राजस्थान : नकली डॉक्टर रैकेट पकड़ा गया, 18 गिरफ्तार
जयपुर, राजस्थान पुलिस ने नकली फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) सर्टिफिकेट जारी करने वाले एक कथित रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस संबंध में राज्य मेडिकल काउंसिल (आरएमसी) के पूर्व रजिस्ट्रार समेत 18 लोगों को गिरफ्तार किया है। एडीजी स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप विशाल बंसल ने बताया कि नकली सर्टिफिकेट के संबंध में शिकायत मिलने के बाद यह कार्रवाई शुरू की गई थी।
इसके बाद एक शुरुआती जाँच की गई और फिर मामला दर्ज किया गया। जाँच के दौरान एक आरोपी पीयूष त्रिवेदी करौली जिले में एक जाली सर्टिफिकेट जमा करके इंटर्नशिप करते हुए पाया गया। उसे गिरफ्तार कर लिया गया और पूछताछ के दौरान उसने कुछ अन्य लोगों की भूमिका का खुलासा किया, जिनकी पहचान देवेंद्र, शुभम और भानाराम के रूप में हुई। इन लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने बताया कि आगे की जाँच से पता चला कि इसमें एक संगठित रैकेट शामिल है। यह गिरोह अधिकारियों की कथित मिलीभगत से जाली एफएमजीई सर्टिफिकेट का इस्तेमाल करके अवैध इंटर्नशिप और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करवाने में मदद करता था। इस मामले में एक अलग केस दर्ज किया गया है।
90 से ज्यादा डॉक्टरों की नकली दस्तावेज़ों से इंटर्नशिप पकड़ी गई
अब तक 90 से ज्यादा ऐसे डॉक्टरों की पहचान की गई है, जिन्होंने कथित तौर पर जाली दस्तावेजों जरिए इंटर्नशिप और रजिस्ट्रेशन हासिल किया था। अधिकारियों ने बताया कि एक समन्वित अभियान के तहत 21 से ज्यादा टीमों ने दिल्ली, जयपुर, उदयपुर और जोधपुर समेत कई जगहों पर और झुंझुनू, सीकर, धौलपुर, कोटपुतली, अलवर और करौली जैसे जिलों में एक साथ छापे मारे।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में आरएमसी के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा और पूर्व नोडल अधिकारी अखिलेश माथुर शामिल हैं। जांचकर्ताओं ने यह भी पाया कि एक आरोपी डॉ. यश पुरोहित, उदयपुर के एक निजी अस्पताल में जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके काम कर रहा था। अधिकारियों ने इसे गंभीर अपराध बताया।
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शुरुआती जांच से पता चलता है कि अधिकारियों और बिचौलियों ने कथित तौर पर नकली इंटर्नशिप और पंजीकरण प्रमाण पत्र दिलाने के लिए हर उम्मीदवार से 20-25 लाख रुपए लिए। कुल रकम में से कथित तौर पर हर उम्मीदवार के 11 लाख रुपए आरएमसी अधिकारियों के पास जा रहे थे और बाकी रकम बिचौलियों के बीच बांटी जा रही थी।
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