ज्योतिष शास्त्र में शरीर पर बना बर्थमार्क यानी जन्म-चिह्न को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। बच्चे के जन्म के साथ ही उसके शरीर पर ये निशान बने होते हैं। इन जन्म चिह्नों को पिछले जन्म के कर्मों से जोड़कर भी देखा जाता है। समुद्र-शास्र के अनुसार, शरीर के ये निशान पिछले जन्म के साथ-साथ इस जन्म में भी व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव छोड़ते हैं। कुछ जन्म-चिह्न शुभ और सौभाग्य का प्रतीक माने जाते हैं तो कुछ आने वाले संघर्ष की ओर इशारा करते हैं। यहाँ जानते हैं, शरीर पर बने बर्थमार्क का पिछले जन्म से क्या संबंध है।
चेहरे पर बर्थमार्क
व्यक्ति के चेहरे पर बर्थमार्क को पिछले जन्म के मानसिक संघर्षों से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि ऐसे लोग पूर्व जन्म में किसी महत्वपूर्ण पद पर होते हैं। इस जन्म में भी उनमें नेतृत्व क्षमता, तेज बुद्धि और निर्णय लेने की शक्ति अधिक होती है। ये लोग अहंकार और जल्दबाजी में फैसले लेने वाले होते हैं।
पीठ पर बर्थमार्क
पीठ पर बर्थमार्क होने का मतलब है कि व्यक्ति अभी भी पिछले जन्म के बोझ ढो रहा है। यह किसी अधूरे कार्य या विश्वासघात का संकेत माना जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, ऐसे लोग मजबूत व्यक्तित्व के होते हैं।
पैर या तलवों पर बर्थमार्क
पैरों या तलवों पर बर्थमार्क को यात्रा से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि ऐसे लोग पिछले जन्म में यात्राओं से जुड़े रहे हैं। इस जन्म में इन लोगों को घूमना-फिरना, नए अनुभव लेना और बदलाव पसंद होता है। कई बार ये लोग अपने जन्म-स्थान से दूर जाकर रहते हैं।
हाथों पर बर्थमार्क
हाथों पर बने जन्म चिह्न को कर्मयोग से जोड़ा जाता है। ऐसे लोग पूर्व जन्म में मेहनती और कर्मशील होते हैं। इस जन्म में भी इन्हें अपने परिश्रम के बल पर सफलता मिलती है। ये लोग अपने कार्यों से पहचान बनाते हैं।
गर्दन या कंधे पर बर्थमार्क
गर्दन या कंधे पर बर्थमार्क का मतलब पिछले जन्म की जिम्मेदारियों से है। माना जाता है कि व्यक्ति पूर्व जन्म में जिम्मेदारियों के बोझ तले रहा है। इस जन्म में भी ऐसे लोग परिवार और समाज की जिम्मेदारियां जल्दी अपने ऊपर ले लेते हैं। ऐसे लोगों को भरोसेमंद माना जाता है।
