आदिलाबाद एयरपोर्ट के लिए एएआई का सर्वे 17 अप्रैल से

आदिलाबाद, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई), केंद्रीय रक्षा मंत्रालय और राज्य सरकार के अधिकारी 17 अप्रैल को ज़मीन पर ऑब्स्टैकल लिमिटेशन सर्वे (ओएलएस) करने के बाद प्रस्तावित आदिलाबाद एयरपोर्ट के रनवे की लंबाई और उसके कोण पर अंतिम फैसला लेंगे। आदिलाबाद एयरपोर्ट बनाने में रनवे की लंबाई सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि इसी से तय होगा कि एयरपोर्ट पर किस तरह के विमान उतर पाएंगे। यह एयरपोर्ट नागरिक और रक्षा दोनों ज़रूरतों को पूरा करेगा।

ओएलएस का मकसद एयरपोर्ट के इलाके में विमानों के उड़ान भरने और उतरने में आने वाली रुकावटों को रोकना है। यह प्रस्तावित एयरपोर्ट के आस-पास के इलाके में मौजूद प्राकृतिक चीज़ों (जैसे नदियाँ और छोटी नहरें) और इंसानों द्वारा बनाई गई चीज़ों (जैसे बिजली के खंभे, इमारतें और ज़मीन की बनावट) की पहचान करता है, उनका नक्शा बनाता है और उनका मूल्यांकन करता है। अगर एयरपोर्ट पर बड़े विमानों को उतरना है, तो रनवे 2.9 किलोमीटर से ज़्यादा लंबा होना चाहिए। अगर रनवे 2.9 किलोमीटर से कम लंबा होगा, तो एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को सेवा नहीं दे पाएगा और उसे स़िर्फ घरेलू विमानों के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकेगा।

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रनवे लंबाई और क्षमता पर स्पष्ट जानकारी

आदिलबाद के विधायक पायल शंकर ने बताया कि रनवे 2.5 किलोमीटर लंबा होगा, क्योंकि प्रस्तावित एयरपोर्ट की कुल लंबाई ही 3.1 किलोमीटर है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय रक्षा मंत्रालय और एएआई, एयरपोर्ट के साथ-साथ आदिलबाद में एक एयरपोर्ट ट्रेनिंग सेंटर और एक रक्षा अनुसंधान संस्थान भी स्थापित करेंगे। शुरुआत में सरकार ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरणके साथ मिलकर एक संयुक्त उद्यम के ज़रिए इस एयरपोर्ट को विकसित करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि बाद में रक्षा मंत्रालय ने एयरपोर्ट बनाने की ज़िम्मेदारी ले ली, जबकि एएआई नागरिक टर्मिनल का निर्माण करेगा।

पायल शंकर ने बताया कि आदिलाबाद एयरपोर्ट की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए, रक्षा मंत्रालय ने एएआई के साथ मिलकर काम करने पर सहमति जताई है। उम्मीद है कि यह एयरपोर्ट बहुत ही कम समय यानि अगले तीन सालों के तैयार हो जाएगा। रक्षा मंत्रालय द्वारा मास्टर प्लान को मंज़ूरी दिए जाने के बाद ही एयरपोर्ट की आधारशिला रखी जाएगी। यह नया एयरपोर्ट 370 एकड़ ज़मीन पर पहले से मौजूद एक रक्षा हवाई पट्टी पर बनाया जाएगा।

एयरपोर्ट के लिए सरकार को अतिरिक्त 450 एकड़ ज़मीन और अधिग्रहित करनी होगी। हालांकि बड़े एयरपोर्ट्स के लिए कम से कम 1,200 एकड़ ज़मीन की ज़रूरत होती है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने नए एयरपोर्ट के लिए 700 एकड़ ज़मीन आवंटित करने का जीओ पहले ही जारी कर दिया है, जिसमें से 430 एकड़ ज़मीन तुरंत जारी कर दी गई है।

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