शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का शक्तिशाली साधन : मोलुगरम

हैदराबाद, उस्मानिया विश्वविद्यालय के डॉ. बी.आर. अंबेडकर अनुसंधान केंद्र में डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विचारों पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शुक्रवार से आरंभ हुई। यहाँ जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, रूसा 2.0 द्वारा प्रायोजित तथा फुले अंबेडकर समावेशी एवं सशक्तिकरण अध्ययन केंद्र में आयोजित संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुमार मोलुगरम ने कहा कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे शक्तिशाली साधन है।

डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विचार : संवैधानिक वाद, सामाजिक न्याय और समावेशी राष्ट्र निर्माण विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी को विभिन्न शैक्षणिक और सामाजिक न्याय केंद्रों के सहयोग से डॉ. बी.आर. अंबेडकर अनुसंधान केंद्र, ओयू के निदेशक प्रो. एम. लिंगप्पा के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। इस दो दिवसीय संगोष्ठी में संवैधानिक व्यवस्था, सामाजिक न्याय और समावेशी राष्ट्र निर्माण पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएँगे।

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शिक्षा में लैंगिक, सामाजिक असमानता दूर करने और कौशल बढ़ाने पर बल

प्रो. कुमार मोलुगरम ने संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में बी.आर. अंबेडकर के दृष्टिकोण का हवाला देते हुए कहा कि संवैधानिक मूल्यों को शासन, शिक्षा और सार्वजनिक जीवन का मार्गदर्शक होना चाहिए। उन्होंने प्राथमिक और उच्च शिक्षा को मजबूत करने, लैंगिक और सामाजिक असमानताओं को दूर करने और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

साथ ही वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं उन्नत प्रौद्योगिकियों जैसे उभरते क्षेत्रों में शैक्षणिक पाठ्यक्रम को अद्यतन करने के महत्व को भी रेखांकित किया। यूजीसी मामलों की डीन प्रोफेसर बी. लावण्या ने मुख्य वक्तव्य देते हुए डॉ. अंबेडकर के संवैधानिक नैतिकता और समावेशी विकास के दर्शन पर प्रकाश डाला। अवसर पर संगोष्ठी की स्मारिका भी जारी की गई।

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