जलबोर्ड एमडी ने किया साइबराबाद आयुक्तालय का निरीक्षण
हैदराबाद, साइबराबाद म्युनिसिपल आयुक्त सृजना, जलबोर्ड के प्रबंध निदेशक अशोक रेड्डी और म्युनिसिपल जोनल आयुक्त हेमंत ने साइबराबाद आयुक्तालय की सीमा का दौरा करने के बाद जलबोर्ड, साइबराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और सिंचाई विभाग की मदद से साइबराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की सीमा के अंदर वर्षा जल ड्रेन में सीवरेज मिलाए बिना सीवरेज ट्रंक मेन लाइन बनाने का फैसला लिया।





निरीक्षण के बाद बताया गया कि दुर्गम चेरुवु से इब्राहिम चेरुवु तक किसी भी तालाब में सीवरेज को जाने से रोकने के बचाव के उपायों के तहत मलकम तालाब से नेकनामपुर तक बॉक्स ड्रेन और सीवरेज ट्रंक मेन का विस्तार किया जाएगा। साथ ही चित्रपुरी कॉलोनी एसटीपी, खाजा कुंटा एसटीपी, नकरामगुंडा एसटीपी से नेकनामपुर में इब्राहिम तालाब तक किए जाने वाले काम पर अधिकारियों के साथ चर्चा की गई। अधिकारियों ने कई खास जगहों का दौरा कर सीवरेज के मौजूदा बहाव की स्थिति, बारिश के पानी की नहरों की स्थिति और ट्रंक मेन बनाने के काम की संभावना का निरीक्षण किया।
सीवरेज लाइन का सर्वे और मैपिंग करने के निर्देश
अधिकारियों को उन इलाकों की पहचान करने का निर्देश दिया गया, जहाँ बारिश के मौसम में सीवरेज बारिश के पानी की नहरों में जाता है और उस समस्या को हमेशा के लिए हल करने के लिए एक खास एक्शन प्लान तैयार करने का निर्देश दिया गया। आयुक्तालय में सभी सीवरेज लाइनों का सर्वे करने और यह मैप करने का सुझाव दिया गया कि सीवरेज बारिश के पानी की नहरों में कहाँ से आ रहा है।
जलबोर्ड एमडी ने जल बोर्ड के अधिकारियों को उन इलाकों में ट्रंक मेन बनाने को प्राथमिकता देने और प्रस्ताव तैयार करने का आदेश देते हुए स्पष्ट किया गया कि सभी सीवरेज बहाव को पूरी तरह से एसटीपी में डायवर्ट किया जाना चाहिए। अधिकारियों को साफ गाइडलाइन दी गई की सीवरेज की हर बूंद का ट्रीटमेंट किया जाना चाहिए। सभी सीवरेज को ट्रंक मेन के ज़रिए सबसे पास के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में ले जाया जाना चाहिए और जहाँ पानी को पूरा ट्रीटमेंट करने के बाद ही मूसी नदी में छोड़ा जाना चाहिए।
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मूसी नदी में बिना ट्रीटमेंट सीवरेज जाने से रोकने के आदेश
किसी भी हालत में बिना ट्रीटमेंट वाले सीवरेज को मूसी में जाने से रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का आदेश दिया गया। साथ ही बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए स्टॉर्म वॉटर ड्रेन की क्षमता बढ़ाने, सीवरेज और बारिश के पानी की नहरों को पूरी तरह से अलग करने और ट्रंक मेन से जुड़े नेटवर्क को मॉडर्न बनाने जैसे कदम उठाने का सुझाव दिया गया। उन्होंने कहा कि जहाँ जरूरी हो वहाँ नई पाइप लाइन लगाई जाए, पुरानी लाइनें बदली जाएँ और यह पक्का करने के लिए एक सख्त मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाए कि सीवरेज का बहाव कहीं भी नहरों में न मिले। इसके लिए सभी विभाग के अधिकारी मिलकर काम करें।
जलबोर्ड प्रबंध निदेशक अशोक रेड्डी ने सुझाव दिया कि इन इलाकों में ट्रीटेड पानी के दोबारा इस्तेमाल के लिए कंज्यूमर की माँग का अंदाजा लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर एसटीपी के डिजाइन में ट्रीटेड पानी की सप्लाई के लिए एक यूनिट शामिल की जानी चाहिए और ट्रीटेड पानी के स्टोरेज के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, यानी ट्रीटेड वॉटर सम्प, बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि आस-पास के इलाकों में गार्डनिंग, कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी, फ्लशिंग, लैंडस्केपिंग वगैरह के लिए टैंकरों से ट्रीटेड पानी की सप्लाई के लिए एक खास टैंकर फिलिंग पॉइंट बनाया जाना चाहिए।
अवसर पर जलबोर्ड के प्रॉजेक्ट की सीजीएम पद्मजा, सुजाता, सीएमसी चीफ इंजीनियर श्रीलक्ष्मी, इरिगेशन ईई मल्लेश व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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