डिजिटल इंडिया : अधिकार, सुरक्षा और सजा का पूरा सच

आज भारत ऑनलाइन पेमेंट के मामले में दुनिया में नंबर एक देश है और सिर्फ यूपीआई पेमेंट ही नहीं, ऑनलाइन बैंकिंग, सोशल मीडिया, डिजिटल पहचान और ई-गवर्नेंस के मामले में भी भारत ने दुनिया के सामने तेजी से विकास का एक मानदंड तय किया है। लेकिन हमारे यहां जितनी तेजी से ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा बढ़ी है, उतनी ही तेजी से साइबर अपराध भी बढ़े हैं। ऐसे में सवाल है, क्या हम इस बात को जानते हैं कि इस डिजिटल दौर में आम लोगों के आखिर डिजिटल अधिकार क्या हैं? आइये विस्तार से इस पहलू पर नजर डालते हैं।

पहली सुरक्षा परत

डिजिटल अधिकार मुख्यत सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम-2000 (आईटी एक्ट), भारतीय न्याय संहिता-2023 (बीएनएस) और हालिया डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट-2023 (डीपीडीपी एक्ट) में सुरक्षित होते हैं। सवाल है इनके आखिर मायने क्या हैं? सबसे हालिया अधिकार यानी डीपीडीपी एक्ट 2023 पर बात कर लेते हैं। यह कानून हमें अपनी व्यक्तिगत जानकारियों, जैसे- मोबाइल नंबर, आधार नंबर और बैंक डिटेल की बिना हमारे सहमति के किसी भी संस्था या संगठन को इस्तेमाल की अनुमति नहीं देता। हमारा डेटा लेने वाली कंपनी स्वयं उसे सुरक्षित यूज कर सकती है, पर उसे आगे किसी और के साथ साझा नहीं कर सकती। ऐसा करने पर उसे 250 करोड़ रुपये तक जुर्माना लग सकता है।

साथ ही हमें विभिन्न तरह के साइबर अपराधों से भी कानूनी संरक्षण हासिल है। डिजिटल अपराधों पर कानून अब पहले से कहीं ज्यादा सख्त हैं, यह अलग बात है कि अभी अपराधी इस सबसे डर नहीं रहे हैं। मसलन, किसी के कंप्यूटर सिस्टम में बिना इजाजत अनाधिकृत प्रवेश और उसका डेटा चुराना या इसकी कोशिश करना दोनों ही गतिविधियां कानूनन अपराध है। डेटा चुराने की तीन साल तक की जेल की सजा है और 5 लाख रुपये या इससे ज्यादा जुर्माना लगाया जा सकता है।

किसी का पासवर्ड,ओटीपी या डिजिटल सिग्नेचर चुराना आईटी एक्ट की धारा 66सी के तहत पहचान की चोरी है। इसके लिए 3 साल तक की जेल तथा 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसी तरह फर्जी कॉल, यूपीआई फ्रॉड और केवाईसी स्कैम जैसी धोखाधड़ी के लिए आईटी एक्ट धारा 66डी है, जिसके तहत दोषी को 3 साल की सजा और 1 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।

सोशल मीडिया और अपराध

सोशल मीडिया पर अश्लील फोटो और अश्लील वीडियो शेयर करने पर आईटी एक्ट की धारा 67 (अश्लील सामग्री का प्रसार) के तहत 3 साल जेल की सजा के साथ-साथ 5 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा है और दोबारा पकड़े जाने पर 5 साल की जेल की सजा और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। जबकि भारतीय न्याय संहित 2023 की धारा 318 (धोखाधड़ी) के तहत ऑनलाइन ठगी व फर्जी वेबसाइट के जरिये पैसा उगाहने पर 7 साल की सजा और जुर्माना दोनों हो सकते हैं। ऑनलाइन स्टॉकिंग जैसे अपराध के लिए बीएनएस की धारा 354डी के तहत 3 से 5 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। ऑनलाइन स्टॉकिंग के चलते किसी को बार-बार मैसेज करना और उसका पीछा करना जैसे अपराध भी आते हैं।

सोशल मीडिया : हमारे अधिकार और जिम्मेदारी

इंटरनेट में फेक न्यूज फैलाना, किसी की छवि खराब करना अथवा धार्मिक या सामाजिक तनाव पैदा करने वाली पोस्ट डालता एक दंडनीय अपराध है। कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 के तहत खासकर अपने ठगे जाने की या अपने अधिकारों से वंचित किए जाने पर कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 के तहत शिकायत की जा सकती है और यह शिकायत ई-कॉमर्स कंपनियों को आपको रिफंड देने या खरीदे गये सामान को बदलने के लिए बाध्य कर देगी। इसके लिए उपभोक्ता consumerhelpline.gov.in या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। हेल्पलाइन 1930 पर फोन कर सकते हैं। नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में एफआईआर भी लिखाएं। इस तरह डिजिटल इंडिया के चलते मिली सुविधाओं के साथ ही जिम्मेदारी भी है कि हम इनके लिए मौजूदा कानूनों का इस्तेमाल करें और अपने अधिकारों तथा कर्तव्यों को समझें। इन कानूनों से अंजान रहना अब एक जोखिम है।

डिजिटल सुरक्षा के सात जरूरी नियम

  • कभी भी ओटीपी, पिन या पासवर्ड किसी के साथ शेयर न करें।
  • कोई अंजान लिंक या एपीके फाइल डाउनलोड न करें।
  • बैंक या केवाईसी के नाम पर आने वाली फर्जी कॉल से सावधान रहें।
  • सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा न करें। करें तो उसे बहुत सीमित रखें।
  • कोई ऐप इंस्टॉल करते समय ध्यान से निर्देशों को पढ़ते हुए सिर्फ उतनी ही जानकारी दें, जिनके बिना काम न चलता हो।
  • पासवर्ड हमेशा मजबूत बनाएं और दो फैक्टर अथॉरिटी एप्लीकेशन का इस्तेमाल करें।
  • अगर जरा भी लगे कि आपके साथ कोई धोखाधड़ी हो गई है, तो बिना समय गंवाए 1930 पर फोन करें।

प्रभाकांत कश्यप

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