न्यायालय के फैसले के बाद ट्रंप बोले भारत को शुल्क देना होगा

न्यूयॉर्क/वाशिंगटन, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने व्यापक शुल्कों के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का फैसला आने पर कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौते में ‘‘कुछ नहीं बदलेगा’’ और भारत को शुल्क देना होगा। दरअसल अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने ट्रंप द्वारा कई देशों के खिलाफ लगाए गए व्यापक शुल्क वृद्धि के आदेशों को शुक्रवार को रद्द कर दिया जिसे ट्रंप ने निराशाजनक करार दिया। साथ ही उन्होंने अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद कहा कि वह वैश्विक स्तर पर 10 प्रतिशत शुल्क लागू करने के लिए एक शासकीय आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे।

ट्रंप ने संवाददाता सम्मेलन में एक बार फिर अपना दावा दोहराया कि उन्होंने पिछले साल गर्मियों में भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष, शुल्क की धमकी देकर रुकवाया था। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने उनके अनुरोध पर रूसी तेल की खरीद में काफी कमी की है।

ट्रंप ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले का वाशिंगटन और नई दिल्ली द्वारा इस महीने की शुरुआत में घोषित व्यापार समझौते पर कोई असर नहीं पड़ेगा, साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अपने ‘‘अच्छे’’ संबंधों पर भी चर्चा की।यह पूछे जाने पर कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद भारत के साथ व्यापार समझौते की रूपरेखा की स्थिति क्या होगी, इस पर ट्रंप ने कहा, ‘‘कुछ नहीं बदलेगा।’’

हर महीने 25,000 लोग मारे जा रहे हैं

“कोई बदलाव नहीं होगा। वे (भारत) शुल्क का भुगतान करेंगे और हम शुल्क नहीं देंगे। इसलिए भारत के साथ समझौता यही है कि वह शुल्क देगा यह पहले की स्थिति से उलट है। मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी सज्जन व्यक्ति हैं, लेकिन अमेरिका के संदर्भ में वह जिनके समकक्ष थे उनसे कहीं अधिक होशियार थे। वह हमें नुकसान पहुंचा रहे थे। इसलिए हमने भारत के साथ एक समझौता किया। अब यह एक निष्पक्ष समझौता है और हम उन्हें शुल्क नहीं दे रहे हैं, जबकि वे शुल्क दे रहे हैं। हमने थोड़ा बदलाव किया।’’

ट्रंप ने कहा, “भारत के साथ समझौता जारी है… सभी समझौते जारी हैं, हम बस इसे एक अलग तरीके से करेंगे।” भारत के साथ अपने संबंधों पर एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि भारत के साथ मेरे संबंध शानदार हैं और हम भारत के साथ व्यापार कर रहे हैं। भारत रूस से अलग हो गया है। भारत अपना तेल रूस से ले रहा था और मेरे अनुरोध पर उसने इसमें काफी कमी की, क्योंकि हम उस भयानक युद्ध को समाप्त करना चाहते हैं, जिसमें हर महीने 25,000 लोग मारे जा रहे हैं।’’ (भाषा )

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