ग्रीष्मकालीन शिविर की असुविधाओं की भरमार

हैदराबाद, स्कूलों की छुट्टियाँ हो गई हैं। इसे देखते हुए तेलंगाना खेल प्राधिकरण खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए ग्रीष्मकालीन शिविर आयोजित करता है। हालाँकि इन ग्रीष्मकालीन शिविरों की व्यवस्थाओं से बच्चों के अभिभावक खुश नहीं है। कारण है कि मुख्य खेलों के लिए बच्चों से 2 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं। यहाँ तक तो बात ठीक है, लेकिन यदि इस चिलचिलाती गर्मी में बच्चों को पानी भी उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा है, तो प्राधिकरण की देखरेख में एल.बी. स्टेडियम में शिविर चलाने का क्या फायदा।
बात पानी तक ही सीमित नहीं है, बच्चों को खेल सामग्री भी मयस्सर नहीं है। ये अव्यवस्थाएँ ऐसे समय में हैं, जब सरकार ने खेलों को बढ़ावा देने के लिए 500 करोड़ के बजट का आवंटन किया है। प्राधिकरण का यह व्यवहार कोई नया नहीं है, क्योंकि हर वर्ष ग्रीष्मकालीन शिविरों में ऐसा ही कुछ देखने को मिलता है। इससे स्पष्ट हो रहा है कि यदि अभिभावक अपने बच्चों को शिविर में भेज रहे हैं, तो उन्हें अपने बच्चों के भोजन-पानी की स्वयं व्यवस्था करनी होगी। पैसा देकर भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण ग्रीष्मकालीन शिविर मजाक बनते जा रहे हैं। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों के कान पर जू तक नहीं रेंग रही है।
शिविर के आयोजन में खामियों के संबंध में बात करने पर प्राधिकरण की उप-निदेशक सुजाता ने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि उन्हें शिविर के दौरान असुविधाओं के बारे में कोई जानकारी नहीं है, जबकि उनकी नाक के नीचे ही शिविर का संचालन किया जा रहा है। असुविधाओं के बारे में सवाल उठाने पर इन्हें दूर करने के बजाय वे लिखित रूप में शिकायत की माँग कर रही हैं।
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निधियों की उपलब्धता पर उठे गंभीर सवाल
मिलाप के यह पूछने पर कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी खेल व खेल प्रतिभाओं को उभारने के लिए निधियाँ जारी करने में कोताही नहीं बरत रहे हैं, तब शिविर के लिए निधियों का अभाव क्यों है। इसका उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया और निचले स्तर के अधिकारियों से चर्चा करने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया। वास्तविक रूप से शिविर के संचालन पर नजर डाली जाए, तो वहाँ मूलभूत सुविधाएँ जैसे पेयजल का अभाव है, लेकिन वहीं शिविर में आने वाले खिलाड़ियों को उनके द्वारा भरे गए शुल्क के अनुकूल गुणवत्तापूर्ण खेल सामग्री भी उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है। इतना ही नहीं शिविर के लिए जारी निधियों का उपयोग किए बिना पुरानी पड़ी गुणवत्ताहीन खेल सामग्री का ही उपयोग किया जा रहा है, जिसका हमारे सूत्रों ने खुलासा किया।
एक अभिभावक का कहना है कि सरकार युवा पीढ़ी को ड्रग्स, गांजे जैसी महामारी से बचाने के लिए उन्हें खेल और शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करने पर जोर दे रही है। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को पोशाक से लेकर पाठ्य पुस्तकें और नाश्ते से लेकर दोपहर का भोजन भी दिया जा रहा है, लेकिन खेलों की बात की जाए, तो खिलाड़ियों के लिए पीने का पानी भी उपलब्ध नहीं है, यह कैसा न्याय है। जब हम मूलभूत सुविधाएँ नहीं दे रहे हैं, तब हम कैसे यह सोच सकते हैं कि तेलंगाना से खेल प्रतिभाएँ उभरेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि खेल प्राधिकरण राजस्व उगाही वाला विभाग नहीं है, यहाँ विभाग को खर्चा करना है, लेकिन यहाँ उल्टे खिलाड़ियों से खेलों के विकास के नाम पर पे एण्ड प्ले की नीति के तहत पैसा वसूला जा रहा है। (सी. सुधाकर)
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