चिलकुर श्री बालाजी मंदिर के पूर्व मुख्य पुजारी सौंदर राजन का निधन

हैदराबाद, चिलकुर बालाजी मंदिर के पूर्व मुख्य पुजारी सौंदर राजन का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। शुक्रवार को चिलकुर स्थित अपने आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। वे अपने पीछे भाई मंदिर के ट्रस्टी एवं पुजारी सीएस गोपाल कृष्णा, पुत्र सीएस लक्ष्मीनरसिम्हा, सीए रंगराजन, सीएस मुरलीधरण समेत भरापूरा परिवार छोड़ गये। उनकी अंतिम यात्रा शनिवार 28 फरवरी को सुबह 10 बजे उनके निवास से गौशाला तक निकाली जाएगी।

यहाँ सौंदर राजन के बेटे और मंदिर के वर्तमान मुख्य पुजारी रंगराजन ने उक्त जानकारी दी। ज्ञातव्य है कि सौंदर राजन ने लंबे समय तक हैदराबाद के इस प्रसिद्ध मंदिर को अनुशासन और सेवा भाव से संभाला। प्रो. एम. वी. सौंदर राजन स्वर्ण पदक विजेता तथा अत्यंत प्रतिष्ठित शिक्षक रहे। उनका शैक्षणिक एवं व्यावसायिक जीवन अत्यंत प्रशंसनीय रहा। उन्हें वर्ष 1981 में आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा श्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

प्रो. राजन ने उस्मानिया विश्वविद्यालय में महत्वपूर्ण पद संभाले

प्रो. राजन ने उस्मानिया विश्वविद्यालय में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए सफल प्रशासक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई, जिनमें उनका अंतिम पद कुलसचिव (रजिस्ट्रार), उस्मानिया विश्वविद्यालय का रहा। हिन्दू धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन में उनकी गहन जानकारी, प्रतिबद्धता और अनुभव के आधार पर उन्होंने यह पुस्तक ऐसे उद्देश्य से लिखी है, जो प्रत्येक भक्त की दृष्टि में अत्यंत पवित्र है। हैदराबाद में अहोबिला मठ सेवा समिति के सचिव के रूप में दस वर्षों तक कार्य करते हुए उन्हें जो अंतरदृष्टियाँ और अनुभव प्राप्त हुए, वे सभी इस पुस्तक में प्रतिबिंबित हैं।

वे कृष्ण समाजम् के संयुक्त सचिव भी रहे, जो हैदराबाद स्थित श्रीनिवासनगर कॉलोनी में गुरुवायुरप्पन मंदिर की स्थापना के लिए उत्तरदायी संस्था है। वे तेलंगाना अर्चक संघ के अध्यक्ष, आंध्र प्रदेश अर्चक संघ के उपाध्यक्ष के रूप में सेवा दे रहे थे। साथ ही वे मंदिर संरक्षण आंदोलन के संयोजक भी थे। साथ ही प्रो. राजन वाक (वाइस ऑफ टेम्पल्स) नामक त्रिभाषी पत्रिका (अंग्रेज़ी, तेलुगु और हिन्दी) के संपादक भी थे।

प्रो. सौंदर राजन के निधन पर तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि चिलकुर बालाजी मंदिर, जिसे तेलंगाना तिरुपति के नाम से जाना जाता है, के पूर्व मुख्य पुजारी सौंदर राजन के निधन पर गहरा दुख पहुँचा है। राज्यपाल ने याद किया कि सौंदर राजन ने अपना जीवन आध्यात्मिक सेवा, सामाजिक मूल्यों और ईश्वर के सामने समानता के सिद्धांत को बनाए रखने के लिए समर्पित कर दिया था। उनके निधन से हिन्दू आध्यात्मिक समुदाय में गहरा खालीपन आ गया है। राज्यपाल ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए दुखी परिवार, भक्तों और प्रशंसकों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त की।

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चिलकुर श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर को विशेष पहचान दिलाई

