सीएसआरआर-एनजीआरआई में पाँच-दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण आरंभ

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हैदराबाद, सीएसआईआर-नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएसआईआर-एनजीआरआई) के निदेशक प्रकाश कुमार के नेतृत्व में कंट्रोल्ड सोर्स सिस्मिक तकनीकों और गैस हाइड्रेट एक्सप्लोरेशन पर पाँच दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया। यह पहल वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की कौशल विकास पहल के तहत विकसित भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप आयोजित की जा रही है।

यहाँ उद्घाटन सत्र के दौरान, सीएसआईआर-एनजीआरआई की स्किल्ड इंडिया इनिशिएटिव के प्रमुख व वैज्ञानिक-जी अभय राम बंसल ने युवा वैज्ञानिकों के बीच क्षमता निर्माण के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम अकादमिक शिक्षा और वास्तविक दुनिया के भूभौतिकीय अनुप्रयोगों के बीच की खाई को पाटने में मदद करते हैं, साथ ही विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप भारत के वैज्ञानिक कार्यबल को भी मज़बूत बनाते हैं।

कार्यक्रम में भूभौतिकीविद् व जेसी बोस फेलो कलाचंद सैन ने विशेष व्याख्यान में ज़मीन के नीचे की फॉल्ट (दरारों) व गैस-युक्त संरचनाओं की इमेजिंग व समुद्र तल के नीचे गैस हाइड्रेट भंडारों का पता लगाने तथा उनकी विशेषताओं को समझने में उन्नत सिस्मिक तकनीकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने भविष्य के ऊर्जा संसाधन के रूप में गैस हाइड्रेट्स क्षमता के बारे में बात की और सिस्मिक एक्सप्लोरेशन में हाल के घटनाक्रमों पर चर्चा की, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व मशीन लर्निंग तकनीकों का बढ़ता उपयोग शामिल है।

पाँच दिवसीय कार्यक्रम के दौरान, प्रतिभागियों को आधुनिक भूभौतिकीय अन्वेषण विधियों की सैद्धांतिक समझ और व्यावहारिक अनुभव दोनों प्राप्त होंगे, जिसमें सिस्मिक डेटा अधिग्रहण, प्रसंस्करण तथा व्याख्या शामिल है। इस प्रशिक्षण में गैस हाइड्रेट निर्माण के लिए ज़िम्मेदार भूवैज्ञानिक और भूभौतिकीय स्थितियों को शामिल किया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों को व्यापक शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने के लिए हर शाम विशेष योग सत्र आयोजित किया गया है।

योग सत्र में प्रतिभागियों को किया प्रेरित

प्रकाश कुमार ने शाम के योग सत्र में भाग लिया और सभी प्रतिभागियों, साथ ही संस्थान के कर्मचारियों को, समग्र कल्याण के लिए योग करने के इस अवसर का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन की धारणा पर ज़ोर देते हुए, उन्होंने बताया कि ऐसी पद्धतियाँ न केवल अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करती हैं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शोध में योगदान देती हैं।

कार्यक्रम में समन्वय वैज्ञानिक-ई शिब शंकर गांगुली एवं वैज्ञानिक-ई नारा दामोदर सह-समन्वयक के रूप में कार्य किया। विशेषज्ञों के व्याख्यानों, तकनीकी चर्चाओं और इंटरैक्टिव सत्रों के माध्यम से इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भविष्य की अपार संभावनाओं वाला उभरता गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत है।

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आयोजित कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से युवा शोधकर्ताओं, विद्वानों और अपने कॅरियर की शुरुआत कर रहे पेशेवरों ने भाग लिया है। इसे प्रतिभागियों को सिस्मिक एक्सप्लोरेशन तकनीकों और गैस हाइड्रेट संसाधन मूल्यांकन के उभरते क्षेत्र के बारे में उन्नत ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

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