पुलिस थानों में सीसीटीवी पर सख्ती, गृह सचिव को पेश होने का आदेश

नयी दिल्ली, उच्चतम न्यायालय ने केंद्रीय गृह सचिव को मंगलवार को उसके समक्ष उपस्थित रहने के लिए कहा है ताकि पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना के क्रियान्वयन में उनसे उचित सहायता प्राप्त की जा सके।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश सोमवार को पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की कार्यक्षमता में कमी से संबंधित एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए पारित किया। सुनवाई के दौरान, पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील से हाल ही में मीडिया में आई उस खबर के बारे में पूछा जिसमें सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कई स्थानों पर लगे चीनी कंपनी निर्मित सीसीटीवी कैमरों को हटाए जाने की बात कही गई थी। रिपोर्ट का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति मेहता ने कहा कि केंद्र ने स्वयं पड़ोसी देश से लिये गए कैमरों को हटाने के निर्देश दिए हैं क्योंकि वे डेटा एकत्र कर रहे हैं और उसे वहां भेज रहे हैं।

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पीठ ने टिप्पणी की, ‘अब सरकार ने कुछ विशेष कैमरों को हटाने के निर्देश जारी किए हैं।’ केंद्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजा ठाकरे ने कहा कि इस संबंध में अभी तक कोई औपचारिक आदेश पारित नहीं किया गया है। इस मामले में उच्चतम न्यायालय की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने पीठ को बताया कि अधिकांश राज्यों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं और वे केंद्रीकृत डैशबोर्ड स्थापित करने की प्रक्रिया में हैं। जब दवे ने कहा कि केरल में सबसे अच्छी व्यवस्था है, तो न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा, ‘यदि आप कहते हैं कि केरल में सबसे अच्छी व्यवस्था है, तो अन्य राज्य इसका अनुसरण क्यों नहीं कर सकते?’

पीठ ने कहा कि इस पर संबंधित प्राधिकारियों द्वारा चर्चा की जानी चाहिए। ठाकरे ने कहा कि 60 प्रतिशत निधि केंद्र सरकार द्वारा दी जाती है। पीठ को सूचित किया गया कि उच्चतम न्यायालय द्वारा पहले पारित आदेशों में उठाए गए मुद्दों की व्यवहार्यता, तौर-तरीकों और क्रियान्वयन ढांचे पर विचार-विमर्श करने के लिए आयोजित बैठक में एक अवर सचिव स्तर के अधिकारी उपस्थित थे। पीठ ने असंतोष व्यक्त करते हुए ठाकरे से कहा, ‘हम आदेश पारित कर रहे हैं और आप बैठक में एक अवर सचिव स्तर के अधिकारी को भेज रहे हैं?’ विधि अधिकारी ने अदालत को आश्वासन दिया कि बैठक में एक उच्च स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहेंगे।

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पीठ ने कहा, “इस मामले पर कल फिर से सुनवाई होगी। भारत के गृह सचिव इस न्यायालय के समक्ष उपस्थित रहें ताकि इस योजना के क्रियान्वयन में उनसे उचित सहायता प्राप्त की जा सके, जिसकी निगरानी इस न्यायालय द्वारा की जा रही है।” 26 फरवरी को उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और अन्य पक्षों को एक बैठक में भाग लेने का निर्देश दिया था ताकि केंद्रीकृत डैशबोर्ड के निर्माण और पुलिस थानों में सीसीटीवी उपकरणों के मानकीकरण सहित मुद्दों की व्यवहार्यता, तौर-तरीकों और कार्यान्वयन ढांचे पर विचार-विमर्श किया जा सके।

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उच्चतम न्यायालय ने इससे पहले मीडिया की एक खबर का संज्ञान लेते हुए पुलिस थानों में कार्यशील सीसीटीवी कैमरों की कमी को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। उच्चतम न्यायालय ने 2018 में मानवाधिकारों के हनन की रोकथाम के लिए सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था। दिसंबर 2020 में, उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) सहित जांच एजेंसियों के कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे और रिकॉर्डिंग उपकरण स्थापित करने का निर्देश दिया था। अदालत ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए ऐसी प्रणाली की खरीद अनिवार्य कर दी है जो कम से कम एक वर्ष तक डेटा स्टोर कर सकें। (भाषा)

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