जुबली हिल्स को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के मामले पर हुई सुनवाई

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने टीटीडी और टीवी 5 के चेयरमैन के पुत्र रवींद्रनाथ से सवाल किया है कि क्या जुबली हिल्स को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के चुनावों के सिलसिले में मतदाताओं को गैर-कानूनी तरीके से शामिल किया गया था? अदालत ने उन्हें और सहकारिता विभाग के आयुक्त सुरेंद्र मोहन को इस मामले पर पूर्ण विवरण देने के लिए अति आवश्यक नोटिस जारी किया।

अदालत ने रजिस्ट्री को वर्ष 2024 के दौरान आदेश जारी करते समय रजिस्ट्रार के तौर पर ड्यूटी पर मौजूद अधिकारी को प्रतिवादी के तौर पर शामिल करते हुए नोटिस जारी करने का भी आदेश दिया है। इस आदेश के साथ मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी तक टाल दी। को-ऑपरेटिव एक्ट की धारा 19 के अनुसार, नए सदस्यों को तभी शामिल किया जाना चाहिए, जब जगह खाली हों। जिन सदस्यों को जगह नहीं मिली है, उनकी संख्या किसी भी समय 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। सोसाइटी ने मंचिरेवुला में जुबली हिल्स फेज 4 नाम से एक रियल एस्टेट बिजनेस खोला है।

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नए सदस्य बनने के लिए 5 लाख व प्लॉट बुकिंग की शर्त

अदालत ने शर्त रखी है कि नए सदस्य के तौर पर जुड़ने वालों को 5 लाख रुपये देने होंगे और एक प्लॉट बुक करना होगा। सोसाइटी की बाउंड्री के भीतर जमीन दी जानी चाहिए, लेकिन बाउंड्री के बाहर के इलाकों में निजी लोगों के साथ एग्रीमेंट गैर-कानूनी हैं। वर्ष 2024 में उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि को-ऑपरेटिव सोसाइटीज के रजिस्ट्रार से 24 सितंबर और 9 अक्तूबर को इन गड़बड़ियों के बारे में शिकायत की गयी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गयी।

मामले की सुनवाई करने वाले न्यायाधीश ने आदेश दिया कि अगले आदेश तक नये सदस्य बनाने की प्रक्रिया को आगे न बढ़ाया जाए और इसे तुरंत रोक दिया जाए। साथ ही, मंचिरेवुला में जुबली हिल्स 4 के नाम पर चल रहे रियल एस्टेट बिजनेस एग्रीमेंट को भी रोकने का फैसला सुनाया। सोसाइटी के सदस्य ज्योति प्रसाद ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि इन आदेशों का उल्लंघन कर नए सदस्यों को आने वाले चुनावों में वोट देने का मौका दिया गया।

उच्च न्यायालय की न्यायाधीश जस्टिस टी. माधवी देवी की खंडपीठ ने शुक्रवार को इस याचिका पर सुनवाई की। वरिष्ठ अधिवक्ता डी वी सीताराम मूर्ति और अधिवक्ता वाई. रामाराव ने याचिकाकर्ता की ओर से दलील देते हुए कहा कि प्रतिवादी जानबूझकर अदालत के आदेशों को नजरअंदाज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे सोसाइटी के नियमों के खिलाफ जाकर अपनी मर्जी से काम कर रहे हैं। दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर सुनवाई टाल दी।

एक और याचिका में रवींद्रनाथ को नोटिस

उच्च न्यायालय द्वारा सहकारिता रजिस्ट्रार को सोसाइटी के अध्यक्ष बी. रवींद्रनाथ के खिलाफ 6 सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने के आदेश देने के बावजूद भी किसी प्रकार की कोई कार्रवाई न करने के कारण दायर अवमानना की याचिका पर अदालत ने रवींद्रनाथ को एक और नोटिस जारी किया। अवमानना की याचिका सोसाइटी के सदस्य ज्योति प्रसाद और विजय भास्कर रेड्डी ने दायर की थी। इस याचिका पर भी सुनवाई करने के बाद नोटिस जारी कर मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दी गयी।

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