आरक्षण पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का विहिप ने किया स्वागत
हैदराबाद, विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के धर्माचार्य संपर्क प्रमुख पागुडाकुला बालास्वामी ने धर्म परिवर्तन के बाद भी अनुसूचित जाति (एससी) आरक्षण का लाभ लेने वालों पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया।
बालास्वामी ने कहा कि ईसाई जीवन पद्धति अपनाने के बावजूद एससी आरक्षण का लाभ लेना न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि यह सामाजिक न्याय की भावना का भी उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया निर्णय स्वागत योग्य है और यह लंबे समय से हो रहे दुरुपयोग पर करारा तमाचा भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एससी आरक्षण उन वर्गों के लिए है, जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से सामाजिक भेदभाव और अस्पृश्यता का सामना किया। धर्म परिवर्तन के बाद भी इस लाभ को जारी रखना दोहरी मानसिकता और कानून का दुरुपयोग है।
बालास्वामी ने कहा कि एक ओर ईसाई धर्म अपनाना और दूसरी ओर एससी आरक्षण का लाभ लेना, वास्तविक दलित अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, राजस्व विभाग, विजिलेंस और पुलिस से संयुक्त रूप से विशेष जांच अभियान चलाने की मांग करते हुए फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर या धर्म छिपाकर सरकारी नौकरियां, शैक्षणिक प्रवेश, छात्रवृत्तियां और अन्य योजनाओं का लाभ लेने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।
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बालास्वामी ने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में जालसाजी, धोखाधड़ी और गलत जानकारी देकर सरकार को गुमराह करने जैसे आरोपों के तहत मुकदमे दर्ज किए जाने चाहिए। विहिप द्वारा केंद्र और राज्य सरकारों से एससी लाभार्थियों का व्यापक ऑडिट, फर्जी प्रमाणपत्रों का तत्काल निरस्तीकरण, अयोग्य लाभार्थियों पर आपराधिक कार्रवाई, वास्तविक पात्रों को न्याय सुनिश्चित करना करने की भी मांग की गई।
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