परिवार की प्रथम मार्गदर्शक है मिहला

आज की महिला केवल गृहिणी या प्रोफेशनल नहीं, बल्कि परिवार की प्रथम मार्गदर्शक है। यदि वह स्वयं आत्मविश्वासी और जागरूक होगी, तो वही ऊर्जा बच्चों में भी आएगी। माँ का संतुलित और सकारात्मक दृष्टिकोण ही बच्चों को स्थिरता देता है।

इस महिला दिवस पर प्रस्तुत है हैदराबाद की जानीöमानी कॅरियर काउंसलर और शिक्षाविद् अनुराधा जाजू से विशेष बातचीत। एक विज़िटिंग काउंसलर के रूप में वे विद्यालयों में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करती हैं और वर्षों से युवा मन को समझने का प्रयास कर रही हैं।

आइए जानते हैं, नारी शक्ति और युवा पीढ़ी के संदर्भ में उनके विचार-

प्रश्न: आप एक काउंसलर के रूप में युवाओं के बीच काम करती हैं। आज का युवा इतना दिग्भ्रमित क्यों दिखाई देता है?

उत्तर: आज का युवा जानकारी से भरपूर है, लेकिन दिशा की कमी से जूझ रहा है। सोशल मीडिया और तुलना की संस्कृति ने उनके मन में अस्थिरता बढ़ा दी है। वे सफलता को तुरंत पाना चाहते हैं, जबकि जीवन धैर्य और निरंतर प्रयास मांगता है। परिवार और समाज की अपेक्षाएँ भी उन पर दबाव बनाती हैं। ऐसे में उनका मन भ्रमित हो जाता है। उन्हें सबसे अधिक आवश्यकता है – संवाद, समझ और सही मार्गदर्शन की।

प्रश्न: एक माँ और काउंसलर के रूप में आप इस स्थिति को कैसे देखती हैं?

उत्तर: मेरा मानना है कि बच्चों को केवल कॅरियर की दिशा नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों की शिक्षा भी देनी चाहिए। जब घर में संवाद कम होता है और तुलना अधिक, तब बच्चे स्वयं को असुरक्षित महसूस करते हैं। हमें उन्हें यह विश्वास देना होगा कि असफलता अंत नहीं है। हर बच्चे की अपनी गति और क्षमता होती है, उसे पहचानना और निखारना ही सही परवरिश है।

प्रश्न: आज की महिलाओं की भूमिका आप किस प्रकार देखती हैं, विशेषकर एक माँ के रूप में?

उत्तर: आज की महिला केवल गृहिणी या प्रोफेशनल नहीं, बल्कि परिवार की प्रथम मार्गदर्शक है। यदि वह स्वयं आत्मविश्वासी और जागरूक होगी, तो वही ऊर्जा बच्चों में भी आएगी। माँ का संतुलित और सकारात्मक दृष्टिकोण ही बच्चों को स्थिरता देता है। इसलिए मैं हमेशा कहती हूँ – नारी पहले अपने भीतर के प्रकाश को पहचानें, तभी वह दूसरों के जीवन में प्रकाश फैला सकेगी।

प्रश्न: कॅरियर को लेकर युवाओं में अनिश्चितता बढ़ रही है। आप उन्हें क्या सलाह देती हैं?

उत्तर: मैं उन्हें कहती हूँ कि कॅरियर केवल पैसा कमाने का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी रुचि और कौशल को पहचानने की यात्रा है। स्वयं को समझे बिना कोई भी निर्णय स्थायी नहीं होता। समय निकालकर अपनी रुचियों, क्षमताओं और मूल्यों को समझना चाहिए।

प्रश्न: महिला दिवस पर आपका संदेश?

-अनुराधा जाजू

उत्तर: महिला दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है। हर नारी स्वयं को कमजोर न समझे। अपने भीतर के ज्ञान, धैर्य और करुणा को पहचानें। जब महिला जागरूक और आत्मनिर्भर होगी, तब युवा पीढ़ी भी सही दिशा पाएगी और समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव होगा।

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