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ऑस्ट्रेलिया : नाबालिगों पर बैन लागू करने में सोशल मीडिया कंपनियां नाकाम

मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए लगाए गए सोशल मीडिया प्रतिबंध के करीब चार महीने बाद जारी पहली विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट में पाया गया है कि प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियां नियमों का पूरी तरह पालन नहीं कर रही हैं। ऑनलाइन सुरक्षा नियामक ‘ई-सेफ्टी’ की इस रिपोर्ट ने कई गंभीर चिंताएं उजागर की हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ सोशल मीडिया मंचों ने कानून का पालन करने के लिए कदम उठाए हैं और जनवरी मध्य तक करीब 47 लाख तथा मार्च की शुरुआत तक अतिरिक्त 3.1 लाख खातों को हटाया गया।

हालांकि, इसके बावजूद चार प्रमुख क्षेत्रों में अनुपालन को लेकर चिंता बनी हुई है। इनमें ऐसे संदेश शामिल हैं जो 16 वर्ष से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं को आयु सत्यापन प्रक्रिया को पार करने के लिए प्रेरित करते हैं। प्रतिबंध के उल्लंघन के लिए कुछ प्लेटफॉर्म द्वारा बार-बार आयु सत्यापन का प्रयास करने की अनुमति देना, माता-पिता के लिए शिकायत दर्ज कराने की प्रभावी व्यवस्था का अभाव, तथा नाबालिगों को खाते बनाने से रोकने में अपर्याप्त प्रयास जिम्मेदार हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ई-सेफ्टी आयुक्त जूली इनमैन ग्रांट अब फेसबुक, इन्स्टाग्राम, स्नैपचैट, टिकटॅक और यू ट्यूब के खिलाफ संभावित उल्लंघन की जांच कर रही हैं। फिलहाल किसी कंपनी पर जुर्माना नहीं लगाया गया है और वर्ष के मध्य तक कार्रवाई पर निर्णय लिया जा सकता है।

नए नियमों के बावजूद बच्चों पर सोशल मीडिया नियंत्रण अधूरा

सरकार ने हाल ही में नए नियम भी लागू किए हैं, जिनके तहत उन सोशल मीडिया मंच को भी कानून के दायरे में लाया गया है जिनमें ‘आसक्त करने वाले’ फीचर होते हैं। इनमें अनंत स्क्रॉल, ‘लाइक’ या ‘अपवोट’ जैसे फीडबैक फीचर और समय-सीमा वाली ‘स्टोरी’ जैसे विकल्प शामिल हैं, जो उपयोगकर्ताओं को बार-बार प्लेटफॉर्म पर लौटने के लिए प्रेरित करते हैं।

हालांकि, रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि 50 लाख से अधिक खातों को हटाना वास्तविक उपयोगकर्ताओं की संख्या को नहीं दर्शाता, क्योंकि कई लोग एक से अधिक खाते रखते हैं। यह भी स्पष्ट नहीं है कि प्रतिबंध लागू होने के बाद कितने नए खाते बनाए गए या कितने नाबालिग अन्य प्लेटफॉर्म की ओर चले गए।

दिसंबर के बाद रेडनोट, योपे और लेमन8 जैसे कम चर्चित प्लेटफॉर्म के डाउनलोड में वृद्धि की खबरें सामने आई हैं। साथ ही, कुछ ऐप जैसे मैसेजिंग सेवाएं और गेमिंग प्लेटफॉर्म अभी भी इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर हैं, जिससे कानून में ‘खामियां’ होने की बात कही जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया का परिदृश्य लगातार बदल रहा है, जिससे सभी सोशल मीडिया मंचों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनियों द्वारा उठाए गए ‘उचित कदम’ पर्याप्त हैं या नहीं, इसका अंतिम निर्णय अदालतों को करना होगा। रिपोर्ट के अनुसार, केवल आयु-आधारित प्रतिबंध से सोशल मीडिया के वास्तविक खतरों—जैसे हानिकारक सामग्री, एल्गोरिदम और डिजाइन—का समाधान नहीं होता। ऐसे में विशेषज्ञों ने व्यापक और सख्त कानूनों की आवश्यकता पर जोर दिया है। कुल मिलाकर, रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। (द कन्वरसेशन)

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