मनुष्य के जीवन को सार्थक करता है सत्संग : हरिप्रियाजी

हैदराबाद, मनुष्य को सार्थक रास्ता सत्संग दिखाता है। जो सत्संग कर लेता है, वह बहुत आगे बढ़ता है। उक्त उद्गार सिद्दिअम्बर बाजार स्थित बाहेती भवन में राजस्थानी जागृति समिति द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस कथा की महत्ता बताते हुए कथा वाचक बाल विदुषी सुश्री हरिप्रिया वैष्णवी जी ने दिये।

हरिप्रिया वैष्णवी ने कहा कि राजा परीक्षित ने शुकदेव जी से पूछा कि मनुष्य को अंतिम समय आने पर क्या करना चाहिए तो शुकदेव जी ने कहा कि जिस व्यक्ति के जीवन में सत्संग आ जाए तो उसका जीवन सार्थक हो जाता है। जो सत्संग कर लेता है वह बहुत आगे बढ़ता है। ऊँचे पद पर बैठे मानव का दुष्ट संगति से पतन हो जाता है। आप अच्छे इंसान हैं, लेकिन दुष्ट संगति करेंगे, तो दुष्ट बन जायेंगे।

माता-पिता की सतर्कता और सत्संग से जीवन की सही राह

हरिप्रिया जी ने आगे कहा कि माता पिता का धर्म है कि अपने बच्चों पर निगरानी रखें। बेटा-बेटी किसके साथ जा रहे हैं, क्या कर रहे हैं, इसकी निगरानी करें। शुकदेवजी ने कहा कि हर मानव रोज मरता है। अंतिम क्षण तो आता ही नहीं है। मानव रोज मर रहा है। जीव को श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करनी चाहिए। भागवत अनमोल ग्रंथ है। सभी ग्रंथों में सर्वोपरि है। कथा सात दिन की होती है क्योंकि सप्ताह में सात ही दिन होते हैं। सात दिवस में एक न एक दिन जाना है।

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भगवान को पाने का सरल श्रवण भक्ति है, कीर्तन दूसरी सीढ़ी है। अवसर पर अतिथियों का स्वागत समिति के अध्यक्ष श्रीनिवास सोमाणी व अन्य पदाधिकारियों ने किया। कथा में समिति के संजय राठी, रमेश मोदानी, द्वारका दास काबरा, भगवान दास कांकानी, गोविंद बिरादर, मनीष सोमानी, अशोक हीरावत, महेश अग्रवाल, सुरेश राठी, निखिल सोमानी, आशादेवी सोमानी, सुषमा कांकानी, रेखा राठी, महेश तिवारी, उर्मिला मोदानी, बाला प्रसाद लड्डा व भक्तजन उपस्थित थे।

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