विधानसभा : सरकार को महुए की शराब बनाने का सुझाव

हैदराबाद, राज्य विधानसभा में ज़ेडचर्ला के कांग्रेस विधायक अनिरुद्ध रेड्डी ने आदिवासी इलाकों में आदिवासियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए महुए के फूल की शराब बनाने का सुझाव दिया।

विधानसभा में अनुदान माँग पत्रों पर चर्चा प्रारंभ करते हुए अनिरुद्ध रेड्डी ने कहा कि आदिवासी इलाकों और ग्रामीण इलाकों में मिलावटी सेंधी और शराब के सेवन के कारण आम जनता के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि महुए के फूल की अपनी विशेषता है और इसका लगभग 5 हजार वर्ष पुराना इतिहास है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य पर बुरे प्रभाव के चलते कच्ची शराब (सारा) पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

इसके स्थान पर महुए के फूल की शराब तैयार कर राजस्व उगाही की जा सकती है। इससे सरकार को राजस्व प्राप्त होने के अलावा आदिवासियों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल सकता है। महुए से बनी शराब से स्वास्थ्य पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है। पहले के जमाने में महुए की शराब का सेवन किया जाता था और इसके सेवन से लोग 100 वर्ष से अधिक जीवन जीते थे। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने भारत आने के बाद अपनी शराब बेचने के लिए महुए की शराब पर प्रतिबंध लगा दिया गया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में 1.6 लाख लोगों को महुए की शराब की तैयारी से रोजगार मिल रहा है।

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जापान, फ्रांस और अमेरिका में महुए शराब का निर्यात व स्वास्थ्य लाभ

इसी प्रकार मध्य-प्रदेश में महुए के फूल से शराब तैयार कर इसे मांड के नाम से 800 रुपये प्रति बोतल की दर से बेचकर राजस्व उगाही की जा रही है। इसी प्रकार, गोवा में सरकार आधिकारिक तौर पर महुए के फूल की शराब तैयार कर बेच रही है। इतना ही नहीं, जापान, फ्रांस, अमेरिका में भी महुए की शराब तैयार कर इसे टकीला व अन्य नामों से बेचा जा रहा है। इसके लिए महुए की फूल भारत से निर्यात किए जा रहे हैं। जापान में ज्वार और गेहूँ से स्वास्थ्य वर्धक शराब तैयार की जा रही है।

जापान में इस शराब से 2.26 लाख करोड़ रुपये का टर्नओवर किया जा रहा है। स्कॉटलैंड में 26 हजार करोड़ रुपये का टर्नओवर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महुए के फूल से एसेंस निकालकर इसके जरिए केक, पेस्ट्री, आइसक्रीम, चॉकलेट, बिस्किट आदि तैयार कर आदिवासियों को रोजगार उपलब्ध करवाने के अलावा राजस्व प्राप्त किया जा सकता है। ओड़िशा में सरकारी तौर पर महुए की शराब बेची जा रही है और यह शराब पूर्ण रूप से स्वास्थ्य वर्धक है। उन्होंने इसके लिए अलग से कॉर्पोरेशन बनाकर आदिवासियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि इसके जरिए कम से कम दो हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया जा सकता है।

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