बनें मिनिमलिस्ट – एक शुरुआत तो करें

अरे आपने तो यह सूट उसकी शादी में पहना था। हां, तो क्या हुआ, पहना होगा। कैसे आप कपड़ों को रिपीट कर लेती हैं! हम तो किसी भी कपड़े को एक या दो बार पहनकर या तो उसको रख देते हैं या किसी को दे देते हैं। मेरे सामने जब ये बातें हो रही थीं, तो मैं यह सोच रही थी कि सादगीपूर्ण जीवन जीना क्या सचमुच मुश्किल है? क्या सादगी से रहना गरीब होने का पर्याय है? मेरे विचार में यह एक अहम सवाल है। यह तमाम सवाल मेरे से इसलिए किए जा रहे थे, क्योंकि मैंने किस शादी में क्या पहना था, मैं याद नहीं रखती।

अपनी अलमारी खोलकर मुझे जो भी सामने दिखता है, उसे मैं कायदे से पहनकर कोई भी फंक्शन अटैंड कर लेती हूं। मुझे लगता है शायद कोई इस पर ध्यान नहीं देता कि मैं कब क्या पहनती हूं। शायद मैं एक मिनिमलिस्ट हूं। ये मिनिमलिस्ट क्या होता है? दरअसल मिनिमलिस्ट होने का मतलब है सादगी को अपनाना, धीरे-धीरे अपने घर का सामान कम करना। क्या आपको पता है मिनिमलिस्ट होने के बहुत फायदे हैं? चीजों से मुक्ति पाना, कम से कम सामान के साथ जीवनयापन करना, उसकी शुरुआत आप भी कर सकते हैं। आइये जानें कैसे।

साफ और स्पष्ट बोलें

आप मिनिमलिस्ट क्यों बनना चाह रहे हैं, उसके बारे में लोगों को ईमानदारी से बताएं। बहुत ज्यादा तामझाम के साथ रहने से आप मूवमेंट नहीं कर पाते। आपको पर्यावरण की चिंता है या फिर आप घर में कम सामान रखकर बहुत सारी परेशानियों से बच सकते हैं।

पॉजीटिव होकर सोचें

जिन लोगों को बहुत सारी चीजों के साथ रहने की आदत है, उन उपभोक्तावादी लोगों को अपने मिनिमलिस्ट होने के फायदों के बारे में बताएं। मसलन- आप वॉशिंग मशीन की बजाय कपड़ों को हाथ से धोते हैं। इससे आपकी शारीरिक कसरत होती है। आपने केबल का कनेक्शन इसलिए कटवा दिया है, क्योंकि टेलीविजन देखने से आपका समय बर्बाद होता है। इसकी बजाय आप अपने पढ़ने और लिखने के शौक को पूरा करने के लिए समय निकाल पाते हैं।

लोगों को मिनिमलिस्ट होने के फायदे बताएं

आप इतने कम में कैसे गुजारा कर लेते हो, ऐसा बोलने वाले लोगों को स्पष्ट रूप से बताएं कि कम सामान रखने से आपको खुशी मिलती है या आपको ज्यादा सामान से घर में होने वाली बेतरतीबी से निजात पानी है ताकि आप अपना वक्त अपनी हॉबीज, बच्चों के साथ खेलने और योगासन के लिए स्थान बनाने के लिए ऐसा कर रहे हैं।

आपके मिनिमलिस्ट होने में अगर लोग आपका उपहास बनाते हैं तो उन्हें आगाह कर दें कि आप उनकी तरह नहीं बनना चाहतीं, जो उधार लेकर घी पीने की प्रवृत्ति का शिकार हैं। आपने कम खर्च करने का फैसला किया है ताकि आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो। अपने घर की अव्यवस्था और अपनी वार्डरोब को कम से कम करने पर केंद्रित करें।

जरूरी नहीं है कि सभी आपके जैसे हों

यदि आप मिनिमलिस्ट हैं तो यह जरूरी नहीं कि आप दूसरों को भी ऐसा बनने के लिए उपदेश दें। उन्हें यह न जताएं कि आप जो सोचती हैं, वह सही है और कम में गुजारा करना, उनके लिए भी बेहतर है। क्योंकि यदि आप लोगों को ज्यादा उपदेश देते हैं, तो उनकी खुद से आपके बारे में सही सोचने और समझने या स्वीकार करने की संभावना बहुत कम हो जाती है।

कथनी और करनी में फर्क न करें

लोगों को उपदेश देने की बजाय घर में कम सामान करके अपने घर को सुव्यवस्थित करने के बाद उन्हें आपकी जीवनशैली में आये बदलाव को विश्लेषित करने का मौका दें। क्योंकि एक सजा-संवरा और सादगीपूर्ण कमरा एक मिनिमलिज्म जैसी अस्पष्ट अवधारणा से कहीं ज्यादा शक्तिशाली और आकर्षक होता है। इस तरह दूसरों को सीखने के लिए प्रेरित करें।

प्रेरणा दें

आपके पड़ोसी, आपके कलीग हो सकता है, वो भी ऐसा करने को सोच रहे हों। कई अन्य लोग भी आपके जैसे घर का सामान कम करने की इच्छा रखते हैं। लेकिन वे कह नहीं पाते और ऐसा करने का साहस भी नहीं कर पाते। तो उन्हें अपने व्यवहार से प्रेरणा दें। बहरहाल उपभोक्तावादी संस्कृति के इस दौर में कम चीजों में जीवनयापन करना हमारे नजरिये से भले आसान हो, लेकिन दूसरों को यह इतना आसान नहीं लगता।

अपनी जीवनशैली में बदलाव लाना आसान नहीं होता और आप वह बदलाव क्यों लाना चाहते हैं, इसके बारे में लोगों को तो समझना और भी मुश्किल होता है। धैर्य रखें, थोड़ी सी समझदारी और शालीनता से आप दूसरों को अपनी सादगीपूर्ण जीवनशैली से मिलने वाली खुशियों को समझा सकते हैं और उन्हें भी अपने इस क्रांतिकारी सफर में शामिल होने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

-मधु सिंह

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