2017 से पहले पोषाहार माफिया के कब्जे में था : योगी

लखनऊ, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों, खासतौर पर समाजवादी पार्टी (सपा) पर निशाना साधते हुए सोमवार को आरोप लगाया कि 2017 से पहले राज्य में पोषाहार वितरण का ठेका ‘‘एक बड़े माफिया’ के हाथों में था। यहां आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं मुख्य सेविकाओं को स्मार्टफोन और नियुक्ति पत्र वितरित करने के लिए आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘क्या यह उपलब्धि 2017 से पहले संभव थी? (खुद जवाब देते हुए) नहीं, क्योंकि उस समय पोषाहार वितरण का ठेका भारत का सबसे बड़ा शराब माफिया सरकार में पैसा देकर लेता था और सब कुछ वही तय करता था।’’

योगी ने कहा कि 2017 में सरकार बनने के बाद उन्हें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि ‘‘सबसे बड़ा शराब माफिया’’ महिला एवं बाल विकास विभाग में भी दखल रखता था। उन्होंने कहा, ‘‘जब मुझे जानकारी मिली तो मैंने कहा कि यह तो शराब माफिया है, इसका यहां क्या काम?’’ मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उस समय पोषाहार की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि वह खाने लायक ही नहीं होता था। उन्होंने कहा कि कुपोषण के कारण ही प्रदेश ‘बीमारू’ स्थिति में था।

योगी ने सवाल किया, ‘‘यह पाप कौन करता था, यह पाप करने वाले वही लोग हैं, जो जाति के नाम पर समाज को बांटकर समाज की सुरक्षा में भी सेंध लगाने का काम करते। बच्‍चों और कुपोषित माताओं के पोषाहार पर डकैती डालने का काम करते थे। ये वही लोग हैं जो आज नारेबाजी करके, अव्यवस्था पैदा करते।’’

भर्ती में पारदर्शिता का दावा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सराहना

नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता का दावा करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘मैं गारंटी के साथ कह सकता हूं कि एक भी कार्यकर्ता ने न सिफारिश कराई होगी और न पैसा दिया होगा। लेकिन क्या यह 2017 से पहले संभव था? (खुद जवाब देते हुए) नहीं।’’ उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘‘तब सिफारिश और पैसा दोनों चलते थे यानी ‘पर्ची भी और खर्ची भी’।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष भी 19,424 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और 3,077 सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए थे और एक भी शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वर्तमान व्यवस्था में अनियमितताओं की कोई गुंजाइश नहीं है। योगी ने कहा, ‘‘अगर नवजात शिशु सुपोषित है और मां स्वस्थ है, तो मानकर चलिए कि भारत का भविष्य सशक्त है।’’

कोविड-19 महामारी के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की भूमिका की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब दुनिया संकट में थी, तब ये कार्यकर्ता घर-घर जाकर कोविड प्रबंधन में अहम भूमिका निभा रहे थे। उन्होंने विभाग की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में जल्द ही स्पष्ट बदलाव दिखाई देगा।

आंगनबाड़ी को स्मार्ट बनाने और मानदेय बढ़ाने पर जोर

योगी ने कहा, ‘‘अगर आंगनबाड़ी केंद्र स्मार्ट हो रहे हैं, तो कार्यकर्ताओं का मानदेय भी स्मार्ट होना चाहिए।’’ उन्होंने विभाग को प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने और मानदेय बढ़ाने का प्रस्ताव शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हम एक बड़े आयोजन के माध्यम से आपका मानदेय बढ़ाएंगे। आपको सम्मानजनक भुगतान मिलना चाहिए और न्यूनतम मानदेय की गारंटी होनी चाहिए।’’

योगी ने कहा, “पिछले नौ वर्षों में ‘डबल इंजन’ सरकार ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं और इन प्रयासों को जमीन पर उतारने में आप सभी की अहम भूमिका है।” योगी ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की सराहना करते हुए कहा कि वे जमीनी स्तर पर योजनाओं को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा, “आप यशोदा मैया की भूमिका निभाते हुए बच्चों के पोषण और देखभाल के साथ-साथ कुपोषण और बीमारियों के खिलाफ भी लड़ रही हैं।”

मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बधाई देते हुए कहा कि यह बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम है और वह पिछले चार वर्षों से इस बात पर जोर दे रहे थे कि हर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पास स्मार्टफोन होना चाहिए। उन्होंने कहा, “वह (आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका) जो मेहनत करती हैं, वह रियल टाइम (वास्तविक समय में) डेटा समय पर नहीं मिल पाता था, जिससे रैंकिंग प्रभावित होती थी। इसलिए उन्हें स्मार्टफोन देकर प्रशिक्षित करना आवश्यक है।”

योगी ने कहा कि लखनऊ से लेकर सभी जिलों तक यह कार्यक्रम संपन्न हो रहा है। इसके साथ ही आंगनबाड़ी केंद्र भवनों के नए डिजाइन का विमोचन भी किया गया है, जिससे उनकी भूमिका और अधिक सशक्त होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तीन से पांच वर्ष के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों में ही ‘प्री-प्राइमरी’ शिक्षा की व्यवस्था की जा रही है।

आंगनबाड़ी केंद्रों का विस्तार, बच्चों के भविष्य पर फोकस

योगी ने कहा कि पहले जो 27 हजार केंद्र बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित होते थे, अब उन्हें आंगनबाड़ी केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। योगी ने कहा कि आंगनबाड़ी और ‘प्री-प्राइमरी’ को छह वर्ष तक के बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘इसी भूमिका को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को ‘यशोदा मां’ की उपाधि दी है। यह एक बड़ा सम्मान है और इसकी गरिमा बनाए रखते हुए देश के भविष्य को संवारने और मजबूत नींव तैयार करने की जिम्मेदारी आप पर है।”

कार्यक्रम के दौरान 702 आंगनबाड़ी केंद्रों और 71 बाल विकास परियोजना कार्यालयों का शिलान्यास तथा 2,468 आंगनबाड़ी केंद्रों और 69 परियोजना कार्यालयों का लोकार्पण किया गया। महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि आज का कार्यक्रम ऐतिहासिक है और इससे पहले इतने बड़े स्तर पर कार्य नहीं हुए होंगे। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

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राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल सहित कई जनप्रतिनिधि इस अवसर पर उपस्थित रहे। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 69,804 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तथा मुख्य सेविकाओं को स्मार्टफोन, दो लाख ‘ग्रोथ मॉनिटरिंग’ उपकरण तथा 18,440 कार्यकर्ताओं तथा सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। (भाषा)

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