राजस्थानी समाज के विभिन्न घटकों में वैवाहिक संबंधों को लेकर हुई चर्चा

हैदराबाद, राजस्थानी समाज में युवक-युवतियों के विवाह में देरी, सही मैच न मिलने, युवा पीढ़ी में वैचारिक बदलाव आदि समस्याओं के निदान पर परिचर्चा बैठक का आयोजन किया गया। राजस्थानी समाज के विभिन्न घटकों की पहली बार हुई चर्चा ने एक नई पहल शुरू की है, जिसमें विभिन्न पहलुओं पर पक्ष एवं विपक्ष ने विचार रखे।

पैराडाइज सर्किल स्थित अग्रवाल समाज बैंक्वेट हॉल में आज राजस्थानी स्नातक संघ द्वारा राजस्थानी समाज के विभिन्न घटकों में परस्पर वैवाहिक संबंधों की आवश्यकता पर चिंतन गोष्ठी की गयी, जिसमें समाज के प्रबुद्ध लोगों ने अपने विचारों का मंथन किया। बद्रीविशाल बंसल ने आरजीए को इस महत्वपूर्ण चर्चा पहल के लिए बधाई देते हुए कहा कि बदलाव बहुत ही जरूरी है, क्योंकि आज सभी जगह बदलाव हो रहे हैं। पहले संयुक्त परिवार थे, अब एकल परिवार हैं।

करियर और स्टेटस कारण विवाह में हो रही देरी

समय के साथ परिस्थिति भी बदली है। विभिन्न राजस्थानी समाज के घटकों को इस पर विचार कर वर्तमान में कँरियर के चक्कर या स्टेटस के आधार पर या फिर अन्य कारणों से विवाह देरी से हो रहे हैं, जो उचित नहीं है। पहले लोग संस्कार को महत्व देते थे, लेकिन आज पैसे के पीछे भाग रहे हैं। परिवर्तन आवश्यकता है, इस चेंज को स्वीकार करना चाहिए। जैन समाज के किशोर मुथा ने कहा कि आज केवल जैन समाज ही नहीं, राजस्थान का हर घर वैवाहिक संबंधों की आवश्यकता को लेकर जूझ रहा है।

वर्तमान में दो घटक एक श्रमण वर्ग और दूसरा सनातन वर्ग है। सभी के वैवाहिक कार्यक्रम लगभग एक ही समान हैं, लेकिन जैन धर्म में तप, तपस्या और धार्मिक प्रक्रिया अलग है। भगवान महावीर के सिद्धांत सत्य, अहिंसा, अनेकांतवाद, अपरिग्रह को महत्व देता है। वर्तमान में जब दो परिवार आपसी सहमति से विवाह करना चाह रहे हैं, तो उसे मान्यता देनी चाहिए। वर्तमान में कई उदाहरण हैं, जहाँ अग्रवाल समाज, माहेश्वरी समाज में जहाँ जैन युवक-युवतियों की शादी हुई, उनका जीवन अच्छा चल रहा है, परिवार में कोई परेशानी नहीं है।

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बदलाव को स्वीकार करना समाज के लिए महत्वपूर्ण

केशव शर्मा ने कहा कि बदलाव बहुत ही महत्वपूर्ण है। भविष्य में विजन को देखते हुए राजस्थानी घटकों में विवाह करवाना उचित ही है। जब दो परिवार सहमति देते हैं, तो समाज को स्वीकार करना चाहिए। आज जब व्यापार में बदलाव हो रहे हैं, इसी प्रकार अन्य क्षेत्र में बदलाव उचित है। जब राजस्थानी घटकों में इस प्रकार से वैवाहिक संबंध होते रहेंगे, तो सभी एकजुट होंगे। स्पष्टता से काम होना चाहिए।

सीए कन्हैयालाल राठी ने कहा कि राजस्थान के विभिन्न समाजों के रीति-रिवाज व संस्कार कुछ अलग हैं। इसलिए विवाह न हो तो अच्छा होगा, क्योंकि विवाह के बाद आगे जो पीढ़ी आएगी, उसको अपने मूल का पता ही नहीं चलेगा। इससे सांस्कृतिक मूल्यों और परंपरा पर प्रभाव पड़ेगा। हमारे पूर्वजों ने विवाह को लेकर जो परंपरा बनाई हैं, वह कुछ सोचकर ही बनाई हैं। इसलिए उनका पालन होना चाहिए।

राजस्थान के दूसरे समाज में विवाह से आने वाले पीढ़ी को आगे चलकर तकलीफ होगी, क्योंकि आज हर समाज में जनसंख्या का अनुपात घट रहा है, आपसी रिश्ते भी जोड़ने की समस्या हो रही है। हैदराबाद का व्यक्ति युवक-युवतियों का रिश्ता गाँव में नहीं करना चाहता, वहीं गाँव का व्यक्ति शहर में रिश्ता करना चाहता है। राजस्थान के घटकों के लिए यदि दरवाजे खोल दिये जाएँ, तो अच्छाई की हवा के साथ बुराई की दुर्गंध भी आयेगी। इस पर भी पहले विचार करें। बाद में दोषी समाज को ही ठहराया जाएगा।

