कैग रिपोर्ट ने उजागर की ओयू की चुनौतियाँ तथा खामियाँ
हैदराबाद, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार कभी शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए विशेष पहचान रखने वाला उस्मानिया विश्वविद्यालय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इनके कारण वर्ष 2017 में जो उस्मानिया विश्वविद्यालय समग्र राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग में 38वें स्थान पर था, वह 2023 तक 64वें स्थान पर पहुँच गया। विश्वविद्यालयों की समग्र श्रेणी में इसकी रैंक 23 से गिरकर 36 हो गई।
कैग की हालिया रिपोर्ट में विश्वविद्यालय प्रबंधन की खामियों को उजागर करते हुए कहा गया कि किसी भी संस्थान की सफलता के लिए प्रभावी योजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। 2018 में विजन और रणनीति दस्तावेज तैयार करने के बावजूद उस्मानिया विश्वविद्यालय ने कोई ठोस योजना विकसित नहीं की। इसके फलस्वरूप जनवरी 2023 तक संस्थागत लक्ष्य पूरे नहीं हो पाए। विजन के लक्ष्यों में अगले पाँच वर्षों में विदेशी छात्रों का प्रतिशत 30 प्रतिशत तक बढ़ाना था, जो पूरा नहीं हुआ। इसके चलते विदेशी छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट आई। विश्वविद्यालय अभी भी राज्य की निधि पर अत्यधिक निर्भर है। वह स्वयं के राजस्व सृजन में चुनौतियों का सामना कर रहा है।
कैग रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय की नीति-निर्माण और नियामक निकायों के कामकाज से संबंधित मुद्दे भी चुनौती बने रहे। इनमें अकादमिक सीनेट और कॉलेज विकास परिषद द्वारा आवश्यक बैठकों का आयोजन न होना, अपर्याप्त प्रतिनिधित्व, वित्त समिति के गठन में देरी तथा तीन धाराओं के लिए अध्ययन संकाय का गठन न होने के साथ 36 विभागों के लिए अध्ययन बोर्ड का नवीनीकरण न होना शामिल रहा। इन मुद्दों के कारण 43 अकादमिक विभागों के पाठ्यक्रम में संशोधन न होना, नए संस्थानों या विभागों की स्थापना न होना और विश्वविद्यालय के अधीन राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त न होने वाले कॉलेजों के संचालन जैसे निर्णय लेने की प्रक्रिया बाधित हुई।
गैर-शिक्षण कर्मचारियों की कमी मार्च 2023 में 34 प्रतिशत तक
उच्च शिक्षा में संकाय की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन विश्वविद्यालय संकाय सदस्यों की भारी कमी से जूझा। यह 2017-18 में 26 प्रतिशत से बढ़कर 2021-22 में 38 प्रतिशत (अनुबंधात्मक सहित) हो गई। इसके अलावा गैर-शिक्षण कर्मचारियों की कमी मार्च 2023 में 34 प्रतिशत तक पहुँच गई। इसी कड़ी में 2018-19, 2020-21 तथा 2021-22 में संकाय-छात्र अनुपात भी प्रभावित होते हुए 1:15 से कम रहा।
हालाँकि 2017-18 तथा 2019-20 के दौरान संकाय-छात्र अनुपात अनुकूल रहा। कैग रिपोर्ट में कहा गया कि पंजीकृत छात्रों के लिए शैक्षणिक वर्ष 2017-18 से 2020-21 के बीच प्लेसमेंट दर में 26 प्रतिशत से 54 प्रतिशत तक का उतार-चढ़ाव भी चिंता का विषय है। विश्वविद्यालय के 18 कॉलेजों में से सात में कँरियर और परामर्श प्रकोष्ठों का गठन नहीं किया गया। विश्वविद्यालय की भौतिक अवसंरचना ने भी कई प्रकार की समस्याओं का सामना किया। इसके अलावा विश्वविद्यालय किराये का भुगतान प्राप्त करने में असमर्थ रहा, जिसके परिणामस्वरूप राजस्व का नुकसान हुआ।
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विश्वविद्यालय को अनुसंधान के संबंध में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिनमें अनुदान की शर्तों का अनुपालन न होना, शोधार्थियों द्वारा अनुसंधान परियोजनाओं को पूरा करने में भारी देरी करना तथा विश्वविद्यालय के संकाय और छात्रों दोनों द्वारा भुगतान प्राप्त न कर पाना शामिल है। विश्वविद्यालय सरकारी अनुदानों का समय पर उपयोग और स्वीकृत कार्यों को पूरा करने में भी असमर्थ रहा। विश्वविद्यालय के खोए हुए गौरव को पुनर्स्थापित करने हेतु तत्काल सुधारों और सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल देने वाली रिपोर्ट में कहा गया कि उक्त सभी मुद्दों के कारण विश्वविद्यालय की समग्र राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग में तथा समग्र रैंकिंग में गिरावट आई।
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