हिन्दी महाविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हर्षोल्लास से
हैदराबाद, हिन्दी महाविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। अवसर पर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सीए लक्ष्मीनिवास शर्मा, उपाध्यक्ष श्यामसुंदर मूंदड़ा, संयुक्त सचिव प्रदीप दत्त, प्राचार्यद्वय डॉ. बाला कुमार एवं डॉ. मदनमोहन, पूर्व एडेड स्टॉफ में लाजवंती, रीबा जायसवाल, प्रेमलता नैथानी, प्राध्यापक एवं छात्र उपस्थित थे। इस दौरान उस्मानिया विश्वविद्यालय इंटर कॉलेज पुरुष हैडबॉल चैम्पियनशिप के फाइनल की विजेता हिन्दी महाविद्यालय की टीम के खिलाड़ियों को प्रबंध समिति के पदाधिरियों एवं प्राचार्य द्वारा सम्मानित किया गया।

संस्थाध्यक्ष ने सभी को महिला दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ए.आई. द्वारा हम जीवन के विविध क्षेत्रों में अपने कार्यों को सरल बना सकते हैं। महिलाओं के सहयोग से राष्ट्र, समाज और परिवार सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो सकता है। अत हमें नारी शक्ति की योग्यता और संवेदना का सम्मान करना चाहिए। उपाध्यक्ष ने सभी को महिला दिवस की बधाई देते हुए कहा कि महिला और पुरुष दोनों ही समाज के महत्वपूर्ण पहिए हैं, जिससे समाज गति, विकास, सृजन एवं निर्माण की भूमिका का निर्वहन करता है।
नारी के बिना समाज बिना पहिए की गाड़ी के समान है। प्राचार्य ने महिला दिवस की शुभकामनाएँ संप्रेषित करते हुए कहा कि नारी सुबह से लेकर शाम तक नित्यक्रियाशील रहती है। उसने पत्नी, बहन, माँ, बेटी आदि विविध रूप में अपनी भूमिका निभाई है। नारी को प्रतिदिन 1 घंटे का समय अपने लिए रखना चाहिए। इसमें किसी का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. रजनीधारी ने कहा कि किसी भी समाज में स्त्रा और पुरुष की समान भूमिका होती है।
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नारी की प्रसन्नता राष्ट्र की समृद्धि और खुशहाली का संकेत
दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। पुरुष को स्त्रा के जीवन-संघर्षों, उतार-चढ़ाव शारीरिक परिवर्तनों के अनुसार बौद्धिक स्तर के अनुरूप सहयोगात्मक व्यवहार करना चाहिए। नारी को हमेशा प्रसन्न रहना चाहिए। नारी की प्रसन्नता राष्ट्र की समृद्धि एवं खुशहाली का द्योतक है। पूर्व उपप्राचार्या डॉ. सुरभि दत्त ने नारी की महत्ता को अर्द्धनारीश्वर के रूप में बताया। प्रेमलता नैथानी ने कहा सृष्टि के आरंभ में प्रकृति में सभी समान थे, लेकिन महिला शील क्षमा और त्याग के गुणों के कारण ही नारी बनी।
वर्तमान समय में नारी इन गुणों का परित्याग कर अपने स्वरूप को निरंतर बदल रही है, जिसका प्रभाव समाज में दिखाई दे रहा है। परीक्षा नियंत्रक सत्यनारायण राव ने कहा कि जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहाँ सुख समृद्धि स्वयं आ जाती है। इस दौरान सभी महिला प्राध्यापकों के मनोरंजन हेतु खेलों का आयोजन किया गया। पिरामिड एंड बैलून में मानसा (कंप्यूटर साइंस), पिरामिड गेम में रेखा, टारगेट रिंग गेम में स्वाति (कर्मचारी), पानीपुरी चैलेंज में अर्चना सिंह (इतिहास विभागाध्यक्ष), लेमन ईटिंग विदाउट चेजिंग फेस एक्सप्रेशन में मुस्कान (एनसीसी हेड) तथा पूजा (कर्मचारी वर्ग) को पुरस्कृत किया गया। खेल का संयोजन एचआर बी. सौजन्या ने किया। कार्यक्रम का संचालन नीता कुलकर्णी ने किया। एनएसएस विभाग ने कार्यक्रम में सहयोग प्रदान किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम सपन्न हुआ।
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