2 अप्रैल से प्रायोगिक रूप से लागू होगा भूभारती
हैदराबाद, सरकार ने राज्य में भूमि विवादों का स्थायी समाधान तथा किसानों को पारदर्शी और सरल सेवाएँ प्रदान करने के उद्देश्य से भूमि, सर्वे और पंजीकरण विभागों को एक ही मंच के तहत लाते हुए इंटीग्रेटेड भूभारती पोर्टल तैयार किया है। इस पोर्टल को 2 अप्रैल से राज्य पांच मंडलों में प्रायोगिक रूप से शुरू किया जाएगा।
राजस्व मंत्री श्रीनिवास रेड्डी ने बुधवार को भूभारती पोर्टल के शुभारंभ के संबंध में राजस्व अधिकारियों के साथ टेलीकॉन्फ्रेंस के माध्यम से समीक्षा की। मंत्री ने कहा कि इंटीग्रेटेड भूभारती पोर्टल को किसान के दृष्टिकोण से तैयार किया गया है और आम जनता, विशेषकर किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए अधिकारियों को आवश्यक सावधानियाँ बरतने के निर्देश दिए गए हैं। 2 अप्रैल से खम्मम जिले के कुसुमांची, भद्राद्रि कोत्तागुड़ेम जिले के अश्वरावपेट, रंगारेड्डी जिले के अमंगल, संगारेड्डी जिले के वटपल्ली और नारायणपेट जिले के कोसगी मंडलों में इसे प्रायोगिक रूप से लागू किया जा रहा है। संबंधित जिला कलेक्टरों को पोर्टल के संचालन पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
मंत्री ने कहा कि पहले की तरह किसानों को अपनी भूमि सेवाओं के लिए मी सेवा केंद्रों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि वे अपने घर से ही भू सेवाएँ प्राप्त कर सकेंगे। किसान अपनी जमीन की सीमाएं तय करने के लिए सर्वे अधिकारियों के चक्कर लगाते थे, अब लॉगिन करते ही भूमि का विवरण प्राप्त होगा। जितनी जमीन के लिए सर्वे चाहिए, उसका आवेदन करने पर संबंधित शुल्क की जानकारी दिखाई देगी।
भुगतान के बाद जानकारी लाइसेंसधारी सर्वेयर के पास जाएगी
शुल्क भुगतान के बाद यह जानकारी उस गांव के लाइसेंसधारी सर्वेयर के लॉगिन में जाएगी। इसके बाद दो दिनों के भीतर उस किसान की जमीन से सटे अन्य किसानों को नोटिस जारी किए जाएंगे। फिर सात दिनों के भीतर सर्वे की तारीख तय कर सर्वे रोवर तकनीक से पूरा किया जाएगा। इसे सिस्टम में दर्ज करने के बाद यह मंडल सर्वेयर की जाँच के लिए जाएगा। इसके बाद मंडल तहसीलदार की मंजूरी मिलने पर आवेदक किसान को एलपीएम और भूधार नंबर आवंटित किए जाएंगे।
ये सभी विवरण भूभारती पोर्टल में भी दर्ज होंगे। सर्वे पूरा होने के बाद सर्वे मैप तैयार कर भूभारती पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में पंजीकरण आवेदन शुरू होने से लेकर पूरा होने तक प्रत्येक चरण में नागरिकों के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस अलर्ट भेजे जाएंगे।
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मंत्री ने बताया कि कृषि भूमि से संबंधित खरीदार और विक्रेता को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए पंजीकरण के समय सर्वे मैप को जोड़ने का नियम इन पाँच मंडलों में लागू किया जा रहा है। प्रत्येक सर्वे मैप (एलपीएम) को एक यूनिक नंबर दिया जाएगा और प्रत्येक सर्वे नंबर को आधार नंबर की तरह भूधार नंबर भी प्रदान किया जाएगा।
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