बारबाडोस से अहमदाबाद तक : क्रिकेट में भारत के दबदबे की अभूतपूर्व दास्तान

नयी दिल्ली, बारबाडोस में मिली जीत ने जहां बरसों की नाकामी का कलंक मिटाया तो अहमदाबाद में नयी बादशाहत कायम हुई। वाकई क्रिकेट के सबसे छोटे प्रारूप में इस भारतीय टीम को हरा पाना मुश्किल ही नहीं , नामुमकिन सा लगने लगा है।न्यूजीलैंड को फाइनल में 96 रन से हराकर भारतीय टीम ने लगातार दूसरी बार चैम्पियन बनने का रिकॉर्ड ही नहीं बनाया बल्कि ताबड़तोड़ क्रिकेट में भारत की बादशाहत की तस्दीक भी कर दी ।

मैदान पर भारत का प्रदर्शन इस कदर शानदार रहा कि टूर्नामेंट से पहले सुरक्षा कारणों से बांग्लादेश के बाहर होने और भारत के खिलाफ मैच को लेकर पाकिस्तान की बहिष्कार की धमकी को लोग भूल ही गए । भारत तीन टी20 विश्व कप (2007, 2024 और 2026) जीतने और लगातार दो बार खिताब अपने नाम करने वाली पहली टीम बन गई है ।

भारत का क्रिकेट वर्चस्व: प्रतिभाओं की गहराई और टीम की श्रेष्ठता

क्रिकेट की आर्थिक धुरी तो बीसीसीआई पहले ही से है । भारतीय क्रिकेट की प्रतिभा ने मिलकर सत्ता और प्रतिभा का बेहतरीन कॉकटेल बना दिया है । यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि दो दशक पहले शुरू हुए खेल के इस प्रारूप में मौजूदा भारतीय टीम अब तक की सर्वश्रेष्ठ टीम है । भारत का वर्चस्व कुछ उसी तरह का है जैसे 70 या 80 के दशक में वेस्टइंडीज का और मिलेनियम के पहले दशक में आस्ट्रेलिया का हुआ करता था ।

भारत की जीत के अंदाज और अंतर ने इस प्रारूप में टीम की श्रेष्ठता तो साबित की है लेकिन जिन खिलाड़ियों को टीम में जगह बनाने का मौका नहीं मिल सका, उन पर दृष्टिपात करें तो भारतीय क्रिकेट में प्रतिभा की गहराई का पता चलता है । संजू सैमसन, ईशान किशन, जसप्रीत बुमराह, अक्षर पटेल, हार्दिक पंड्या , शिवम दुबे सभी ने जीत में योगदान दिया ।लेकिन यशस्वी जायसवाल, श्रेयस अय्यर, शुभमन गिल जैसे खिलाड़ी जो बाहर रहे, वे दुनिया की किसी भी टीम में जगह पाने के हकदार थे । चौदह वर्ष के वैभव सूर्यवंशी को कैसे भुलाया जा सकता है ।

भारत की जीत के पीछे की रणनीति और अन्य टीमों की चुनौतियाँ

क्रिकेट पंडितों का मानना है कि भारत अपनी ‘ए’ टीम खड़ी करके भी विश्व कप जीत सकता है। भारत की सफलता के पीछे टीम प्रबंधन के साहसिक फैसले , विकेट बचाने की बजाय तेजी से खेलने की रणनीति , मैदान पर उस पर सटीक अमल शामिल है ।दूसरी तरफ एक बार फिर आईसीसी के सफेद गेंद के टूर्नामेंट के नॉकआउट में आसानी से घुटने टेककर लगता है कि न्यूजीलैंड ने ‘चोकर्स’ का ठप्पा दक्षिण अफ्रीका से ले लिया है ।

कीवी टीम 2015 से 13 आईसीसी टूर्नामेंटों में से छह के फाइनल में पहुंची लेकिन सिर्फ एक 2021 विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप जीती । इस टूर्नामेंट में पाकिस्तान क्रिकेट का लंबे समय से चला आ रहा खराब दौर जारी रहा । बार बार कप्तान बदलना, टीम में एकता का अभाव और खिलाड़ी विकास कार्यक्रम की कमी साफ नजर आई ।

वहीं एसोसिएट टीमों ने अपने प्रदर्शन की छाप छोड़ी हालांकि उन्हें अभी लंबा सफर तय करना है । अमेरिका ने भारत को कड़ी चुनौती दी जबकि इंग्लैंड टीम नेपाल के खिलाफ उलटफेर का शिकार होने से बची । कनाडा के युवराज सामरा ने न्यूजीलैंड के खिलाफ शतक जमाया और जिम्बाब्वे ने आस्ट्रेलिया को ग्रुप चरण में हराकर बाहर किया ।(भाषा)

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