ऊर्जा संकट : युद्ध का बाइप्रोडक्ट
अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हमलों से भड़की हिंसा-प्रतिहिंसा की लपटों ने एक बार फिर दुनिया को उस कगार पर ला खड़ा किया है, जहाँ आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा दाँव पर है। तेल और गैस की कीमतों में अचानक उछाल गहरे संकट का संकेत है। संयुक्त राष्ट्र इसकी चेतावनी देते नहीं थक रहा। लेकिन युद्धोन्माद में अंधे दोनों ही पक्ष जैसे कुछ भी सुनने को तैयार नहीं। पोन युद्ध के दौरान देखी गई बाजार की अस्थिरता का नए सिरे से फेरा इस बात का प्रमाण है कि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता ऐसी दोमुँही तलवार है, जो कभी भी वैश्विक अर्थव्यवस्था को लहूलुहान कर सकती है।
पोन संकट ने दुनिया को सिखाया था कि ऊर्जा के लिए किसी एक क्षेत्र या विशेष प्रकार के ईंधन पर निर्भर रहना कितना जोखिम भरा हो सकता है। अब मध्य पूर्व का मौजूदा तनाव उसी घाव को फिर से कुरेद रहा है। संयुक्त राष्ट्र की यह चेतावनी कि बाज़ार में वैसी ही अस्थिरता उभर रही है, वैश्विक नेतृत्व के लिए एक अलार्म की तरह है। जब भी भौगोलिक-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो ऊर्जा की कीमतें आसमान छूने लगती हैं, जिससे परिवहन, मैन्युफैक्चरिंग और अंततः आम आदमी की रसोई का बजट बिगड़ जाता है। यह अस्थिरता दर्शाती है कि जीवाश्म ईंधन का वैश्विक बाज़ार कितना नाजुक और अविश्वसनीय है।
सीमित देशों के नियंत्रण में ऊर्जा स्रोतों का संकट
इस संकट की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि हम आज भी उन ऊर्जा स्रोतों के पीछे भाग रहे हैं जिनका नियंत्रण मुट्ठी भर देशों या अस्थिर क्षेत्रों के हाथ में है। यहाँ नवीकरणीय ऊर्जा का महत्व केवल पर्यावरण को बचाने तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा संप्रभुता का मुद्दा बन जाता है। याद रहे कि सूर्य की रोशनी, हवा और पानी ऐसे स्रोत हैं जो किसी भौगोलिक सीमा या युद्ध से बाधित नहीं होते।
यह ठीक है कि नवीकरणीय ऊर्जा के बुनियादी ढाँचे में निवेश महँगा हो सकता है। लेकिन, एक बार स्थापित होने के बाद इसकी परिचालन लागत न्यूनतम और स्थिर होती है, जो तेल की कीमतों की तरह झटके नहीं देती। इसके अलावा, सौर और पवन ऊर्जा के विस्तार से देश बाहरी देशों की मनमानी और युद्ध के कारण होने वाले आपूर्ति अवरोधों से मुक्त हो सकते हैं।कहना चाहिए कि वर्तमान संकट नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ने की गति को तेज करने का एक अनिवार्य अवसर है।
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युद्धों से बढ़ती वैश्विक मुद्रास्फीति और अस्थिरता
यदि हम अभी नहीं सँभले, तो हम एक ऐसे पा में फँसे रहेंगे, जहाँ हर युद्ध के साथ वैश्विक मुद्रास्फीति बढ़ेगी और जलवायु लक्ष्यों से हमारा ध्यान भटकता रहेगा। जीवाश्म ईंधन न केवल शांति के लिए खतरा हैं, बल्कि वे धरती के बढ़ते तापमान के प्राथमिक कारक भी हैं। इस समय ऊर्जा संक्रमण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि अस्तित्व की आवश्यकता है। नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश का अर्थ है – एक सुरक्षित, स्वच्छ और अधिक अनुमानित भविष्य में निवेश।
मध्य पूर्व का वर्तमान संकट हमें याद दिलाता है कि ऊर्जा सुरक्षा की पुरानी परिभाषाएँ अब प्रासंगिक नहीं रह गई हैं। असली सुरक्षा टैंकों और मिसाइलों से नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और टिकाऊ ऊर्जा प्रणालियों से आएगी। वैश्विक समुदाय को अब युद्धकालीन तत्परता के साथ नवीकरणीय ऊर्जा की ओर रुख करना चाहिए। यह समय केवल संकट पर विलाप करने का नहीं, बल्कि जीवाश्म ईंधन की बेड़ियों को तोड़कर एक हरित और स्थिर भविष्य की नींव रखने का है। जैसा कि संयुक्त राष्ट्र ने आगाह किया है, अस्थिरता का यह दौर एक चेतावनी है – या तो हम बदलें, या फिर बार-बार इसी संकट को झेलने के लिए तैयार रहें!
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