एनडी-एफई-बी रेयर अर्थ परमानेंट मैगनेट्स पायलट प्लांट स्थापित

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हैदराबाद, भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान इंटरनेशनल एडवांस्ड रिसर्च सेंटर फॉर पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मैटेरियल्स (एआरसीआई), हैदराबाद में एनडी-एफई-बी (नियॉडीमियम-आयरन-बोरॉन) रेयर अर्थ परमानेंट मैगनेट्स के निर्माण हेतु पायलट प्लांट स्थापित किया गया। एनडी-एफई-बी चुंबक इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियों में आवश्यक घटक हैं। यह पायलट प्लांट संबंधित महत्वपूर्ण सामग्रियों में आत्मनिर्भरता हासिल करने और वैश्विक दुर्लभ पृथ्वी मूल्य श्रृंखला में भारत की स्थिति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पायलट प्लांट का उद्घाटन डीएसटी के सचिव प्रो. अभय करंदीकर तथा एआरसीआई के निदेशक डॉ. आर. विजय ने किया। अवसर पर डीएसटी के पूर्व सचिव तथा एआरसीआई गर्वनिंग काउंसिल के अध्यक्ष प्रो. आशुतोष शर्मा, मिधानी के पूर्व सीएमडी तथा तकनीकी समीक्षा समिति के सदस्य डॉ. एस.के. झा, अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन के सीईओ डॉ. शिवकुमार कल्याणरामन, राष्ट्रीय संस्थानों, उद्योगों के प्रतिनिधियों के साथ अन्य हितधारक उपस्थित थे।

जानकारी देते हुए बताया गया कि यह प्रायोगिक संयंत्र प्रौद्योगिकी सत्यापन और प्रक्रिया अनुकूलन, उद्योग सहयोग और प्रदर्शन, स्वदेशी नवाचारों को वाणिज्यिक विनिर्माण तक पहुँचाने और डीप-टेक स्टार्टअप और निजी क्षेत्र की भागीदारी का समर्थन करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करेगा। यह पहल आत्मनिर्भर भारत की उपलब्धि और विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

पायलट प्लांट से रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में कदम

प्रो. अभय करंदीकर ने कहा कि यह पायलट प्लांट महत्वपूर्ण सामग्रियों में खासकर वैश्विक आपूर्ति स्वच्छ ऊर्जा एवं उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में भारत की बढ़ती माँग के संदर्भ में रणनीतिक स्वायत्तता हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कच्चे माल से लेकर चुंबक निर्माण तक पूरी मूल्य श्रृंखला में स्वदेशी क्षमताओं की स्थापना से आपूर्ति सुरक्षा, लागत प्रतिस्पर्धात्मकता और तकनीकी नेतृत्व में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 की दिशा में काम करते हुए संसाधनों की कमी को दूर करना और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करना हमारी विकास रणनीति का केंद्र होगा।

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इस तरह की पहल निर्भरता को कम करने के साथ लचीलापन और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होती हैं।
डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन ने भारत के ईवी ईकोसिस्टम सहित महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को गति देने के लिए मिशन फॉर एडवांसमेंट इन हाई-इम्पैक्ट एरिया पहलों पर प्रकाश डाला। डॉ. आर. विजय ने कहा कि पायलट प्लांट से उद्योग जगत की भागीदारी को बढ़ावा मिलने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और स्वदेशी चुंबक प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण में सहायता मिलने की उम्मीद है। यह पायलट प्लांट भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ईकोसिस्टम और उन्नत सामग्री विनिर्माण के विकास में योगदान देगा।

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