शैक्षिक पहलें बन रही महत्वपूर्ण आर्थिक चालक : प्रो. परीक्षत

हैदराबाद, उस्मानिया विश्वविद्यालय के शैक्षिक मल्टीमीडिया अनुसंधान केंद्र में डिजिटल उच्च शिक्षा पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आरंभ हुआ। उच्च शिक्षा की पुनर्कल्पना : विकसित भारत 2047 की ओर डिजिटल मार्ग शीर्षक से आयोजित सेमिनार भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए एक परिवर्तनकारी डिजिटल रोडमैप तैयार करने हेतु समर्पित अग्रणी शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं के लिए मंच सिद्ध होगा।

जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कंसोर्टियम फॉर एजुकेशनल कम्युनिकेशन, नई दिल्ली तथा ईएमआरसी उस्मानिया विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित सेमिनार 2047 तक ज्ञान-आधारित महाशक्ति के रूप में विकसित होने के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो डिजिटल लर्निंग ईकोसिस्टम, मल्टीमीडिया शिक्षा शास्त्र और डिजिटल शैक्षिक संसाधनों के विस्तार पर केंद्रित है। उद्घाटन कार्यक्रम में उस्मानिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुमार मोलुगरम, ईएमआरसी के निदेशक पी. रघुपाथी, तेलंगाना उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. वी. बालकिस्ता रेड्डी, कंसोर्टियम फॉर एजुकेशनल कम्युनिकेशन के निदेशक प्रो. परीक्षत सिंह मनहास सहित अन्य उपस्थित थे।

प्रो. परीक्षत सिंह मनहास ने कहा कि जैसे-जैसे विदेशी विश्वविद्यालय भारतीय परिदृश्य में प्रवेश कर रहे हैं, हमारी शैक्षिक पहलें महत्वपूर्ण आर्थिक चालक के रूप में विकसित हो रही हैं। घरेलू स्तर पर विश्व स्तरीय वर्चुअल शिक्षा प्रदान कर हम ब्रेन ड्रेन को रोक सकते हैं और विदेशी मुद्रा भंडार को काफी मजबूत कर सकते हैं।

विकसित भारत 2047 की कुंजी व्यापक सहयोग और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग जैसे उभरते कौशल में महारत हासिल करने में निहित है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई द्वारा नौकरियों के छिन जाने के डर के विपरीत, एआई कार्यों की गुणात्मक उपज को मजबूत और बेहतर बनाएगा और हमें अपने कौशल को फिर से प्रशिक्षित और पुनर्परिभाषित करना होगा। प्रो. परीक्षत सिंह मनहास ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का खुलासा करते हुए कहा कि सीईसी ने ग्यारह पूरी तरह से ऑनलाइन डिग्री कार्यक्रमों को अंतिम रूप दे दिया है, जिन्हें विश्वविद्यालय जल्द ही निशुल्क में पेश करेंगे।

प्रो. कुमार मोलुगरम ने विश्वविद्यालयों में तकनीक अपनाने की बात कही

प्रो. कुमार मोलुगरम ने विश्वविद्यालयों से प्रौद्योगिकी को तेजी से अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल शिक्षण पद्धतियों को अपनाना अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था की माँगों को पूरा करने के लिए आवश्यकता है। इससे अंततः संस्थागत उत्कृष्टता और अनुसंधान सहयोग में वृद्धि होगी।

प्रो. वी. बालाकिस्ता रेड्डी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के डिजिटल ढाँचों के साथ रणनीतिक एकीकरण पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि दुनिया द्विध्रुवीय और बहुध्रुवीय संरचनाओं से निकलकर एक तकनीकी-ध्रुवीय वास्तविकता की ओर अग्रसर हो चुकी है। शिक्षा को तकनीकी प्रगति के साथ तालमेल बिठाकर विकसित होना चाहिए। हमारा उद्देश्य उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ और किफायती बनाना है, ताकि हमारे छात्र तेजी से हो रहे डिजिटल बदलावों से भरे भविष्य के लिए तैयार हो सकें।

यह भी पढ़ें… झूठा प्रचार कर रही है तेलंगाना सरकार : बंडी संजय कुमार

पी. रघुपाथी ने इसके पूर्व सम्मेलन में प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लोकतंत्र करण में शैक्षिक मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने स्वयं और स्वयं प्रभा जैसे राष्ट्रीय मंचों में ईएमआरसी के सशक्त योगदान को उजागर किया, जो शहरी-ग्रामीण ज्ञान के अंतर को पाटने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देशभर से शोधकर्ताओं और संकाय सदस्यों की भारी भागीदारी के साथ यह सम्मेलन भारतीय शिक्षा के डिजिटल रूपांतरण के प्रति शैक्षणिक समुदाय की प्रतिबद्धता को रेखांकित करने वाला है।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button