प्रथम दादा गुरुदेव जिनदत्त सूरीजी की स्मृति में चादर महोत्सव 6 से

हैदराबाद, कारवान, दादावाड़ी में आयोजित होने वाले वर्ष 2026 के चातुर्मास की घोषणा 8 मार्च को जैसलमेर में की जाएगी।
यहाँ प्रदीप सुराणा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 6 से 8 मार्च तक जैसलमेर, राजस्थान में खरतरगच्छाधिपति आचार्य जिन मणिप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. एवं स्वप्न द्रष्टा ब्रह्मासर तीर्थ उद्धारक जिन मनोज्ञ सूरीजी म.सा. एवं अन्य साधु-साध्वी भगवंतों के सान्निध्य में भव्य चादर महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।

महोत्सव के तीसरे दिन 8 मार्च को कारवान स्थित दादावाड़ी में वर्ष 2026 के चातुर्मास के लिए जिन मणिप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. द्वारा घोषणा की जाएगी। दादावाड़ी संघ के अध्यक्ष प्रशांत श्रीमाल एवं चातुर्मास के प्रधान सहयोगी कुशल कांकरिया ने गुरु भक्तों से अधिकाधिक संख्या में जैसलमेर पहुँचकर चादर महोत्सव एवं चातुर्मास की घोषणा के ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि यह केवल उत्सव नहीं है, बल्कि आस्था, इतिहास, चमत्कार और आत्मिक उत्थान का अनुपम संगम है।

विज्ञप्ति के अनुसार, भगवान महावीर स्वामी की विशुद्ध धर्म-परंपरा को जीवित रखने वाले महान अमृत-पुरुषों में शामिल प्रथम दादा गुरुदेव आचार्य जिनदत्त सूरीजी को चादर महोत्सव समर्पित है। विक्रम संवत 1132 में धोलका नगरी में जन्मे बालक सोमचन्द्र (जिनदत्त सूरीजी) ने अल्पायु में ही तप, त्याग और ज्ञान के बल पर जैन धर्म तथा खरतरगच्छ परंपरा को नई दिशा दी। उनकी साधना, करुणा और आध्यात्मिक शक्ति आज भी समाज को प्रेरणा देती है।

गुरुदेव ने जीवन पर्यन्त अपने अद्भुत योगबल, तपोबल और ज्ञानबल से जिन शासन की निरंतर उन्नति की। उन्होंने समाज में धर्म की शुद्धता, अनुशासन और आस्था को सुदृढ़ करते हुए असंख्य लोगों को संयम और सदाचार का मार्ग दिखाया। अपने अंतिम समय का आभास होने पर उन्होंने पूर्ण शांति और जागरूकता के साथ अनशन व्रत धारण किया। सभी जीवों से विनम्रतापूर्वक क्षमा याचना कर वे आत्म-रमणता में लीन हो गए।

79 वर्ष की आयु में अजमेर में प्रथम दादा गुरुदेव का देवलोक गमन

79 वर्ष की आयु पूर्ण कर विक्रम संवत 1211, आषाढ़ सुदी 11 को अजमेर में उन्होंने देवलोक गमन किया। उनके अंतिम संस्कार के समय एक अद्भुत और अलौकिक चमत्कार हुआ। अग्नि की प्रचंड ज्वाला में भी उनकी चादर, चोलपट्टा और मुहपति अक्षुण्ण रहे। यह दिव्य घटना आज भी समाज की अटूट आस्था, श्रद्धा और विश्वास का आधार बनी हुई है। प्रथम दादा गुरुदेव आचार्य जिनदत्त सूरीजी अपनी दिव्य साधना और करुणा की अमिट छाप छोड़कर देवलोक सिधारे, परन्तु उनकी कृपा और प्रेरणा आज भी अनगिनत श्रद्धालुओं के जीवन को आलोकित कर रही है।

इतिहास साक्षी है कि जब जैसलमेर में महामारी का भीषण संकट आया, तब इन पवित्र चादर, चोलपट्टा और मुहपति को लाया गया। इससे समस्त नगर को इस संकट से मुक्ति मिली। यह घटना दादा गुरुदेव की करुणा और कृपा का अद्भुत उदाहरण है। इसी दिव्य स्मृति को जीवंत करते हुए 6 से 8 मार्च तक जैसलमेर में ऐतिहासिक चादर महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस पावन अवसर पर युगदिवाकर खत्तरगच्छाधिपति आचार्य जिन मणिप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. एवं स्वप्न-दृष्टा ब्रह्मसर तीर्थ उद्धारक जिनमनोज्ञसूरीजी म.सा. सहित अनेक साधु-साध्वी भगवंतों की पावन निश्रा प्राप्त होगी।

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इस महोत्सव के अंतर्गत दादा गुरुदेव के पावन चादर, चोलपट्टा और मुहपति को पूरे जैसलमेर नगर में आम जनता के दर्शनार्थ भव्य शोभायात्रा के रूप में विराजमान कर नगर-परिक्रमा कराई जाएगी। इस अवसर पर देश-विदेश से हजारों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है। उनके ठहरने एवं भोजन की सुव्यवस्थित व्यवस्था अग्रिम रजिस्ट्रेशन के माध्यम से की जा रही है। सम्पूर्ण आयोजन और व्यवस्थाएँ चादर महोत्सव समिति द्वारा अत्यंत सुनियोजित, अनुशासित और सेवा-भाव से संचालित की जा रही हैं।

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