बायोगैस का केन्द्र बनीं बोइनपल्ली तथा गुडीमल्कापुर सब्ज़ी मंडियाँ

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हैदराबाद, ऑर्गेनिक कचरे का इससे बेहतर उपयोग शायद ही हो। पिछली बीआरएस की सरकार में आकार लेने वाले बोयोगैस प्लांट अब पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं। मौजूदा एलपीजी संकट के दौरान यह बायोगैस एक असरदार विकल्प के तौर पर सामने आया है। बीआरएस सरकार ने बोइनपल्ली सब्जी मंडी और गुडीमल्कापुर मंडी में पैदा होने वाले भारी मात्रा में ऑर्गेनिक कचरे से बायोफ्यूल बनाने का आइडिया अपनाया था।

तेलंगाना की सबसे बड़ी सब्जी मंडी बोइनपल्ली मार्केट में बायोफ्यूल प्लांट, जो मार्च 2021 में लगाया गया था, सब्जी के कचरे से लगभग 500 यूनिट बिजली और 30 किलो बायोफ्यूल बना रहा है। यह बायोगैस कैंटीन चलाने में मदद करती है, जो रोज़ाना 500 से 600 लोगों को 10 तरह का नाश्ता देती है, जिसमें कुली और दिहाड़ी मजदूर के साथ ही कमीशन एजेंट और लॉरी और ट्रक कर्मी शामिल हैं।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम पहल

सीएसआईआर-आईआईसीटी के वैज्ञानिकों और विषेशज्ञों की टीम ने एनारोबिक गैस लिफ्ट रिएक्टर (एजीआर) पर आधारित बायो मीथेनेशन तकनीक का इस्तेमाल करके बायोगैस प्लांट डिज़ाइन किया। इस नई तकनीक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्यान खींचा और 2021 में उनके ‘मन की बात’ में इसका ज़िक्र किया गया था।

यह प्लांट पिछले कुछ महीनों से इस्तेमाल में नहीं था, लेकिन अब चालू हो गया है। बोइनपल्ली एग्रीकल्चरल मार्केट कमेटी के सिलेक्शन ग्रेड सेक्रेटरी ने बताया कि इस मार्केट से लगभग आठ से दस टन सब्जी का कचरा इकट्ठा किया जाता है, जिससे हर दिन लगभग 500 यूनिट बिजली और 30 किलो बायोफ्यूल बनता है। उन्होंने कहा कि बनाई गईं बिजली का इस्तेमाल स्ट्रीटलाइट, 170 सब्जी स्टॉल, एक एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग और पानी की सप्लाई के लिए किया जा रहा है, जबकि बायोफ्यूल का इस्तेमाल किचन में किया जाता है।

बायोगैस और 5 किलो लीटर तरल बायो खाद पैदा कर रहा

गुडीमल्कापुर बायोगैस प्लांट वर्ष 2019 में लगा था और 2022 में काम करना शुरू कर दिया। इस मार्केट में पैदा होने वाले लगभग 5 टन सब्ज़ियों के कचरे को साइंटिफिक ट्रीटमेंट के लिए डिज़ाइन किया गया है। गुडीमल्कापुर एग्रीकल्चर मार्केट कमेटी के सिलेक्शन ग्रेड सेक्रेटरी प्रसाद ने कहा कि प्लांट अपनी पूरी क्षमता पर चलने पर हर दिन लगभग 200 क्यूबिक मीटर बायोगैस और 5 किलो लीटर तरल बायो खाद पैदा कर रहा है।

प्लांट से पैदा होने वाली बायोगैस का इस्तेमाल मार्केट यार्ड के लिए बिजली बनाने और कुछ हद तक मार्केट की कैंटीन में हर दिन एलपीजी की जगह लेने के लिए किया जाता है। बायोगैस से मिलने वाली बिजली का इस्तेमाल अभी यार्ड लाइन को रोशन करने के लिए किया जाता है।

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