जयंती : राष्ट्रीय चेतना जगाने वाले डॉ. हेडगेवार

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भारतीय संस्कृति में प्रत्येक पर्व का एक विशेष आध्यात्मिक, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा संदेश होता है। इन पर्वों में उगादी का स्थान अत्यंत विशेष है। नववर्ष के आरंभ का संकेत देने वाला यह पर्व केवल काल परिवर्तन का प्रतीक ही नहीं, बल्कि नए विचारों, नए संकल्पों और नई आशाओं की शुरुआत का भी प्रतीक है। इसी उगादी के पावन दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की जयंती भी मनाई जाती है, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के (आरएसएस) के संस्थापक थे।

1 अप्रैल 1889, उगादी के दिन डॉ. हेडगेवार का जन्म हुआ था। एक ओर भारतीय संस्कृति का प्रतीक यह पावन पर्व और दूसरी ओर राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने वाले महान व्यक्तित्व का जन्मदिन। इन दोनों का एक साथ आना इतिहास में एक प्रतीकात्मक घटना के रूप में देखा जा सकता है। डॉ. हेडगेवार के जीवन का अध्ययन करने पर स्पष्ट होता है कि वे केवल एक संगठन के संस्थापक ही नहीं थे, बल्कि देशभक्ति, अनुशासन और समाजसेवा जैसे मूल्यों को अपने जीवन में पूरी निष्ठा से अपनाने वाले महान व्यक्तित्व थे।

ब्रिटिश शासन के दौर में जब देश सामाजिक और मानसिक रूप से कमजोर हो रहा था, तब उन्होंने महसूस किया कि हिंदू समाज में एकता, शक्ति और आत्मसम्मान की अत्यंत आवश्यकता है। इसी विचार के परिणामस्वरूप उन्होंने वर्ष 1925 में नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। एक छोटे से प्रयास के रूप में प्रारंभ हुआ यह आंदोलन समय के साथ विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में से एक बन गया, जो डॉ. हेडगेवार की दूरदर्शिता का प्रमाण है।

सत्ता नहीं, अनुशासन और नैतिकता था उनका मुख्य लक्ष्य

डॉ. हेडगेवार के विचारों का मूल तत्व था- व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण। उनके लिए राजनीतिक सत्ता प्राप्त करना मुख्य उद्देश्य नहीं था, बल्कि समाज में अनुशासन, नैतिकता और राष्ट्रभक्ति का विकास करना ही उनका प्रमुख लक्ष्य था। यही कारण है कि संघ की गतिविधियाँ शाखाओं के माध्यम से व्यक्तित्व विकास, सेवा कार्यों और समाज में एकता स्थापित करने जैसे उद्देश्यों पर केंद्रित रहीं।

आज जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विकास को देखा जाता है, तो यह केवल एक संगठन भर नहीं रह गया है, बल्कि एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है। देश और विदेशों में हजारों शाखाएँ, लाखों स्वयंसेवक और असंख्य सेवा कार्य इस संगठन की व्यापकता को दर्शाते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्राम विकास, वनवासी कल्याण जैसे अनेक क्षेत्रों में संघ प्रेरित संस्थाएँ कार्य कर रही हैं। प्राकृतिक आपदाओं के समय सेवा कार्यों में स्वयंसेवकों की अग्रणी भूमिका अक्सर देखने को मिलती है।

वर्तमान समय में जब संघ अपनी शताब्दी की ओर अग्रसर है, तब उसका प्रभाव भारत के सामाजिक, संस्कृति और सार्वजनिक जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। देश में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में संघ की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। अनुशासन पर आधारित स्वयंसेवी सेवा व्यवस्था का निर्माण इस संगठन की विशिष्ट पहचान है। उगादी पर्व का संदेश भी कुछ इसी प्रकार का है। उगादी का अर्थ है-नई शुरुआत, नया संकल्प। इस दिन उगादी पचड़ी खाने की परंपरा यह बताती है कि जीवन में मिठास और कड़वाहट दोनों का समावेश होता है। उसी प्रकार समाज के विकास में भी चुनौतियाँ, संघर्ष और सफलताएँ सभी आवश्यक होती हैं।

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जयंती पर उनके विचारों से समाज निर्माण की प्रेरणा

ऐसे में उगादी के दिन जन्मे डॉ. हेडगेवार का जीवन स्वयं एक प्रेरक संदेश बन जाता है। उन्होंने जो मार्ग दिखाया, वह अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभक्ति जैसे मूल्यों पर आधारित था। डॉ. हेडगेवार की जयंती के अवसर पर उनके विचारों का स्मरण करना केवल एक महान व्यक्ति को श्रद्धांजलि देना भर नहीं है, बल्कि यह भी समझना है कि समाज निर्माण में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है। उनके द्वारा स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आज लाखों लोगों के लिए सेवा और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। समाज में एकता, संस्कृति की रक्षा और राष्ट्रीय चेतना के प्रसार में इस संगठन ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

पगुडाकुला बालस्वामी
धर्माचार्य प्रमुख
(विश्व हिंदू परिषद, तेलंगाना)
पगुडाकुला बालस्वामी
धर्माचार्य प्रमुख
(विश्व हिंदू परिषद, तेलंगाना)

उगादी का पर्व हमें नई आशाएँ और नए लक्ष्य देता है। उसी दिन जन्मे डॉ. हेडगेवार की स्मृति राष्ट्र सेवा को समर्पित जीवन की प्रेरणा देती है। जब ये दोनों अवसर एक साथ आते हैं, तब यह केवल एक पर्व या जयंती नहीं रह जाता, बल्कि भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना और समाजसेवा इन तीनों मूल्यों का समन्वय बन जाता है। इसीलिए उगादी के दिन डॉ. हेडगेवार की जयंती को स्मरण करना नए वर्ष की शुरुआत सेवा और समर्पण के संकल्प के साथ करने का प्रतीक है। शताब्दी की ओर बढ़ रही संघ की यात्रा भी इसी संदेश को प्रकट करती है-यदि व्यक्ति बदलता है तो समाज बदलता है, और समाज बदलता है तो राष्ट्र मजबूत बनता है। इस उगादी के अवसर पर डॉ. हेडगेवार के विचारों को स्मरण करते हुए समाज निर्माण में प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्य का संकल्प ले, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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