समय के साथ विवाह की परंपराओं में आया बदलाव

मीनाक्षी विजयवर्गीय ने कहा कि पूर्व में कन्या का स्वयंवर होता था। वह स्वयं अपना वर चुनती थी, लेकिन वर्तमान में परिस्थिति बदल गई है। संबंध आवश्यकता पर निर्भर हैं। बच्चों में देश भक्ति, गौ भक्ति के साथ संस्कार होने चाहिए। यदि ऐसे परिवार हैं, तो विवाह में बुरी बात नहीं है। इस कार्य के लिए राजस्थानी पोर्टल खोले जाने की आवश्यकता है, ताकि राजस्थानी समाज में संस्कार, सेवा भाव के प्रति जागरूकता लाई जा सके।

अवसर पर द्वारका प्रसाद मायछ ने कहा कि वर्तमान का मुद्दा बहुत ही गंभीर है, जिससे राजस्थानी समाज जूझ रहा है। वर्तमान समय को रोक नहीं सकते। समय के अनुसार आगे बढ़ना ही होगा। वर्तमान में 40-45 वर्ष की उम्र में शादी होने से बच्चे के युवा होने तक माता-पिता रिटायर हो रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि समय रहते कार्य हौं। वरना शादी का जो गोल्डन समय है, वह चला जाएगा।

संतुलन जो बिगड़ रहा है, लेकिन इसके लिए राजस्थानी घटकों के साथ विवाह करने का कदम वर्तमान के हिसाब से सही है। वर्तमान में सोशल मीडिया जो व्यापक तौर पर चल रहा है, उससे बच्चों को कैसे बचायेंगे, इस पर भी विचार जरूरी है। राजस्थानी समाज के संस्कार व तीज त्यौहार लगभग समान हैं। यदि मन से मेल हो जाए, तो फिर रिश्ते करने में कोई आपत्ति नहीं है। इस पर गंभीरता से विचार हो, अन्यथा आगे चलकर अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

समस्या का समाधान समाज को स्वयं ढूँढ़ना होगा

सोहन सिंह राजपुरोहित ने कहा कि विषय काफी गंभीर है, जिस पर आरजीए ने जो पहल करने की हिम्मत की, वह सराहनीय है। वर्तमान में ऐसी जरूरत क्यों आई है, इस पर गहन मंथन करने की आवश्यकता है। समस्या खुद की है और समाधान भी स्वयं को ही ढूँढ़ना होगा। बुद्धिजीवी वर्ग को इस पर चिंतन मनन करना होगा। राजस्थान की 36 कौम है, सभी को साथ लेकर चर्चा कर भविष्य की सोचें।

अविनाश देवड़ा ने कहा कि समय की मर्यादा है, खान-पान, रहन-सहन, रीति-रिवाज एक जैसे हैं। यदि विवाह का योग बने, तो अवश्य किया जा सकता है। परिवारों के बीच पहले संवाद होना चाहिए। परिवार में यदि संवाद नहीं हो रहा है, तो परेशानी हो सकती है। इसलिए संवाद को महत्व देते हुए मंशा को जानें। पूरा राजस्थान समाज संगठित होकर इस संदेश को आगे बढ़ाये। परामर्शदाता नंदगोपाल भट्टड़ ने कहा कि राजस्थान के विभिन्न घटकों ने अपने विचार रखे, जिसमें पक्ष-विपक्ष के विचार सामने आए।

इसलिए यह चर्चा गोष्ठी काफी अच्छी रही। उन्होंने वक्ताओं से विभिन्न प्रश्नों को पूछकर वक्ताओं के विचार जाने। डॉ. मोहन गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में लोग कॅरियर को लेकर और युवक-युवतियाँ द्वारा शिक्षा व नौकरियों के चलते विवाह में देरी हो रही है। इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। आरजीए के अध्यक्ष मनोज गोयल ने सभी का स्वागत करते हुए विषय पर प्रकाश डाला।

65 वर्षों से सक्रिय है राजस्थानी स्नातक संघ

मंत्री अजय अग्रवाल ने कहा कि राजस्थानी स्नातक संघ सबसे पुरानी 65 वर्षों की जीवंत संस्था है, जो नियमों पर चलते हुए कार्य कर रही है। आरजीए शिक्षा न्यास द्वारा हर वर्ष दी जाने वाली छात्रवृत्ति के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र को प्रोत्साहित किया जा रहा है। संस्था के स्थापित पुस्तकालय से कई लोगों को लाभ हुआ। शिक्षा न्यास ने 1000 से अधिक विद्यार्थियों को 1 करोड़ रुपये से अधिक राशि की छात्रवृत्ति प्रदान की।

इसके अलावा संघ मासिक भाषण माला में ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा कर सभी को जागरूक कर रहा है। आनंद मेला के माध्यम से सभी का मनोरंजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को जोड़ने के लिए कई कार्यक्रम किये जा रहे हैं, ताकि वह समाज से जुड़ सकें। राजस्थान के घटकों के साथ वैवाहिक संबंधों की चर्चा कार्यक्रम से संघ ने जागृति लाने का प्रयास किया। कार्यक्रम का संचालन संयोजक एवं सूत्रधार सीए मनोज कुमार अग्रवाल ने किया।

कार्यक्रम में समन्वयकर्ता गोपालदास सारड़ा, समीक्षक सीए मुरली मनोहर पलोड़, श्याम सुन्दर मूंदड़ा, गोविन्द राठी, प्रकाश नारायण राठी, सीए रामदेव भूतड़ा, अशोक कोठारी, संपत दरक, लक्ष्मीनिवास शर्मा, दीपक विजयवर्गीय, आरजीए के पदाधिकारी, सदस्य, अग्रवाल समाज, माहेश्वरी समाज, जैन समाज, राजपुरोहित समाज सहित अन्य के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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