नगर निगम भवन न्यायाधिकरण की स्थापना करें : उच्च न्यायालय
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को जीएचएमसी अधिनियम की धारा 462ए के तहत एक नगर निगम भवन न्यायाधिकरण (बिल्डिंग ट्रिब्यूनल) गठित करने का आदेश दिया और कहा कि न्यायालय न्यायिक सदस्यों की नियुक्ति करने के लिए तैयार है।
न्यायालय का मानना है कि कानून के प्रावधानों के अनुसार, न्यायाधिकरण गठित करने से अदालतों पर मुकदमों का बोझ कम होगा। इसके संबंध में सरकार को कार्य की प्रगति के बारे में भी सूचना देनी होगी। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहियुद्दीन की खण्डपीठ ने यह आदेश जारी कर मामले की सुनवाई 15 अप्रैल तक स्थगित कर दी।
मेडचल मल्काजगिरी ज़िला, उप्पल मंडल के कोत्तापेट में राधेश्याम कंस्ट्रक्शन्स एण्ड डेवलपर्स को दी गई भवन निर्माण की अनुमति रद्द करने का आग्रह करते हुए जे. श्रीनिवास यादव व अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर विगत में एकल सदस्य न्यायाधीश द्वारा खारिज कर दिए जाने के फैसले पर अपील याचिका दायर की गई। अपील याचिका पर सुनवाई के दौरान खण्डपीठ ने अटार्नी जनरल से जीएचएमसी अधिनियम की धारा 462ए के तहत भवन न्यायाधिकरण गठित करने की संभावनाओं के बारे में सरकार को सुझाव देने की बात कही।
धारा 461ए के तहत अनाधिकृत निर्माणों की जाँच और जब्ती का प्रावधान
खण्डपीठ ने याद दिलाया कि अवैध निर्माणों और अनाधिकृत निर्माणों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए महाधिवक्ता सुदर्शन रेड्डी ने कहा कि ट्रिब्यूनल भवन निर्माण अनुमति से संबंधित मामलों का निपटारा नहीं कर सकता है। धारा 452 के तहत इसे अवैध निर्माण को विध्वंस करने और संरचनाओं में परिवर्तन को रद्द करने का अधिकार है और धारा 450 के तहत इसे गलत जानकारी देकर प्राप्त की गई अनुमतियों को रद्द करने का अधिकार है। धारा 461ए के तहत इसने कहा कि यह अनाधिकृत निर्माणों को जब्त करने आदि जैसे मामलों की जाँच करेगा।
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खण्डपीठ ने कहा कि भवन नियमों की धारा 596 और 597 के तहत विवादों के निपटारे के लिए एक ट्रिब्यूनल का गठन आवश्यक है। चूँकि जनवरी-2017 में लाए गए कानून के अनुसार भवन ट्रिब्यूनल का गठन नहीं किया गया, इसीलिए पक्षकार सीधे अदालत की शरण ले रहे हैं। खण्डपीठ ने कहा कि ट्रिब्यूनल में न्यायिक सदस्यों के साथ 8 तकनीकी सदस्य हो सकते हैं। सरकार से प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद न्यायिक सदस्यों की नियुक्ति करने के लिए उच्च न्यायालय तैयार है। याचिका पर प्रतिक्रिया देते हुए खण्डपीठ ने जीएचएमसी को अनुमतियों का विवरण पेश करने का आदेश दिया और सुनवाई स्थगित कर दी।
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