क्या आप भी काम टालने की आदत के शिकार हैं?

हम सबके जीवन में एक ऐसा कल होता है जो कभी आता ही नहीं। हम सोचते हैं कि यह काम कल कर लेंगे, यह फोन बाद में कर लेंगे, व्यायाम अगले सप्ताह से शुरू करेंगे और किताब पढ़ना भी किसी खाली दिन के लिए रख देते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह कल इतना लंबा हो जाता है कि कई काम महीनों और कभी-कभी सालों तक टलते रहते हैं। इसी आदत को साधारण भाषा में काम टालना कहा जाता है, लेकिन सवाल यह है कि हम काम टालते क्यों हैं? कई बार इसका कारण आलस नहीं होता।
असली कारण होता है डर। हमें डर होता है कि कहीं काम ठीक से न हो पाए, लोग क्या कहेंगे या हम उतना अच्छा न कर पाएँ जितनी उम्मीद है। इसलिए हम उस काम को शुरू ही नहीं करते। कभी-कभी हमें काम बहुत बड़ा लगता है, इसलिए मन उसे शुरू करने से बचने लगता है। कुछ लोगों को लगता है कि वे दबाव में अच्छा काम करते हैं, इसलिए वे जानबूझकर काम को अंतिम समय तक टालते रहते हैं। लेकिन ऐसा करने से तनाव बढ़ता है और काम का आनंद भी खत्म हो जाता है।
ध्यान भटकाने वाले तत्वों से बचें
अगर हम ध्यान से देखें तो पाएँगे कि काम टालने की आदत धीरे-धीरे आत्मविश्वास को भी कम कर देती है। अधूरे काम मन में बोझ बन जाते हैं। हमें लगता है कि हम बहुत व्यस्त हैं, लेकिन वास्तव में हम महत्वपूर्ण काम पूरे नहीं कर पा रहे होते। इस आदत से बाहर निकलना कठिन नहीं है, बस थोड़ी जागरूकता की ज़रूरत होती है। सबसे पहला तरीका है कि काम को छोटा बना दें। अगर आपको लगता है कि पूरा काम बहुत बड़ा है, तो यह मत सोचिए कि सब कुछ एक साथ करना है। बस शुरूआत कीजिए। उदाहरण के लिए, अगर आपको कोई लेख लिखना है तो यह मत सोचिए कि पूरा लेख लिखना है।
बस पाँच या दस मिनट बैठकर शुरूआत कर दीजिए। अक्सर काम शुरू होते ही आगे बढ़ने लगता है। दूसरा तरीका है कि मोबाइल और अनावश्यक व्यवधानों को थोड़ी देर के लिए दूर रख दिया जाए। जब हम काम शुरू करते हैं और बार-बार ध्यान भटकता है, तो काम कठिन लगने लगता है। लेकिन अगर थोड़ी देर शांत वातावरण में काम करें तो ध्यान भी बना रहता है और काम जल्दी पूरा हो जाता है। तीसरा उपाय है कि अपने दिन की छोटी-सी योजना बना लें।
खुद पर कठोर न हों, छोटे कदम बढ़ाएं
सुबह या रात को यह तय कर लें कि अगले दिन कौन-से दो या तीन काम सबसे ज़रूरी हैं। जब हम कम लेकिन स्पष्ट लक्ष्य रखते हैं, तो उन्हें पूरा करना आसान हो जाता है। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि खुद को बहुत कठोरता से न आंकें। हर व्यक्ति कभी-न-कभी काम टालता है। यह मान लेना कि हमें अपनी आदत सुधारनी है, परिवर्तन की पहली सीढ़ी है। जब हम छोटे-छोटे काम समय पर पूरे करने लगते हैं, तो मन में संतोष भी आता है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

धीरे-धीरे यह आदत बन जाती है कि काम को टालने के बजाय उसे समय पर पूरा किया जाए। अंत में बात बहुत सरल है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए सबसे बड़ा कदम अक्सर यही होता है कि हम काम शुरू कर दें। जब हम शुरूआत कर लेते हैं, तो आधा रास्ता वैसे ही तय हो जाता है। इसलिए अगली बार जब मन कहे – यह काम कल कर लेंगे, तो थोड़ा रुककर सोचिए – क्यों न इसे आज ही शुरू कर दिया जाए।
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