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने प्रमुख तीर्थ स्थल चिलकुर श्री बालाजी मंदिर के पूर्व मुख्य पुजारी सौंदर राजन के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उस्मानिया विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर और रजिस्ट्रार के रूप में बहुत अच्छा नाम कमाने वाले सौंदर राजन ने आध्यात्मिक चेतना के प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि चिलकुर श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर को विशेष पहचान लाने में भी सौंदर राजन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि सौंदर राजन की आत्मा को शांति मिले और उनके परिवार सदस्यों को इस दुख की घड़ी में मनोबल मिले। उन्होंने उनके परिवार और शुभचिंतकों के प्रति शोक और गहरी संवेदना व्यक्त की। इसके अलावा परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर और अन्य ने भी सौंदर राजन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। अवसर पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजनरसिम्हा ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि एम.वी. सौंदर राजन के निधन से देश को भारी क्षति पहुँची है, जिसकी कभी भरपाई नहीं की जा सकती है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने चिलकुर बालाजी देवस्थानम् के पूर्व मुख्य पुजारी डॉ. एम.वी. सौंदर राजन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करे हुए कहा कि उस्मानिया विश्वविद्यालय (उविवि) में प्रोफेसर के रूप में सेवा दे चुके डॉ. सौंदर राजन की भारतीय संस्कृति व धर्म की रक्षा के लिए भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनका निधन आध्यात्मिक जगत के लिए अपूर्णीय क्षति है। उन्होंने कहा कि हिन्दू मंदिरों की स्वायत्तता के लिए आंदोलन करने वाले सौंदर राजन मंदिर आध्यात्मिकता का केंद्र बनें, व्यापारिक भावना न हो, यही उद्देश्य आगे बढ़ते रहे।

जी. किशन रेड्डी ने सौंदर राजन को दी श्रद्धांजलि

केंद्रीय कोयला व खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने भी सौंदर राजन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और कहा कि सनातन हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्षरत रहे। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने शोक संदेश में दिवंगत आत्मा की शांति व शोकसंतप्त परिजनों को दुःख सहने की शक्ति देने ईश्वर से प्रार्थना की।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 के दौरान तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा चिलकुर बालाजी मंदिर को अधीन करने के उद्देश्य से किये गये प्रयासों के खिलाफ डॉ. सौंदर राजन ने मंदिर भक्तों के लिए है, व्यापारिक केंद्र नहीं है, इसको लेकर संघर्ष किया। उन्होंने बताया कि वे जाति भेदभाव के खिलाफ समरसता समाज के लिए लडे वहीं ब्राह्मणों के अधिकारों के लिए भी आंदोलन किया। इसके अलावा मंदिर में हुंडी रखने का विरोध करते हुए केवल वॉक पुस्तक बेचकर मंदिर का रखरखाव करके दिखाया और सभी के लिए आदर्श बने।

इसके अलावा भारत राष्ट्र समिति (भारास) प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने डॉ. सौंदर राजन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने शोक संदेश में दिवंगत आत्मा की शांति व शोकसंतप्त परिजनों को दुःख सहने की शक्ति देने ईश्वर से प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि उनका निधन हिन्दू आध्यात्मिक क्षेत्र के लिए अपूर्णीय क्षति है। तेलंगाना तिरुपति के तौर पर प्रसिद्ध चिलकुर बालाजी देवस्थानम के मुख्य पुजारी सौंदर राजन ने सनातन हिन्दू धर्म के मूल्यों तथा भगवान के समक्ष सभी एक समान हैं की भावना जगाते हुए आध्यात्मिक सेवा जिस प्रकार की, वह पूजा के क्षेत्र में सेवा देने वाली युवा पीढ़ी के लिए आदर्श है। भारास उप नेता टी. हरीश राव ने भी दिवंगत आत्मा की शांति व शोक संतप्त परिजनों को दुःख सहने की शक्ति देने ईश्वर से प्रार्थना की।

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