सभापति के निर्णय के पीछे राहुल गांधी का क्रिमिनल माइंड : केटीआर

हैदराबाद, मुख्य विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (भारास) कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व मंत्री कल्वाकुंट्ला तारक रामाराव ने बीआरएस के टिकट पर चुनाव जीतने के बावजूद कांग्रेस के टिकट पर गत लोकसभा चुनाव लड़कर हार चुके दलबदलू विधायक दानम नागेंदर तथा विधायक कड़ियम श्रीहरि को विधानसभा के सभापति गड्डम प्रसाद कुमार द्वारा क्लीन चिट दिए जाने पर कहा कि इस अलोकतांत्रिक निर्णय के पीछे कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का क्रिमिनल माइंड है।

भारास मुख्यालय तेलंगाना भवन में मीडिया को संबोधित करते हुए केटीआर ने सभापति के निर्णय पर पूछे प्रश्न के उत्तर में कहा कि तेलंगाना सभापति गड्डम प्रसाद कुमार पर सांसद राहुल गांधी का भारी दबाव रहा है। उन्होंने कहा कि बेचारे सभापति का क्या दोष? उन्होंने कहा कि सांसद राहुल गांधी की अनुमति के बिना सभापति इस प्रकार के अनैतिक निर्णय लेने का साहस हरगिज नहीं करेंगे। उन्होंने राहुल गांधी के प्रति कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि राहुल गांधी में जरा सी भी शर्म होगी तो पूरे मामले पर जवाब दें।

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कांग्रेस पर संविधान उल्लंघन का आरोप

केटीआर ने पूरे मामले पर राहुल गांधी को निशाने पर लिया और कहा कि दरअसल राहुल गांधी भी तेलंगाना से मिल रही धन की गठरियों के आगे ऐसे अनैतिक कृत्यों को अंजाम देने पर आतुर हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि दलबदलुओं के बारे में बात करने का कोई नैतिक अधिकार कांग्रेस और राहुल गांधी को है ही नहीं। उन्होंने कहा कि एक तरफ राहुल गांधी संविधान की रक्षा करने दुहाई देते हुए संविधान की प्रति लेकर देशभर में घूमते हैं तो दूसरी ओर उन्हीं की कांग्रेस पार्टी की सरकार तेलंगाना में संविधान का उल्लंघन कर रही है।

केटीआर ने कहा कि इस निर्णय के बाद अब राहुल गांधी एक जोकर के रूप में बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के पहले राहुल गांधी ने आश्वासन दिया था कि यदि कांग्रेस सत्ता में आएगी तो दलबदलुओं की सदस्यता आटोमेटिक रद्द हो जाएगी और वे अयोग्य ठहरा दिए जाएंगे। केटीआर ने आगे कहा कि एक राजनीतिक पार्टी के बी फार्म पर चुनाव जीतकर दूसरी राजनीतिक पार्टी के बी फार्म पर चुनाव लड़कर हारे दलबदलू विधायक को अयोग्य ठहराने के बजाए पूछताछ के नाम पर समय बिताना और फिर बाद में क्लीन चिट देना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

सभापति के फैसले को केटीआर ने बताया अभूतपूर्व

केटीआर ने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में किसी सभापति ने इस प्रकार का निर्णय नहीं दिया होगा। उन्होंने व्यंग्य कसते हुए कहा कि इसके लिए बीआरएस निजाम कॉलेज मैदान में कांग्रेस नेताओं और सभापति का सम्मान करने तैयार है। उन्होंने याद दिलाया कि राहुल गांधी की नानी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने खुद हरियाणा में दलबदलुओं को जब प्रोत्साहन दिया था, तभी से आया राम – गया राम मुहावरा प्रचलित हुआ था।

केटीआर ने वर्ष 2004 में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. वाई.एस. राजशेखर रेड्डी सरकार का उल्लेख किया और कहा कि तत्कालीन टीआरएस के 26 विधायक जीते थे। उनमें से 10 विधायकों को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने खींच लिया था। प्रश्न के उत्तर में दलदबलू विधायक कड़ियम श्रीहरि व दानम नागेंदर की टिप्पणियों को हास्यास्पद बताते हुए केटीआर ने कहा कि इन दोनों को याद करना चाहिए कि किन परिस्थितियों में वे बीआरएस में शामिल हुए थे। उन्होंने कड़ियम श्रीहरि से प्रश्न किया कि आखिरकार बीआरएस ने उनके साथ क्या अन्याय किया था, हर प्रकार से आदर दिया, पद दिए।

केटीआर ने आगे कहा कि जब श्रीहरि वर्ष 2013 के दौरान केसीआर के पास आकर बीआरएस में शामिल हुए थे तब सांसद पद दिया गया। तत्पश्चात उप मुख्यमंत्री बनाया गया। फिर पुत्री को लोकसभा का टिकट दिया गया। अब इस आयु में कड़ियम का अनावश्यक टिप्पणी करना शर्मनाक है।

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