गैस की आपूर्ति

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भारतीय मीडिया पर तरह-तरह के सवाल खड़े किए जाते हैं। उसे गोदी मीडिया नाम दिया गया है। साथ ही कहा जाता है कि मीडिया सरकार से सवाल नहीं करती लेकिन यह आरोप बेबुनियाद है क्योंकि मीडिया तो सरकार से सवाल करती हैं परंतु जवाब सरकार नहीं देती है। इनके सवालों का जवाब मीडिया स्वयं ही दे देती है। अब बताइये कहां मिलेगा ऐसा काबिल मीडिया! एलपीजी गैस की कमी का जवाब सरकार के पास भले न हो पर मीडिया के पास है।

सरकारी प्रवक्ता इस बात पर चुप रहते हैं पर न्यूज़ एंकर जवाब दे देते हैं। मीडिया का कहना है कि विश्व गुरु को गैस की कोई कमी नहीं होगी। मीडिया ने हमें यह भी बताया की होर्मुज स्ट्रेट में हमारे एलपीजी के दो जहाजों को हरी झंडी मिल गई है। इसका ज़श्न मनाया जा रहा है। अमेरिका ईरान युद्ध में हम ईरान को हमलावर मान रहे हैं फिर भी उसने दो जहाजों को जाने दिया यह हमारी लीडरशिप और मीडिया का कमाल है।

कमाल तो यह भी है कि एलपीजी के लिए लंबी कतारें लगी हैं। लोगों को गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। यहां तक कि विपक्षियों को प्रदर्शन के लिए भी सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। पहले बात-बात पर सिलेंडर लेकर विपक्षी धरने पर बैठ जाते थे। वाकई आम जनता अब धैर्यवान हो गई है या उसे विश्वास है कि धरना प्रदर्शन से कुछ हासिल नहीं होगा। पढ़े-लिखे लोग व्हाट्सऐप पर हमें बता रहे हैं कि बारह बरस पहले गैस सिलेंडर की कीमत 1241 रुपये थी परंतु वे सब्सिडी को भूल जाते हैं। वे चाहते हैं कि जनता भी सब कुछ भूल जाए और पुराने वीडियो न देखें।

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गैस की कमी छुपाने के लिए सख्ती और प्रतिबंध जरूरी

जब मीडिया काबिल है तो सरकार भी काबिल होनी चाहिए। काबिल सरकार वही है जो अपनी नाकामी को छुपा ले। गैस की कमी को छुपाना जरूरी है। इसके लिए कड़ाई भी करनी पड़ती है। कार्टून पर बैन, मिपी पर बैन, एलपीजी के लिए लाइन में लगे लोगों का वीडियो दिखाने पर एफआईआर जैसे कदम देश हित में जरूरी है। काबिल सरकार देशहित में कभी पीछे नहीं रहती है।

एलपीजी की लाइनों ने नोटबंदी की यादें ताजा कर दी हैं। लाइन में परस्पर विरोधी विचार वाले दो मित्र मिल गए।
पहला – इतने बड़े युद्ध के बाद भी हमें तीन घंटे में सिलेंडर मिल ही जाएगा। दूसरा -इस संकट के बाद भी हमारे नेता चुनाव प्रचार में लग गए हैं।

पहला ( हंसकर) – युद्ध तो होते रहते हैं चुनाव कभी-कभार होते हैं।
दूसरा – लगता है आप भी मेरी तरफ ही हैं।
पहला – मैं आजकल व्हाट्सऐप के बदले यूट्यूब देख रहा हूँ।
दूसरा – देर आयद दुरुस्त आयद।
तभी शर्मा जी जाते हुए दिखे। दोनों ने उन्हें आवाज दी। शर्मा -लगे रहो लाइन में यही आपकी नियति है।
पहला – आप निश्चिंत दिखाई दे रहे हैं।
दूसरा – क्या आपको गैस की चिंता नहीं है। शर्मा – मैं इस सबसे ऊपर उठ गया हूँ।
दोनों (एक साथ)- वह कैसे? शर्मा जी वह इसलिए क्योंकि मेरे घर के बगल में गंदा नाला है।

राजशेखर चौबे

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