इब्राहिमपट्टनम म्युनिसिपल चुनाव को अदालत ने दी अनुमति
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने रंगारेड्डी ज़िला, इब्राहिमपट्टनम म्युनिसिपल चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के चुनाव को अनुमति देते हुए इसके पूर्व जारी स्थगनादेश को रद्द कर दिया। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने म्युनिसिपालिटी के 19वें वार्ड के काउंसलर आकुला यादगिरी को स्वैच्छिक रूप से घूमने-फिरने के लिए सुरक्षा उपलब्ध करवाने के पुलिस को आदेश दिए। यादगिरी को उसका सेलफोन और चुनाव प्रमाण-पत्र उपलब्ध करवाने के लिए कार्रवाई करने के भी आदेश दिए।
गौरतलब है कि काउंसलर चुने जाने के बाद यादगिरी के लापता होने का हवाला देते हुए पुलिस में शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई न होने पर यादगिरी के लड़के हरिकांत ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इस याचिका पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य और जस्टिस गाड़ी प्रवीण कुमार की खण्डपीठ ने आज सुनवाई की। अदालत के पूर्व आदेश पर पुलिस ने आज यादगिरी को अदालत में पेश किया।
यादगिरी ने आरोप लगाया कि भारास नेता व पूर्व विधायक मंचीरेड्डी किशन रेड्डी के पुत्र प्रशांत कुमार रेड्डी उसे और कुछ अन्य काउंसलरों को जबरन बापट्ला ज़िला चीराला आंध्र-प्रदेश कार में ले गए। उन्होंने बताया कि उनके पुत्र के चीराला पहुँचने पर उससे मुलाकात करने का भी मौका नहीं दिया गया और सभी को बाउंसरों ने अपनी हिरासत में रखा था। दो दिन पूर्व उन्हें बेंगलुरू भेजा गया। उन्होंने जब चेयरमैन बनने का अवसर देने का आग्रह किया, तब किशन रेड्डी ने इनकार कर दिया। यादगिरी ने अदालत को बताया कि उन्हें पूर्व विधायक से जान का खतरा है।
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भारतीय राष्ट्र समिति नेता पर लगाए आरोपों को बताया नाटक
सुनवाई के दौरान किशन रेड्डी की ओर से अधिवक्ता टीवी. रमणा राव ने दलील देते हुए बताया कि यह सब घटनाक्रम यादगिरी द्वारा रचा गया नाटक है। उन्होंने बताया कि अदालत में याचिका दायर करने से पहले यादगिरी चुनाव में भाग ले चुके थे। म्युनिसिपल चेयरमैन बनने का अवसर न देने के कारण ही यादगिरी भारास नेता व पूर्व विधायक और उनके पुत्र पर आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मंगलवार को चार घंटे से अधिक समय तक यादगिरी कांग्रेस नेताओं के साथ पुलिस के पास थे। इसके बावजूद भी वे भारास के पूर्व विधायक और उनके पुत्र पर अपहरण करने का खुलासा नहीं किया। उन्होंने कहा कि यादगिरी नाटक कर रहे हैं।
भारास को 15 काउंसलरों का समर्थन प्राप्त है और म्युनिसिपालिटी में सत्ता हासिल करने के लिए मैजिक फिगर 13 की आवश्यकता है। इसीलिए किसी भी रूप में भारास को सत्ता हासिल करने के लिए यादगिरी के वोट की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश के चलते म्युनिसिपल चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के चुनाव परिणामों की घोषणा नहीं की गई। इस दौरान अदालत द्वारा नियुक्त किए गए अमिकस क्यूरी रामकृष्णा रेड्डी ने यादगिरी के बयान को रिकॉर्ड कर इसे अदालत में पेश किया। दलील सुनने के बाद खण्डपीठ ने दायर एबीएस कार्पस याचिका पर सुनवाई पूर्ण करने की घोषणा की और इसके पूर्व चुनाव स्थगित करने के लिए जारी अंतरिम आदेश को रद्द किया और चुनाव के लिए अनुमति जारी की।
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