कांग्रेस ने एआई सम्मेलन में ‘बौद्धिक दिवालियापन’ दिखाया – मोदी

नयी दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘एआई इम्पैक्ट’ शिखर सम्मेलन में कांग्रेस की युवा इकाई के सदस्यों द्वारा ‘कमीज उतारकर किये गए प्रदर्शन’ की शुक्रवार को कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि विपक्षी पार्टी ‘‘चाहे जितने कपड़े फाड़ना चाहती है, फाड़ सकती है’’ लेकिन उनकी सरकार भारत के विकास के लिए काम करना जारी रखेगी।

राइजिंग भारत समिट’ को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस ने न सिर्फ विदेशी मेहमानों के सामने अपने कपड़े उतारे बल्कि अपना बौद्धिक दिवालियापन भी उजागर किया। उन्होंने रेखांकित किया कि ‘मिलेनियल’ पीढ़ी (1981-1996 में जन्मे लोग) ने देश की सबसे पुरानी पार्टी को सबक सिखा दिया है और अब ‘जेन-जेड’ (1997 से 2012 के बीच जन्मे लोग) भी ऐसा ही करने के लिए तैयार है।

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर परोक्ष रूप से कटाक्ष करते हुए कहा कि विपक्ष नए संसद भवन के ऊपर स्थापित ‘बब्बर शेरों’ की प्रतिमा को देखकर नाखुश है, लेकिन उनके अपने ‘बब्बर शेर’ आम जनता के ‘जूतों’ का सामना करने के बाद भाग रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने ‘एआई इम्पैक्ट’ सम्मेलन में विरोध प्रदर्शन

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 24 फरवरी को कहा था कि उन्हें भारतीय युवा कांग्रेस के ‘बब्बर शेरों’ पर गर्व है जिन्होंने एआई शिखर सम्मेलन में ‘‘निडरता से’’ अपनी आवाज उठाई। मोदी ने कहा, ‘‘कांग्रेस के बब्बर शेर लोगों की जूते खाकर भाग गए।’’ प्रधानमंत्री ने ‘एआई इम्पैक्ट’ सम्मेलन में विरोध प्रदर्शन कर रहे युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को कुछ लोगों द्वारा रोके जाने की ओर इशारा करते हुए यह कहा।

भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) के कार्यकर्ताओं के एक समूह ने 20 फरवरी को दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट स्थल के हॉल नंबर पांच के अंदर सरकार विरोधी नारों से छपी टी-शर्ट को प्रदर्शित करते हुए अपनी कमीजें उतारकर एक नाटकीय विरोध प्रदर्शन किया, जिससे भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई।

मोदी ने अपने 45 मिनट के भाषण में कहा, ‘‘कांग्रेस चाहे जितने कपड़े फाड़ ले, लेकिन हम भारत के विकास के लिए काम करते रहेंगे। कांग्रेस ने एआई सम्मेलन में न सिर्फ अपने कपड़े उतारे, बल्कि विदेशी मेहमानों के सामने अपनी अक्षमताएं भी उजागर कर दीं।’’

‘मिलेनियल’ ने कांग्रेस को सबक सिखाया

प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए हमेशा महात्मा गांधी का सहारा लेती है, लेकिन किसी भी अच्छे काम का श्रेय एक ही परिवार को देने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे देश की जनता ने सरकार द्वारा उठाए गए हर अच्छे कदम का स्वागत किया लेकिन कांग्रेस को तो सिर्फ हर चीज का विरोध करना आता है। कांग्रेस के वोट चोरी नहीं होते बल्कि लोग कांग्रेस को अपने वोट के लायक नहीं समझते। सबसे पहले ‘मिलेनियल’ ने कांग्रेस को सबक सिखाया, अब ‘जेन जेड’ भी ऐसा ही करने को तैयार है।’’

मोदी ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सरकार के हर कदम का केवल विरोध करना नहीं है, बल्कि एक वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है और यही कारण है कि देश की ‘‘प्रबुद्ध जनता’’ अब कांग्रेस को ‘‘सबक सिखा रही है।’’ उन्होंने कहा कि 1984 में कांग्रेस को 39 प्रतिशत वोट और 400 से अधिक सीट मिलीं लेकिन बाद के चुनावों में उसके वोट में लगातार गिरावट आई।

मोदी ने कहा,‘‘आज कांग्रेस की हालत ऐसी है कि उसके पास सिर्फ चार राज्यों में 50 से अधिक विधायक हैं। पिछले 40 वर्ष में देश में युवा मतदाताओं की संख्या बढ़ी है, लेकिन कांग्रेस की लोकप्रियता में स्पष्ट रूप से गिरावट आई है।’’ हाल में भारत द्वारा दूसरे देशों के साथ किए गए व्यापार समझौतों पर मोदी ने कहा कि देश ने अपनी अंतर्निहित शक्ति को पहचान लिया है और अपने संस्थानों को मजबूत किया है, जिसने विकसित देशों को आगे आकर भारत के साथ समझौते करने के लिए प्रेरित किया है।

भारतीय अशिक्षित और अधीन

यह भी कहा कि आजादी के बाद भी, कुछ लोगों ने अपने फायदे के लिए औपनिवेशिक मानसिकता को बरकरार रखा। उन्होंने कहा, ‘‘यदि हमने अपनी अंतर्निहित शक्ति को पहचान कर अपने संस्थानों को मजबूत न किया होता, तो कोई भी देश हमारे साथ व्यापार समझौते नहीं करता। इसी कारण विकसित देश भारत के साथ व्यापार समझौते करने के लिए आगे आए हैं।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी देश में क्षमता अचानक नहीं आती बल्कि यह पीढ़ियों से निर्मित होती है और ज्ञान, परंपरा, कड़ी मेहनत और अनुभव द्वारा निखरती है। मोदी ने कहा कि इतिहास के लंबे कालखंड में, सदियों की गुलामी ने देश की क्षमता के प्रति हीनता की भावना को भर दिया था, और अन्य देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में इस धारणा को गहराई से बैठा दिया था कि भारतीय अशिक्षित और अधीन हैं।

अगर देश अब भी 2014 से पहले के युग की निराशा में डूबा हुआ होता, ‘कमजोर पांच’ देशों में गिना जाता और नीतिगत गतिरोध से ग्रस्त होता, तो हमारे साथ व्यापार समझौता कौन करता?’’ मोदी ने कहा, ‘‘पिछले 11 वर्ष में, देश की चेतना में ऊर्जा का एक नया प्रवाह प्रवाहित हुआ है। भारत अब अपनी खोई हुई क्षमता को पुनः प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है।’’ (भाषा )

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