शनि-मंगल की युति विश्व में मचेगी हलचल

कल शनिदेव मीन राशि में गोचर कर रहे हैं, जिसमें मंगल के साथ उनकी युति होगी। शनिदेव और मंगल देव की युति कल से 11 मई तक रहेगी। इन दोनों को उग्र ग्रह माना गया है। ऐसे में इन दोनों की युति को अमेरिका और ईरान युद्ध के लिए अच्छा नहीं माना जा रहा है। यहाँ शनि और मंगल की युति से भारत सहित दुनिया के विभिन्न देशों पर प्रभाव की जानकारी दे रहे हैं, सचिन मल्होत्रा।

युद्ध के कारक ग्रह मंगल एक राशि में 45 दिनों तक गोचर करते हैं। 17 फरवरी को कुंभ राशि में लगे सूर्य ग्रहण के बाद मंगल ने 23 फरवरी को इस राशि में प्रवेश किया। उसके बाद से वैश्विक राजनीति तेज़ी से बदली। मंगल के ग्रहण की राशि कुंभ में राहु और सूर्य से युति के तुरंत बाद 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर बड़ा हमला किया, जिसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सहित 40 बड़े सैन्य अधिकारियों और नेता मारे गए।

अपने ऊपर थोपे गए इस युद्ध का जवाब ईरान ने भी बड़ी प्रतिबद्धता के साथ दिया और अमेरिका-इजराइल सहित उसके खाड़ी देशों के सहयोगियों को बड़ा नुकसान पहुंचाया। अभी हाल ही में 29 मार्च को अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों और ईरान युद्ध के विरोध में कई शहरों में बड़े जनांदोलन किए गए।

शनि-मंगल का प्रभाव

मेदिनी ज्योतिष के ग्रंथ भविष्यफल भास्कर और वर्ष प्रबोध के अनुसार मंगल की शनि से युति महंगाई बढ़ाने वाली होती है।
शनि-मंगल की अशुभ युति का प्रभाव अमेरिका की स्थापना कुंडली (4 जुलाई, 1976 की सुबह 10 बजकर 20 मिनट, फिलेडेल्फिया) के आधार पर पहले अमेरिका अपनी सेना ईरान के प्रभाव वाले होर्मुज जलडमरूमध्य में आने वाले कुछ द्वीपों पर उतार सकता है, जिसके कारण युद्ध के तेज होने की आशंका बन रही है।

1 जून को गोचर में गुरु के आने से पहले इस युद्ध के पूरी तरह रुकने की संभावना बेहद कम है। आजाद भारत की स्थापना कुंडली (15 अगस्त, 1947 की मध्य रात्रि, दिल्ली) के आधार पर मंगल धन स्थान में अपनी शत्रु राशि मिथुन में बैठे हैं और राहु लग्न में विरजमान हैं। अब अष्टम (स्कैंडल) और एकादश (लाभ) स्थान के स्वामी गुरु का प्रत्यंतर 4 अप्रैल से 25 मई तक भारत में राजनीतिक उठा-पठक, स्कैंडल, महंगाई, बेरोजगारी बढ़ने से पेंद्र सरकार को बड़ी समस्या दे सकता है।

संयुक्त अरब अमीरात की स्थिति

खाड़ी देशों में अमेरिका के प्रमुख सहयोगी संयुक्त अरब अमीरात, जिसका प्रमुख शहर दुबई है, को ईरान के बड़े ड्रोन और मिसाइल हमलों से काफी नुकसान हुआ है। संयुक्त अरब अमीरात का ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य में आने वाले कुछ द्वीपों पर कब्ज़े को लेकर बड़ा विवाद रहा है। संयुक्त अरब अमीरात की स्थापना कुंडली (2 दिसंबर 1971 दोपहर, 12 बजे दुबई) कुंभ लग्न की है।

यह भी पढ़े : भगवान शंकर को अति-प्रिय है

कुंभ लग्न की इस कुंडली में लग्न में मंगल, चतुर्थ (राष्ट्रीय सम्पति) में शनि और चन्द्रमा, और दशम (राज सत्ता) में सूर्य और गुरु विराजमान हैं, जो परस्पर पेंद्र में होने से एक बड़ा कारक योग बनाकर संयुक्त अरब अमीरात को खाड़ी देशों में समफद्ध राष्ट्र बनाते हैं। शनि में पा में राहु की कठिन दशा संयुक्त अरब अमीरात की स्थापना कुंडली में 8 अप्रैल से शुरू होगी। राहु हानि के द्वादश भाव में होकर संयुक्त अरब अमीरात को युद्ध में कुछ बड़ा नुकसान होता दिखा रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात में लाखों की संख्या में रह रहे भारतीय इस युद्ध के बढ़ने से बड़ी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button