों की संख्या को अधिकतम करना चाहते हैं।’ मंत्री ने कहा कि शिखर सम्मेलन समाप्त होने के बाद दिल्ली घोषणापत्र का पूरा विवरण पारदर्शी तरीके से साझा किया जाएगा।
सम्मेलन में भारत की पांच-स्तरीय एआई नीति और स्वदेशी एआई मॉडल की पहल की वैश्विक प्रौद्योगिकी उद्योग के दिग्गजों ने सराहना की। वैष्णव ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद भारत के इंजीनियरों और शोधकर्ताओं ने उच्च गुणवत्ता वाले मॉडल तैयार किए हैं, जो हमारी मेहनत को वैश्विक मान्यता देते हैं।
वैष्णव ने बताया कि उत्तर प्रदेश में अगले सेमीकंडक्टर संयंत्र की नींव रखी जाएगी और 28 फरवरी से माइक्रॉन फैक्टरी में वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होगा। उन्होंने कहा कि यह देश का एक बड़ा औद्योगिक केंद्र होगा, जिसका आकार लगभग 10 क्रिकेट मैदानों के बराबर है। भारत एआई मिशन 2.0 के तहत लगभग 20 लाख लोगों को एआई में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।
एआई इम्पैक्ट समिट’ घोषणापत्र पर 86 देशों, दो अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने किए हस्ताक्षर
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के घोषणापत्र पर कुल 86 देशों और दो अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने हस्ताक्षर किए हैं। घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, चीन, डेनमार्क और जर्मनी भी शामिल हैं। यह कृत्रिम मेधा (एआई) के प्रभावों पर आयोजित शिखर सम्मेलन को वैश्विक समर्थन को दर्शाता है।
वैष्णव ने कहा कि दुनिया भर के देशों ने ‘सभी के कल्याण और सभी की खुशी’ के सिद्धांतों को मान्यता दी है। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मानव-केंद्रित एआई की दृष्टि को वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया गया है। एआई संसाधनों, सेवाओं और प्रौद्योगिकी को समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाने का लक्ष्य सभी देशों ने स्वीकार किया है। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक वृद्धि के साथ सामाजिक भलाई को संतुलित करने को प्राथमिकता दी जा रही है।

वैष्णव ने कहा, ‘सिर्फ आर्थिक वृद्धि ही नहीं, सामाजिक सामंजस्य पर भी ध्यान देना जरूरी है। सुरक्षा और भरोसा इस योजना के केंद्र में हैं और इन्हें मुख्य बिंदुओं में शामिल किया गया है।’ उन्होंने कहा कि घोषणापत्र के अन्य प्रमुख क्षेत्रों में नवाचार और मानव संसाधन के विकास पर भी जोर दिया गया है।
वैष्णव ने कहा, ‘इन सभी क्षेत्रों में मिलकर काम करने पर सभी देशों ने सहमति जताई है। इस सम्मेलन में भाग लेने वाले अधिकांश देशों ने इसमें सक्रिय रूप से भाग लिया। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, चीन, डेनमार्क, मिस्र, इंडोनेशिया और जर्मनी शामिल हैं।’
एआई इंपैक्ट समिट में केवल एआई से संबंधित बुनियादी ढांचे के लिए 250 अरब डॉलर से अधिक का निवेश सुनिश्चित किया गया। वैष्णव ने शुक्रवार को कहा था कि इस सम्मेलन में पांच लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया, जो भारत की एआई पहल में घरेलू और वैश्विक मजबूत रुचि एवं सहभागिता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, ‘प्रदर्शनी में पांच लाख से अधिक आगंतुकों ने भाग लिया, बहुत कुछ सीखा और दुनिया भर के कई विशेषज्ञों के साथ बातचीत की। कई स्टार्टअप को अपने काम को प्रदर्शित करने का अवसर मिला। कुल मिलाकर, चर्चाओं की गुणवत्ता अद्भुत थी।’
वैष्णव ने यह भी कहा कि मंत्री स्तरीय संवाद, नेताओं की बैठक, मुख्य उद्घाटन समारोह या सम्मेलन की पूरी प्रक्रिया में भागीदारी और संवाद की गुणवत्ता अत्यधिक प्रभावशाली रही। (भाषा)
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