एलवी प्रसाद आई इंस्टीट्यूट में ग्लूकोमा जागरूकता सप्ताह 14 मार्च तक

हैदराबाद, नेत्र संबंधी स्वास्थ्य समस्या ग्लूकोमा के प्रति सजग करने के लिए एल.वी. प्रसाद आई इंस्टीट्यूट द्वारा ग्लूकोमा जागरूकता सप्ताह का आयोजन आगामी 14 मार्च तक किया जाएगा। कार्यक्रम में विविध प्रकार की गतिविधियों के माध्यम से आँखों की नियमित जाँच के प्रति सतर्क करते हुए ग्लूकोमा से सुरक्षित रहने का संदेश दिया जाएगा।

वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक वर्ल्ड ग्लूकोमा असोसिएशन और वर्ल्ड ग्लूकोमा पेशेंट्स असोसिएशन की एक संयुक्त वैश्विक पहल है। इस कड़ी में प्रतिवर्ष एल.वी. प्रसाद आई इंस्टीट्यूट अपने नेटवर्क में विश्व ग्लूकोमा सप्ताह का आयोजन करता है, ताकि इस गंभीर नेत्र रोग पर जनता का ध्यान केंद्रित करते हुए लोगों को जागरूक किया जा सके। इस वर्ष 14 मार्च तक ग्लूकोमा की शीघ्र पहचान और उपचार के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए विविध प्रकार की गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी। इसके अंतर्गत ग्लूकोमा मुक्त दुनिया के लिए एकजुट होना थीम पर कल्लम अंजी रेड्डी परिसर से केबीआर पार्क तक जागरूकता वॉक का आयोजन किया गया, जिसमें पाँच सौ लोगों ने भाग लिया।

एल.वी. प्रसाद आई इंस्टीट्यूट के वीएसटी सेंटर फॉर ग्लूकोमा केयर के प्रमुख डॉ. सिद्धार्थ दीक्षित ने कहा कि रोगी जागरूकता की कमी के कारण ग्लूकोमा एक बेहद खतरनाक स्थिति बन जाती है। इससे लाखों मरीजों में अपरिवर्तनीय दृष्टि हानि होने की प्रबल संभावना रहती है। इस बीमारी से निपटने के लिए शीघ्र निदान, रोकथाम और उपचार महत्वपूर्ण पहलू हैं। उन्होंने कहा कि मार्च का दूसरा सप्ताह विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के रूप में मनाया जाता है।

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देश में एक करोड़ से अधिक लोग ग्लूकोमा से पीड़ित

ग्लूकोमा को दृष्टि का मूक चोर भी कहा जाता है, क्योंकि दृष्टि हानि धीरे-धीरे बिना किसी स्पष्ट लक्षण के हो सकती है। ग्लूकोमा का पता लगाने का एकमात्र विश्वसनीय तरीका व्यापक नेत्र परीक्षण है। इस वर्ष का विषय चाइल्डहुड ग्लूकोमा है। यह हमें याद दिलाता है कि ग्लूकोमा न केवल वयस्कों, बल्कि बच्चों और नवजात शिशुओं को भी प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि रेटिना और फंडस मूल्यांकन सहित विस्तृत नेत्र जाँच के लिए समय निकालना आवश्यक है।

एलवीपीईआई के मानद उपाध्यक्ष डॉ. जी. चंद्रशेखर ने कहा कि विश्व ग्लूकोमा सप्ताह भारतीय संदर्भ में महत्वपूर्ण है। कारण है कि देश में एक करोड़ से अधिक लोग ग्लूकोमा से पीड़ित हैं, जिनमें से लगभग ग्यारह लाख लोग पूरी तरह से अंधे हैं। यह आँकड़ा इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ग्लूकोमा से पीड़ित लगभग नब्बे प्रतिशत लोगों को यह पता ही नहीं होता कि वह इससे जूझ रहे हैं। यह इस बीमारी के बारे में जागरूकता के वर्तमान स्तर को दर्शाता है। समय पर क्रीनिंग और नेत्र विशेषज्ञों से नियमित परामर्श के माध्यम से हम सभी के लिए आँखों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी लेना महत्वपूर्ण है।

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