पौराणिक कथाओं में शक्ति की पूजा
कहा जाता है कि महाभारत का युद्ध शुरू होने वाला था, तब भगवान श्री श्रीकृष्ण ने अर्जुन को देवी दुर्गा की आराधना करने की सलाह दी थी। भगवान श्री श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि अगर वे युद्ध में विजय प्राप्त करना चाहते हैं, तो उन्हें पहले मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। उनकी सलाह मानकर अर्जुन ने पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से देवी दुर्गा की उपासना की।
कथा के अनुसार, अर्जुन की भक्ति से प्रसन्न होकर मां दुर्गा प्रकट हुईं और उन्हें युद्ध में विजय का आशीर्वाद दिया। देवी ने कहा- धर्म की रक्षा के लिए होने वाले इस युद्ध में पांडवों की जीत निश्चित है। इसके बाद अर्जुन ने पूरे आत्मविश्वास के साथ युद्ध में भाग लिया और आखिर में महाभारत के युद्ध में पांडवों की विजय हुई। इसीलिए नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा को शक्ति, साहस और विजय प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है।
रावण
रावण भी मां दुर्गा का परम भक्त था। उसने देवी को प्रसन्न करने के लिए कई बार कठोर तपस्या और यज्ञ किए थे। माना जाता है कि शक्ति की प्राप्ति के लिए उसने देवी की विशेष साधना की थी
नवरात्रि पूजा का महत्व
नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा की साधना के लिए बेहद शुभ माने जाते हैं। इन दिनों में व्रत, पूजा, पाठ और दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से जीवन में सुख-समफद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है। धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि में मां दुर्गा की सच्चे मन से आराधना करने से भय, बाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सफलता के मार्ग खुलते हैं।
इस तरह पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि केवल रावण ही नहीं, बल्कि महाभारत के महान धनुर्धर अर्जुन ने भी मां दुर्गा की आराधना की थी और देवी के आशीर्वाद से विजय प्राप्त की थी।
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