दल-बदलू विधायकों को लेकर विस अध्यक्ष का फैसला अवैध
हैदराबाद, भारास विधायकों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर उन विधायकों की अयोग्यता की माँग की है, जो भारास के टिकट पर निर्वाचित होकर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। उन्होंने इस मामले पर विधानसभा अध्यक्ष (ट्रिब्यूनल चेयरमैन) के फैसले को अवैध घोषित करने का अदालत से आग्रह किया। भारास विधायकों द्वारा दायर 7 याचिकाओं पर बुधवार को उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहियुद्दीन की खण्डपीठ सुनवाई करेगी।
भारास के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस में शामिल होने वाले विधायक टी. प्रकाश गौड़, ए. गांधी, तेल्लम वेंकट राव, बंड्ला कृष्णमोहन रेड्डी, काले यादय्या, दानम नागेन्दर, पोचारम श्रीनिवास रेड्डी, कडियम श्रीहरि, गुडेम महिपाल रेड्डी और संजय कुमार के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं को खारिज करते हुए हाल ही में विधानसभा अध्यक्ष ने अपना फैसला सुनाया था। इस फैसले को गलत करार देते हुए और गलत करार देने और संविधान और कानून के विरुद्ध घोषित करने का आग्रह करते हुए भारास के विधायकों ने उच्च न्यायालय में कुल 9 याचिकाएँ दायर की।
छह भारास विधायकों ने हाईकोर्ट में याचिकाएँ दायर कीं
भारास विधायक के. संजय, के.पी. विवेकानंद, पल्ला राजेश्वर रेड्डी, चिंता प्रभाकर, पौडी कौशिक रेड्डी और टी. जगदीश रेड्डी ने याचिकाएँ दायर की। इनमें से 7 याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश की खण्डपीठ के नेतृत्व में कल सुनवाई होगी। स्टेशन घनपुर और जग्तियाल के विधायक कडियम श्रीहरि व संजय कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई होने की संभावना है।
याचिका में बताया गया कि दल बदलने वाले विधायकों के खिलाफ ठोस सबूत पेश करने के बावजूद भी विधानसभा अध्यक्ष ने इस पर ध्यान दिए बिना और समीक्षा किए बिना अपना फैसला सुनाते हुए याचिकाएँ खारिज कर दी। दल-बदलू विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के स्पष्ट और ठोस सबूत रहने के बावजूद भी इन पर ध्यान नहीं दिया गया। इस कारण विधानसभा अध्यक्ष का फैसला संविधान के 10वें शेड्यूल में उल्लेखित नियमों के विरुद्ध है।
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मतदाताओं को अयोग्यता मांगने का अधिकार बताने पर आपत्ति
याचिका में विधानसभा अध्यक्ष के फैसले में इस बात पर आपत्ति जताई गई कि दल-बदलू विधायकों के खिलाफ अयोग्यता संबंधी कार्रवाई करने की माँग करने का मतदाताओं को अधिकार है, न कि विधायकों को। याचिका में कहा गया कि विधानसभा अध्यक्ष ने इस बात की बिल्कुल परवाह नहीं की कि भारास की ओर से खैरताबाद विधायक चुने गए दानम नागेन्दर ने उसी पद पर रहते हुए कांग्रेस की ओर से सिकंदराबाद लोकसभा चुनाव लड़ा।
कांग्रेस पार्टी द्वारा दिए गए बी-फार्म पर चुनाव लड़ने वाले दानम नागेन्दर को अयोग्य घोषित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को किसी सबूत व प्रमाण की आवश्यकता नहीं है। इसके बावजूद भी विधानसभा अध्यक्ष ने भारास की याचिकाओं को खारिज कर दिया। याचिका में कहा गया कि दानम के लोकसभा चुनाव लड़ने के बावजूद विधानसभा के बाहर घटी घटनाओं पर विचार किए बिना फैसला सुनाना अमान्य है।
विधानसभा अध्यक्ष ने अपने फैसले में इसे स्वीकार भी किया है। अयोग्यता संबंधी याचिका दायर करने के बाद हुए घटनाक्रम को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा ध्यान दिया जाना चाहिए था, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने नजरअंदाज कर दिया। दल-बदलू विधायकों को अयोग्य साबित करने के लिए सभी आवश्यक कई ठोस सबूत पेश करने पर भी विधानसभा अध्यक्ष ने इन पर ध्यान नहीं दिया। दल-बदल के कई सबूतों के साथ सर्वोच्च न्यायालय के फैसला पेश करने के बावजूद भी विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अयोग्यता संबंधी याचिकाओं को खारिज करना अमान्य है। इस आधार पर विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को रद्द किया जाना चाहिए। इस मामले में दल बदलने वाले विधायकों और विधानसभा अध्यक्ष को प्रतिवादी बनाया गया।
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